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प्रदेश में रीवाइल्डिंग से संतुलित होगी वाइल्डलाइफ इकोलॉजी

Wildlife ecology will be balanced by rewilding in the state

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल बनेगी अन्य राज्यों के लिये वन संरक्षण का मॉडल

भोपाल : सोमवार, सितम्बर 1, 2025, 18:33 IST

मध्यप्रदेश में स्वैम्प डियर (बारहसिंगा) सहित कई प्रजातियों के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए पुनर्वास एवं पुनर्प्रवेश कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। वैज्ञानिक पद्धति से इन प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास में पुनः स्थापित करने का प्रयास हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा इन प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिये ‘रीवाइल्डिंग’की अभिनव पहल की गई है। रीवाइल्डिंग का उद्देश्य वाइल्डलाइफ इकोलॉजी को संतुलित कर लुप्त होती प्रजातियों को पुनर्जीवित करना, संकटग्रस्त प्रजातियों का संरक्षण करना और जैव विविधता को बढ़ावा देना है। प्रदेश में की गई यह पहल अन्य राज्यों के लिए वन संरक्षण का मॉडल बनेगी।

रीवाइल्डिंग का अर्थ है प्रकृति को उसकी मूल अवस्था में लौटाना। इसके लिये जंगलों में उन प्रजातियों को पुनः बसाया जाता है, जिनके बिना पारिस्थितिकी तंत्र अधूरा है। इसमें शिकारी प्रजातियों और शिकार प्रजातियों को शामिल किया जाता है। माना जाता है कि इन प्रजातियों के बिना जंगल का आहार-संतुलन बिगड़ता है और नेचुरल लाइफ साइकिल टूट जाती है।

‘टाइगर स्टेट’ कहलाने वाला मध्यप्रदेश जैव विविधता से समृद्ध है। इसके बावजूद कई प्रजातियाँ विलुप्ति की कगार पर हैं। प्रदेश के वनों में स्वैम्प डियर (बारहसिंगा) की संख्या लगातार घट रही है। साथ ही बाघ और तेंदुए का संतुलन भी प्रभावित हुआ है। विलुप्त होती प्रजातियों को समय रहते पुनर्स्थापित कर जंगलों के साथ प्राकृतिक संतुलन को बनाये रखा जा सकता है।

वन विभाग ने रीवाइल्डिंग को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बनाई है। स्वैम्प डियर और अन्य प्रजातियों को पुनः प्राकृतिक आवास में बसाया जाएगा। केवल किसी एक जानवर पर नहीं, बल्कि पूरे जंगल में घास-भूमि और नदी के परिदृश्य पर ध्यान देकर जानवरों को बसाया जाएगा। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), वन अनुसंधान संस्थान और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ भी रीवाइल्डिंग के इस मिशन में सहयोग कर रहे हैं। जनजातीय और ग्रामीण समुदायों को भी इस कार्यक्रम से जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें वन्यजीव पर्यटन के साथ ही आजीविका के नए अवसर मिल सकें। वन्यजीव वैज्ञानिकों का कहना है कि रीवाइल्डिंग केवल जानवरों को बचाने का कार्यक्रम नहीं है। यह जलवायु परिवर्तन से निपटने का सशक्त उपाय भीहै, क्योंकि जंगल कार्बन भंडारण बढ़ाने और कार्बन फुटप्रिंट कम करने में मदद करते हैं। इससे जंगलों के साथ ही जल एवं मृदा संरक्षणभी होता है, क्योंकि इकोलॉजी के संतुलन से प्राकृतिक संसाधन भी सुरक्षित रहते हैं। रीवाइल्डिंग वन्य पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्थाको सशक्त बनाने का भी माध्यम है। इससे जंगल में बिना मानवीय हस्तक्षेप के प्राकृतिक चक्र सक्रिय बना रहेगा।

राज्य सरकार की यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब तक वन संरक्षण की नीतियाँ एक प्रजाति तक सीमित रहती थीं, किंतु रीवाइल्डिंग का फोकस पूरी तरह वाइल्डलाइफ इकोलॉजी पर है। यह प्रक्रिया देश के अन्य राज्यों में भी इकोलॉजी संतुलन के लिए मॉडल बन सकती है।

प्रदेश में रीवाइल्डिंग का प्रयास इस बात का संकेत है कि सरकार और समाज के प्रयास अब वन और वन्यजीव संरक्षण से आगे जा कर प्रकृति को उसकी मूल अवस्था में लौटाने की ओर अग्रसर हैं। इस पहल से मध्यप्रदेश वन्य जीवन संरक्षण में अग्रणी राज्य बनेगा।

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