BY: Yoganand Shrivastva
नई दिल्ली/मॉस्को: दुनियाभर में तेजी से बढ़ते कैंसर मामलों के बीच एक बड़ी उम्मीद की खबर आई है। रूस के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने कैंसर के इलाज के लिए एक विशेष वैक्सीन तैयार कर ली है, जिसका पहला चरण का क्लीनिकल ट्रायल सफल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वैक्सीन मेडिकल दुनिया में एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
कैंसर मामलों की बढ़ती चुनौती
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार भारत में हर 9वां और 10वां व्यक्ति जीवन में कभी न कभी कैंसर के खतरे का सामना करता है। साल 2024 में देश में लगभग 16 लाख नए मरीजों की पहचान हुई और करीब 9 लाख लोगों की जान इस बीमारी से गई। ऐसे हालात में इस वैक्सीन को उम्मीद की किरण माना जा रहा है।
क्या है रूस की नई mRNA वैक्सीन?
रूस के वैज्ञानिकों ने जिस वैक्सीन को विकसित किया है, उसका नाम ‘EnteroMix’ है। यह mRNA तकनीक पर आधारित है, जो शरीर की कोशिकाओं को निर्देश देकर कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) विकसित करती है।
- शुरुआती (फेज 1) ट्रायल में यह वैक्सीन सुरक्षित और प्रभावी पाई गई।
- मरीजों को कोई गंभीर साइड-इफेक्ट नहीं हुआ और कई मामलों में ट्यूमर के आकार में कमी देखी गई।
mRNA तकनीक कैसे काम करती है?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस वैक्सीन में छोटे-छोटे mRNA अणुओं को शरीर में डाला जाता है। ये अणु शरीर की कोशिकाओं को एक खास प्रोटीन बनाने का निर्देश देते हैं, जिससे इम्यून सिस्टम कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर उन्हें नष्ट करने के लिए प्रशिक्षित हो जाता है।
- यह वैक्सीन हर मरीज के ट्यूमर की जेनेटिक संरचना के आधार पर अलग-अलग तैयार की जाती है।
- इसका मकसद केवल उसी व्यक्ति की कैंसर कोशिकाओं को टारगेट करना है।
कोविड-19 वैक्सीन जैसी तकनीक, लेकिन ज्यादा एडवांस
mRNA तकनीक का इस्तेमाल कोविड-19 वैक्सीन में भी किया गया था, जिससे इम्यून सिस्टम वायरस से लड़ने के लिए तैयार हुआ। EnteroMix इसी तकनीक को एक कदम आगे ले जाती है और व्यक्तिगत रूप से कस्टमाइज्ड कैंसर वैक्सीन तैयार करती है।
क्या कीमोथेरैपी और रेडिएशन का विकल्प बनेगी?
- यह वैक्सीन बेहद तेज़ी से तैयार की जा सकती है क्योंकि mRNA प्लेटफॉर्म फ्लेक्सिबल और फास्ट है।
- पारंपरिक इलाज जैसे कीमो और रेडिएशन की तुलना में इसके साइड-इफेक्ट बेहद कम हैं।
- इस वैक्सीन से मरीजों को बेहतर आराम और जीवन की गुणवत्ता मिलने की संभावना है।
आगे का रास्ता और संभावनाएं
अगर यह वैक्सीन बड़े पैमाने पर (फेज 2 और 3) ट्रायल में भी सफल रहती है, तो आने वाले समय में कैंसर का डर काफी हद तक कम हो सकता है। शुरुआत में इसे कोलोरेक्टल कैंसर, ग्लियोब्लास्टोमा (ब्रेन कैंसर) और ऑक्यूलर मेलेनोमा (आंख का कैंसर) जैसी गंभीर बीमारियों के लिए विकसित किया जा रहा है।
भारत जैसे देशों में, जहां कैंसर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, यह वैक्सीन जीवनरक्षक क्रांति बन सकती है।





