रिपोर्ट: बॉबी अली भगवाँ
Badamalhara news: बकस्वाहा शासकीय महाविद्यालय बकस्वाहा में शिक्षण व्यवस्था सुधार के दावे ज़मीनी हकीकत में खोखले साबित हो रहे हैं। कॉलेज में पढ़ाई लगभग ठप है और आधे से अधिक शिक्षक नियमित रूप से अनुपस्थित बताए जा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि दोपहर बारह बजे तक दो-तीन कक्षाओं को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश कक्षाएं खाली पड़ी रहती हैं। पढ़ाई के बजाय परिसर में भटकते छात्र-छात्राएं व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं।
महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापकों के 11 पद स्वीकृत हैं, लेकिन नियमित रूप से सिर्फ तीन-चार शिक्षक ही उपस्थित रहते हैं। स्थिति यह भी रही कि निरीक्षण के दौरान महाविद्यालय की प्राचार्य भी मौजूद नहीं मिलीं, जिससे शिक्षण व्यवस्था पर और गंभीर प्रश्न खड़े हो गए।
बीए फाइनल के विद्यार्थियों की परेशानी सबसे अधिक सामने आ रही है। छात्रों का कहना है कि संबंधित विषयों के प्राध्यापक छुट्टी पर हैं और महीनों से कक्षाएं नहीं लगी हैं। वर्तमान में केवल राजनीति शास्त्र की कक्षा ही कभी-कभार संचालित हो रही है, शेष विषयों की पढ़ाई पूरी तरह ठप बताई जा रही है। विद्यार्थियों के अनुसार सप्ताह में केवल दो दिन नाममात्र की कक्षाएं लगती हैं, जबकि पूरे महीने में मुश्किल से दो-तीन दिन ही पढ़ाई होती है विद्यार्थी परिषद के नगर अध्यक्ष राहुल प्रजापति ने आरोप लगाया कि शिक्षण व्यवस्था को लेकर यदि छात्र शिकायत करते हैं या कैमरे के सामने अपनी बात रखते हैं, तो उन्हें धमकाया जाता है। इससे छात्रों में भय का माहौल बन गया है और वे खुलकर अपनी समस्याएं सामने नहीं रख पा रहे हैं प्राचार्य का पक्ष इस संबंध में जब महाविद्यालय की प्राचार्य श्रीमती पुष्पा सामवेद से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि “स्वास्थ्य कारणों के चलते आज मैं स्वयं अवकाश पर हूं। स्टाफ के कुछ सदस्य भी छुट्टी पर हैं और कुछ शासकीय व कार्यालयीन कार्य चल रहे हैं। इसके बावजूद कल मैं स्वयं यह जांच करूंगी कि कौन-कौन से शिक्षक अनुपस्थित रहे हैं और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी फिलहाल छात्र-छात्राएं ठोस कार्रवाई और नियमित कक्षाओं की शुरुआत का इंतज़ार कर रहे हैं। अब देखना यह है कि जांच और कार्रवाई के बाद शासकीय महाविद्यालय बकस्वाहा की शिक्षण व्यवस्था पटरी पर लौटती है या नहीं।





