हाईकोर्ट में अंबेडकर प्रतिमा विवाद: पूर्व चीफ जस्टिस बोले- आंदोलन नहीं रुकेगा, हर कोर्ट में लगेगी बाबा साहब की मूर्ति

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BY: Yoganand Shrivastva

भोपाल, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापना को लेकर पिछले छह महीनों से चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। इस मुद्दे पर पहली बार प्रदेश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत ने अपनी चुप्पी तोड़ी और स्पष्ट कहा – “यह आंदोलन रुकेगा नहीं, बल्कि अब हर हाईकोर्ट और जिला कोर्ट में बाबा साहब की मूर्ति लगेगी।”


विरोध के बावजूद मूर्तियां लगेंगी, बस समय लगेगा

भास्कर से खास बातचीत में पूर्व चीफ जस्टिस ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा प्रतिमा का विरोध किया जा रहा है, लेकिन बहुमत इसे लगाने के पक्ष में है। उनका मानना है कि यह विवाद एक सकारात्मक दिशा में ले जाएगा, और अंततः सभी न्यायालय परिसरों में अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा –

“जब कोई सामाजिक हलचल होती है, तो उसे मुकाम तक पहुंचाने के लिए आंदोलन को तेज करना पड़ता है। इसे अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए।”


सरकार ने नहीं की कोई चूक, विरोध का हल कोर्ट में ही निकलेगा

सुरेश कुमार कैत ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने इस मामले में कोई अड़चन नहीं डाली। उनका कहना था कि जब प्रस्ताव सरकार के पास भेजा गया था, तब सरकार ने नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट दिया था, और प्रतिमा लगाने के लिए अधिवक्ताओं ने स्वेच्छा से धन जुटाकर मूर्ति बनवाई।

उनके अनुसार, अंतिम अनुमति हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा दी जाती है और अब यह मामला पुनः फुल कोर्ट में विचाराधीन है, जिसके बाद मूर्ति स्थापित की जा सकती है।


मप्र हाईकोर्ट में पहली बार एससी-एसटी जजों की एंट्री की पहल मैंने की

पूर्व चीफ जस्टिस ने अपनी उपलब्धियों का ज़िक्र करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में अब तक कोई एससी या एसटी वर्ग का जज न सेवा से और न ही वकालत से बना है, लेकिन उनके कार्यकाल में दो अधिवक्ताओं के नाम कॉलेजियम द्वारा मंजूर किए गए। इसके चलते जल्द ही मप्र हाईकोर्ट को पहले एससी-एसटी वर्ग के जज मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने बताया कि –

“ये एक ऐतिहासिक कदम है। जब मैं हेड था, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने भी दोनों नामों को मंजूरी दी थी।”


भोपाल गैस त्रासदी का दबा कचरा हटवाया, ये भी एक बड़ा न्यायिक फैसला रहा

सुरेश कुमार कैत ने अपने कार्यकाल की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि का ज़िक्र करते हुए कहा कि भोपाल गैस त्रासदी के बाद यूनियन कार्बाइड की फैक्ट्री में 40 साल से दबा पड़ा जहरीला कचरा, उनके आदेश के बाद हटाया गया।

“मैंने वह खुलवाकर दबवा दिया और कार्यवाही पूरी कराई। ये भी मेरे न्यायिक जीवन का एक संतोषजनक निर्णय था।”


राजनीति के लिए फिट नहीं, पर राष्ट्रपति की अनुशंसा मानी जाएगी

राजनीति में आने की संभावना पर पूछे गए सवाल के जवाब में जस्टिस कैत ने साफ किया कि वे राजनीति के लिए खुद को उपयुक्त नहीं मानते। उन्होंने कहा –

“राजनीति में बोलने, वादे करने और उन्हें निभाने का तरीका अलग होता है। मेरी ट्रेनिंग वैसी नहीं है। हम सच बोलते हैं, और राजनीति में हर कोई सच नहीं बोलता।”

हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि यदि राष्ट्रपति उन्हें राज्यसभा जैसे सदन में ज्यूरिस्ट के रूप में नामित करें तो? इस पर उन्होंने कहा –

“अगर राष्ट्रपति महोदया ऐसा आदेश देंगी, तो हम उसे सिर-माथे पर रखेंगे।”

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