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Bhopal : मुख्यमंत्री डॉ. यादव वनों की समृद्धि और जैव विविधता के प्रति संवेदनशील

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Bhopal : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वन्य जीव संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को लेकर एक दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रहे हैं। अपने जन्मदिवस के अवसर पर उन्होंने सागर जिले के वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) में संरक्षित प्रजाति के कछुओं को जल में विमुक्त कर प्रकृति के प्रति अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया। मुख्यमंत्री का मानना है कि प्रकृति और वन्यजीवों की सेवा ही वास्तव में ईश्वर की सच्ची सेवा है।

Bhopal जल और थल के पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण

मुख्यमंत्री के अनुसार, जलीय जीव और वन्य प्राणी जैव-विविधता के संतुलन में रीढ़ की हड्डी के समान हैं। इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए:

  • कछुआ संरक्षण: जल संरचनाओं को स्वच्छ रखने और पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए संरक्षित कछुओं को प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया।
  • चीता पुनर्वास: चीतों के संरक्षण के लिए विशेष बाड़े का पूजन कर प्रदेश के पर्यटन और वन्यजीव ग्राफ को बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
  • रोजगार सृजन: इन गतिविधियों से न केवल पर्यावरण सुरक्षित होगा, बल्कि ईको-टूरिज्म के माध्यम से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

Bhopal ‘विजन@2047’: भविष्य के वनों का रोडमैप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत@2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने “री-इमेजिनिंग फॉरेस्ट रिसोर्सेस फॉर द क्लाइमेट रेसिलियंट फ्यूचर” नामक महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट का विमोचन किया। इसके प्रमुख बिंदु हैं:

  • नदियों का उद्गम स्थल: प्रदेश के वन देश की कई प्रमुख नदियों के स्रोत हैं, जो अन्य राज्यों की जल सुरक्षा भी सुनिश्चित करते हैं।
  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण: बदलते वर्षा पैटर्न और बढ़ते तापमान (Climate Change) से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और विज्ञान आधारित वन प्रबंधन को अपनाना।
  • डिजिटल पारदर्शिता: वन प्रबंधन में जवाबदेही तय करने के लिए डिजिटल तकनीक और पारदर्शी कार्यप्रणाली का उपयोग।

Bhopal सामुदायिक सहभागिता: वन रक्षक के रूप में समाज

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की रणनीति में वनों पर आश्रित समुदायों को केवल ‘लाभार्थी’ नहीं, बल्कि ‘सह-प्रबंधक’ माना गया है।

  • जब स्थानीय समुदायों को वनों से प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त होगा, तो वे स्वयं वनों के सबसे सशक्त रक्षक बनकर उभरेंगे।
  • समावेशी विकास के इस मॉडल से आने वाली पीढ़ियों को एक स्वस्थ, उत्पादक और समृद्ध प्राकृतिक विरासत सौंपी जा सकेगी।
  • हरित आच्छादन बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक रणनीति के तहत सामुदायिक वानिकी और प्रकृति शिक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

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