भिंड में ड्यूटी फर्जीवाड़ा: मास्क पहनकर लगा रहे थे हाजिरी, लोकेशन ने खोला राज

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सार्थक ऐप हाजिरी घोटाला

📍 मामला क्या है?

मध्य प्रदेश के भिंड जिले के अटेर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक हैरान कर देने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां कई कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर बिना आए ही सार्थक ऐप के जरिए हाजिरी दर्ज करवा रहे थे। हैरानी की बात ये है कि कुछ कर्मचारी राजस्थान और उत्तर प्रदेश में बैठकर उपस्थिति दर्ज कर रहे थे, जबकि कुछ ने मास्क और साफी से चेहरा छिपाकर दूसरों से हाजिरी लगवाई।


📲 कैसे पकड़ा गया फर्जीवाड़ा?

  1. समीक्षा बैठक में खुली पोल:
    एक जिला स्तरीय स्वास्थ्य समीक्षा बैठक में जब कर्मचारियों की उपस्थिति और कार्य की तुलना की गई तो गड़बड़ी सामने आई।
    • कई कर्मचारियों के सिर्फ 8-10 दिन कार्य रिकॉर्ड में थे, जबकि ऐप में पूरे महीने की उपस्थिति दिख रही थी।
  2. लोकेशन ट्रैकिंग से हुआ खुलासा:
    • सार्थक ऐप GPS लोकेशन के साथ हाजिरी रिकॉर्ड करता है।
    • कई कर्मचारियों की लोकेशन भिंड की बजाय राजस्थान और उत्तर प्रदेश पाई गई।
  3. चेहरे ढककर हाजिरी:
    • कुछ कर्मचारियों ने ऐप में चेहरा ढककर फोटो अपलोड किया।
    • लंबे समय तक यही तरीका अपनाने पर उनका शक गहरा गया और मामला पकड़ में आ गया।

🕵️‍♂️ कौन-कौन हैं आरोपी?

  • सीएचओ सुनील कुमार (रिठौली): राजस्थान से हाजिरी लगा रहे थे।
  • सीएचओ रितु नागर (खिपोना) और राजीव (दीखतानपुरा): मास्क और साफी से मुंह छिपाकर ऐप में हाजिरी दर्ज करवा रहे थे।

⚠️ वेतन काटने के आदेश जारी

इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. जेएस यादव ने दोषियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया।
👉 संबंधित कर्मचारियों का वेतन काटने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।


📉 फर्जीवाड़े का तरीका

  • एप में खुद लॉगिन कर लोकेशन के साथ उपस्थिति दर्ज करना होता है।
  • कुछ कर्मचारियों ने दूसरों से अपना लॉगिन करवा कर हाजिरी लगवाई।
  • लाइव फोटो में पलक झपकाना जरूरी होने के कारण उन्होंने चेहरा मास्क या साफी से ढक लिया।
  • लगातार ऐसा करने से असली लोकेशन और पहचान ऐप में रेकॉर्ड हो गई, जिससे भेद खुल गया।

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🧠 क्या कहता है यह मामला?

इस घटना ने सरकारी तंत्र में तकनीकी लापरवाही और सिस्टम के दुरुपयोग को उजागर कर दिया है।
हालांकि, सार्थक ऐप जैसी डिजिटल उपस्थिति प्रणाली का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना है, लेकिन जब तक इनका ईमानदारी से पालन नहीं होता, तब तक तकनीक भी नाकाम हो जाती है।

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