BY: Yoganand Shrivastva
नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने मंगेतर की हत्या के एक चर्चित मामले में दोषी करार दी गई महिला और उसके प्रेमी को बड़ी राहत दी है। अदालत ने दोनों की गिरफ्तारी और उम्रकैद की सजा पर अस्थायी रोक लगाते हुए उन्हें कर्नाटक के राज्यपाल से क्षमादान की अपील करने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया है। इस फैसले को लेकर देशभर में चर्चा हो रही है, क्योंकि कोर्ट ने इसे “गलत दिशा में गया विद्रोह” और “रोमांटिक भ्रम” का मामला बताया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2003 का है जब शुभा शंकर नाम की महिला ने अपने प्रेमी अरुण और दो अन्य साथियों – दिनाकरन और वेंकटेश – की मदद से अपने मंगेतर गिरीश की हत्या कर दी थी। गिरीश के साथ उसकी सगाई हो चुकी थी, लेकिन वह शादी नहीं करना चाहती थी।
कोर्ट के अनुसार, यदि परिवार की ओर से शादी के लिए दबाव नहीं डाला गया होता, तो इस तरह की त्रासदी टाली जा सकती थी। अदालत ने माना कि घटना के समय आरोपी किशोर अवस्था में थे और सामाजिक व भावनात्मक दबाव ने इस अपराध की पृष्ठभूमि तैयार की।
सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां
- अदालत ने कहा कि वह इस केस को एक मानवीय दृष्टिकोण से देख रही है।
- यह माना गया कि अपराध जघन्य था, लेकिन उसके पीछे भावनात्मक असंतुलन और पारिवारिक दबाव जैसे कारण भी थे।
- कोर्ट ने यह भी कहा कि दोषियों के पास कानूनी प्रक्रिया से इतर राज्यपाल से क्षमादान की मांग करने का अवसर होना चाहिए।
सजा पर अस्थायी रोक
न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने स्पष्ट किया कि जब तक राज्यपाल के समक्ष दया याचिका पर निर्णय नहीं हो जाता, तब तक दोषियों की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी और उनकी सजा स्थगित रहेगी।
राज्यपाल से आग्रह
कोर्ट ने कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत से इस केस की परिस्थितियों पर विचार करने और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है। यह पहली बार है जब सुप्रीम कोर्ट ने हत्या जैसे गंभीर अपराध में दोषियों को सामाजिक पृष्ठभूमि और मानसिक स्थिति के आधार पर दया का अवसर प्रदान किया है।





