रिपोर्टर: सुरेश कुमार
सिंगरौली जिले में राखड़ (ऐश) परिवहन करने वाले भारी वाहनों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। प्रशासनिक आदेशों के बावजूद ओवरलोड ट्रक खुलेआम सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इससे न केवल सड़कों की हालत बिगड़ रही है बल्कि आम लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
ओवरलोड गाड़ियां बन रहीं खतरे की घंटी
स्थानीय लोगों के अनुसार, राखड़ से भरे ट्रकों की अधिकतम संख्या और वजन नियंत्रण के बिना ही सड़कों पर दौड़ रही है।
- सड़कों की टूट-फूट – लगातार भारी वाहनों की आवाजाही से सड़कें जर्जर हो रही हैं।
- हादसों की आशंका – ओवरलोडिंग के कारण ट्रकों का संतुलन बिगड़ने से दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं।
- धूल व प्रदूषण – ट्रकों से उड़ने वाली राखड़ और धूल आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण फैला रही है।
स्थानीय लोगों की परेशानियां
गांव और शहर के बीच की सड़कों पर आए दिन जाम की स्थिति बन रही है।
- स्वास्थ्य पर असर – धूल और राखड़ के कारण लोगों को सांस व त्वचा संबंधी बीमारियां हो रही हैं।
- यातायात में बाधा – लगातार ट्रैफिक जाम से आम जनता के समय और संसाधन बर्बाद हो रहे हैं।
प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन ओवरलोड गाड़ियों पर रोकथाम के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे।
- नियम-कायदे सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं।
- पुलिस और प्रशासन की आंखों के सामने ही ये वाहन बेरोकटोक गुजर रहे हैं।
ग्रामीणों और संगठनों की मांग
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
- ओवरलोड वाहनों पर कड़ी कार्यवाही की जाए।
- सड़कों की मरम्मत और प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
- हादसों पर रोक लगाने के लिए सख्त निगरानी तंत्र लागू किया जाए।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
यातायात प्रभारी दीपेंद्र सिंह कुशवाहा ने बताया कि ओवरलोड वाहनों की निगरानी और कार्रवाई के लिए अभियान चलाया जाएगा। प्रशासन का दावा है कि जल्द ही हालात में सुधार लाने के कदम उठाए जाएंगे।
सिंगरौली जिले में ओवरलोड राखड़ परिवहन एक गंभीर समस्या बन चुकी है। प्रशासन को चाहिए कि इस मुद्दे को प्राथमिकता से सुलझाए, ताकि आम लोगों की जान-माल की सुरक्षा और पर्यावरण दोनों की रक्षा हो सके।





