BY: Yoganand Shrivastava
इंदौर: साइबर ठगों ने एक महिला को अपने जाल में फँसाने की कोशिश की, लेकिन सतर्कता और समझदारी से बड़ा नुकसान टल गया। ठगों ने खुद को दूरसंचार नियामक ट्राई (TRAI) और मुंबई पुलिस का अफसर बताकर महिला पर दबाव बनाया। महिला शुरुआत में उनकी बातों में आ गई, मगर जब ठग बार-बार वीडियो कॉल पर वर्दी ठीक करते दिखे, तो पति को शक हुआ। उसने तुरंत पुलिस अधिकारी से संपर्क किया और ठगों की पोल खुल गई।
कैसे रचा गया ठगी का खेल?
बंगाली चौराहे के पास आशीष नगर निवासी फाइनेंसर सुदीप सिंह सूद की पत्नी मोनिका सूद को एक कॉल आया। फोन करने वाले ने खुद को ट्राई का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनकी सिम कार्ड से अवैध गतिविधियाँ चल रही हैं। कॉलर ने यह भी दावा किया कि इस मामले में मुंबई के कोलाबा थाने में कई एफआईआर दर्ज हैं और अब कॉल को पुलिस स्टेशन से जोड़ा जाएगा।
इसके बाद महिला को वीडियो कॉल पर जोड़ा गया, जहाँ कुछ लोग पुलिस वर्दी पहनकर दिखाई दिए। वे बार-बार वर्दी को ठीक कर रहे थे और खुद को सीनियर अधिकारी बताकर महिला पर दबाव डालते रहे।
पति को हुआ शक
मोनिका ने स्थिति समझ न आने पर फोन अपने पति को पकड़ा दिया। ठगों ने उनसे भी निजी जानकारी माँगी। इस बीच सुदीप को ठगों की हरकत पर संदेह हुआ। उन्होंने तुरंत अपने मित्र और क्राइम ब्रांच के एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया को अलग फोन से कॉल कर पूरी बात बताई और उन्हें कॉन्फ्रेंस पर जोड़ लिया।
जैसे ही ठगों ने सुना कि सामने असली एडिशनल डीसीपी उनसे बात कर रहे हैं, वे घबरा गए और कॉल तुरंत काट दी।
करीब एक घंटे तक रखा ‘डिजिटल अरेस्ट’
एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि ठगों ने महिला को लगभग एक घंटे तक फोन पर रोके रखा। यह ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहलाता है, जिसमें शिकार को लगातार लाइन पर रखकर मानसिक दबाव बनाया जाता है। पहले सिम कार्ड, फिर आधार कार्ड के गलत इस्तेमाल का डर दिखाकर ठगों ने उसे भ्रमित करने की कोशिश की। इसके लिए तीन अलग-अलग नंबरों से कॉल किया गया।
समय रहते हुआ पर्दाफाश
जैसे ही मामला असली पुलिस अधिकारी तक पहुँचा, ठग भाग खड़े हुए। बाद में एडिशनल डीसीपी खुद सूद दंपति के घर पहुँचे और उन्हें डिजिटल अरेस्ट व साइबर ठगी की तरकीबों के बारे में विस्तार से समझाया।





