BY: Yoganand Shrivastva
जबलपुर: मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण (Reservation in Promotion) को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। राज्य सरकार द्वारा लाई गई नई पदोन्नति नीति पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
मंगलवार को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान सरकार से पूछा कि, जब पुरानी नीति का मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, तो इस बीच नई नीति क्यों लागू की गई?
हाईकोर्ट के सवाल
- अगर सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने (Status Quo) के निर्देश दिए हैं, तो सरकार नए नियम के आधार पर प्रमोशन कैसे दे रही है?
- अगर सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन याचिकाएं स्वीकार या खारिज होती हैं, तो नई नीति के तहत दी गई पदोन्नतियों पर क्या असर पड़ेगा?
सरकार का जवाब
राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन और महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जल्द ही वर्तमान स्थिति पर स्पष्टीकरण जारी किया जाएगा।
अगली सुनवाई 25 सितंबर को
कोर्ट ने कहा कि जब तक सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं आता, तब तक इस मामले पर आगे सुनवाई नहीं होगी। अगली सुनवाई की तारीख 25 सितंबर 2025 तय की गई है।
गौरतलब है कि सरकार ने मौखिक अंडरटेकिंग दी है, जिसके चलते फिलहाल नई नीति के तहत होने वाले प्रमोशन अस्थायी रूप से रोक दिए गए हैं।





