BY
Yoganand Shrivastava
America: वेनेज़ुएला की राजधानी कराकास में एक रात ऐसा मंजर दिखा, जिसने पूरे देश को हिला दिया। तेज धमाकों से इमारतें कांप उठीं, आसमान में लगातार मंडराते हेलिकॉप्टरों की आवाज़ से सन्नाटा टूट गया और कई इलाकों की बिजली गुल हो गई। उसी अंधेरी रात में अमेरिकी विशेष बलों ने एक गुप्त सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया।
राष्ट्रपति मादुरो को हिरासत में लेने का दावा
इस कार्रवाई के दौरान वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके अत्यधिक सुरक्षित ठिकाने से निकालकर हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया। वाशिंगटन में इस पूरे अभियान को एक विशेष नाम दिया गया था और इसकी निगरानी सीधे अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व द्वारा की जा रही थी।
महीनों चली खुफिया तैयारी
सूत्रों के अनुसार, इस मिशन से पहले अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने कई महीनों तक मादुरो की दिनचर्या पर गहरी निगरानी रखी। वे कहां रहते हैं, किन रास्तों का इस्तेमाल करते हैं, उनकी सुरक्षा व्यवस्था कैसी है—इन सभी पहलुओं की बारीकी से जानकारी जुटाई गई।
सुरक्षित ठिकाने की हूबहू नकल
तैयारी का स्तर इतना गहरा था कि कराकास स्थित मादुरो के सुरक्षित आवास की पूरी संरचना की एक समान प्रतिकृति बनाकर सैनिकों को अभ्यास कराया गया। प्रवेश और निकासी के हर संभावित रास्ते पर बार-बार अभ्यास किया गया ताकि किसी भी स्थिति में चूक न हो।
हवा, समुद्र और ज़मीन से एकसाथ हमला
कार्रवाई के दौरान एक साथ कई मोर्चों से दबाव बनाया गया। हवाई हमलों, समुद्री गतिविधियों और ज़मीनी दस्तों की संयुक्त कार्रवाई से कराकास के कई हिस्सों में जोरदार धमाकों की आवाज़ सुनी गई। पूरे अभियान को सीमित समय में पूरा करने की रणनीति अपनाई गई।
सही वक्त का किया गया इंतज़ार
इस मिशन को शुरू करने से पहले मौसम, बादलों की स्थिति और दृश्यता जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया। वर्ष के अंत तक सभी बलों को पूरी तरह सतर्क रखा गया और अंततः एक रात अभियान को हरी झंडी दी गई।
वैश्विक राजनीति में हलचल
इस कार्रवाई के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं। कई देशों ने वेनेज़ुएला की संप्रभुता पर सवाल उठाए, जबकि कुछ ने पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक पुष्टि का इंतज़ार करने की बात कही।





