BY: Yoganand Shrivastva
नई दिल्ली, – देश के 15वें उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए मंगलवार, 9 सितंबर को मतदान होगा और परिणाम उसी शाम घोषित किए जाने की संभावना है। एनडीए की ओर से सी. पी. राधाकृष्णन मैदान में हैं, जबकि विपक्षी इंडिया गठबंधन की ओर से पी. सुदर्शन रेड्डी उम्मीदवार हैं। यह चुनाव उस समय हो रहा है जब जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था।
कहां और कब होगा मतदान
उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए संसद भवन के कमरा नंबर F-101 (वसुधा) में मतदान होगा। वोटिंग सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। शाम 6 बजे से मतगणना शुरू होगी और कुछ ही घंटों में नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। इस चुनाव की जिम्मेदारी राज्यसभा के महासचिव पी. सी. मोदी को रिटर्निंग ऑफिसर के रूप में सौंपी गई है।
कौन-कौन डाल सकते हैं वोट
उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित और नामित सदस्यों द्वारा किया जाता है। इस बार निर्वाचन मंडल में:
- राज्यसभा के 233 निर्वाचित और 12 नामित सदस्य (6 सीटें रिक्त),
- लोकसभा के 543 निर्वाचित सदस्य (1 सीट रिक्त) शामिल हैं।
कुल मिलाकर 788 सदस्य (वर्तमान में 781) मतदान के पात्र हैं।
मतदान की प्रक्रिया
मतदान गुप्त मतपत्र और सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम (STVS) के तहत होता है। मतपत्र पर उम्मीदवारों के नाम हिंदी और अंग्रेजी में होते हैं, जहां सांसद अपनी प्राथमिकता क्रम (1, 2, 3…) अंकित करते हैं। यह प्राथमिकताएं हिंदी या अंग्रेजी में लिखी जा सकती हैं।
सांसदों को मतदान के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना अनिवार्य है। केवल प्रिवेंटिव डिटेंशन में बंद सांसद पोस्टल बैलट से वोट डाल सकते हैं। इस बार शेख अब्दुल रशीद (बारामूला) और अमृतपाल सिंह (खडूर साहिब) डाक मतपत्र से मतदान करेंगे।
मतगणना कैसे होती है
वोटिंग के बाद वैध मतों की जांच की जाती है। पहले चरण में केवल पहली प्राथमिकता के वोट गिने जाते हैं। यदि कोई उम्मीदवार कुल वैध मतों का 50% से अधिक प्राप्त कर लेता है, तो वह विजयी घोषित होता है। यदि ऐसा नहीं होता, तो सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवार को बाहर कर दिया जाता है और उसके वोट अगले उम्मीदवारों को उनकी प्राथमिकता के अनुसार ट्रांसफर किए जाते हैं। यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक कोई उम्मीदवार बहुमत हासिल नहीं कर लेता।
क्यों है उपराष्ट्रपति चुनाव विशेष
- यह चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं लड़ा जाता, न ही किसी पार्टी की ओर से व्हिप जारी होता है।
- सांसद स्वतंत्र रूप से किसी भी उम्मीदवार को वोट दे सकते हैं।
- इस पर दल-बदल विरोधी कानून लागू नहीं होता।
- अगर किसी उम्मीदवार को वैध मतों का छठा हिस्सा भी नहीं मिलता, तो उसकी 15,000 रुपये की जमानत राशि जब्त हो जाती है।
- परिणामों को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की जा सकती है, जो किसी उम्मीदवार या निर्वाचन मंडल के कम से कम 10 सदस्यों द्वारा दी जा सकती है।
- नतीजों पर आपत्ति सिर्फ 30 दिनों के भीतर उठाई जा सकती है।
उपराष्ट्रपति को मिलने वाली सुविधाएं
- उपराष्ट्रपति को राज्यसभा के सभापति के रूप में वेतन मिलता है, जो वर्तमान में 4 लाख रुपये प्रति माह है।
- उन्हें सरकारी आवास, ट्रैवल अलाउंस, मुफ्त रेल और हवाई यात्रा, लैंडलाइन, मोबाइल जैसी सुविधाएं मिलती हैं।
- परिवार सहित मुफ्त चिकित्सा सुविधा और 24 घंटे सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है।
- रिटायरमेंट के बाद उपराष्ट्रपति को 50% वेतन पेंशन के रूप में मिलता है। वर्तमान में यह राशि लगभग 2 लाख रुपये प्रति माह है।
- पूर्व उपराष्ट्रपति को टाइप-8 बंगला, निजी सचिव, अतिरिक्त निजी सचिव, निजी सहायक, डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ दिया जाता है।
- उनके निधन के बाद जीवनसाथी को आजीवन टाइप-7 आवास का अधिकार रहता है।





