भोपाल में 33 पटवारियों का तबादला: वर्षों से एक ही तहसील में जमे थे अधिकारी, कलेक्टर ने लिया बड़ा फैसला

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भोपाल में 33 पटवारियों का तबादला

🔰 भोपाल में राजस्व विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव

भोपाल जिले में लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत पटवारियों के तबादले की मांग आखिरकार पूरी हो गई है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने राजस्व विभाग में बड़ा फेरबदल करते हुए 33 पटवारियों और 4 राजस्व निरीक्षकों का तबादला कर दिया है।

इन अधिकारियों को एक तहसील या हल्के से दूसरी तहसील में स्थानांतरित किया गया है, ताकि पारदर्शिता और कार्यक्षमता बनी रहे।


🕵️‍♂️ सांसद आलोक शर्मा की पहल से हुआ बदलाव

इस तबादले की प्रक्रिया की नींव तब पड़ी जब भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने करीब 8 महीने पहले प्रभारी मंत्री चैतन्य काश्यप के सामने इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने एक विस्तृत सूची सौंपते हुए मांग की थी कि वर्षों से एक ही स्थान पर जमे अधिकारियों को स्थानांतरित किया जाए।

जानकारी के अनुसार, एक प्रारंभिक लिस्ट में 183 पटवारियों और राजस्व निरीक्षकों के नाम शामिल थे।


🔎 23 साल से जमे थे कुछ पटवारी

आलोक शर्मा द्वारा दी गई सूची में कुछ ऐसे नाम शामिल थे जो 23 साल से एक ही तहसील में पदस्थ थे। नीचे कुछ प्रमुख नाम दिए गए हैं:

  • भगवत सिंह धनगर
  • नरेंद्र बचोतिया
  • योगेंद्र कुमार सक्सेना
  • धर्मेंद्र सिंह कुशवाह
  • नासिर उद्दीन
  • महेश कुमार बंकरिया
  • मनोहर सिंह राजपूत
  • रेणू पटेल
  • नीलिमा नागर
  • प्रदीप गौर
  • अर्चना भटनागर
  • जयेंद्र चंदेलकर
  • प्रियंका सिलावट
  • अभिषेक शर्मा
  • आलोक इंदौरिया
  • दीक्षा शर्मा

इन अधिकारियों में से कई के नाम मंगलवार को जारी तबादला सूची में भी शामिल हैं।


📋 किन तहसीलों से कितने नाम?

भोपाल जिले की प्रमुख तहसीलों में बड़ी संख्या में पटवारियों ने लम्बे समय से कार्य किया है। सांसद द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार:

  • हुजूर तहसील: 104 पटवारी हल्के
  • बैरसिया तहसील: 103 पटवारी हल्के
  • कोलार तहसील: 24 पटवारी हल्के

सांसद ने हुजूर और बैरसिया से 84-84 पटवारियों और कोलार से 15 पटवारियों की लिस्ट दी थी, जो तीन साल से अधिक समय से जमे हुए थे।

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🏛️ प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम

भोपाल कलेक्टर का यह निर्णय न केवल प्रशासनिक स्थायित्व को तोड़ने वाला है, बल्कि यह साफ दर्शाता है कि स्थानांतरण नीति का पालन करना अब अनिवार्य किया जा रहा है। इससे:

  • राजस्व विभाग में पारदर्शिता बढ़ेगी
  • काम में ताजगी और जवाबदेही आएगी
  • वर्षों से जमे अधिकारियों पर अंकुश लगेगा

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