BY: Yoganand Shrivastva
बिहार में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की दो सदस्यीय पीठ ने इस प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार किया। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अपनी दलीलें पेश कीं। सुनवाई दोपहर 2 बजे पुनः शुरू होगी।
कपिल सिब्बल की दलीलें
सिब्बल ने अदालत के समक्ष कहा कि 1950 के बाद भारत में जन्मा हर व्यक्ति नागरिक है, लेकिन बिहार में SIR की प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक छोटे से विधानसभा क्षेत्र में 12 जीवित लोगों को “मृत” दर्ज कर दिया गया, जबकि बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने सही तरीके से काम ही नहीं किया।
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल एस. ने कोर्ट को बताया कि 65 लाख नाम सूची से हटाए गए हैं, जो सामूहिक बहिष्कार जैसा है। वहीं, चुनाव आयोग का पक्ष रखते हुए राकेश द्विवेदी ने कहा कि यह केवल ड्राफ्ट लिस्ट है, और इतने बड़े स्तर पर छोटे-मोटे त्रुटियां संभव हैं, लेकिन मृतकों को जीवित या जीवित को मृत दिखाना सही आरोप नहीं है।
कोर्ट की टिप्पणी
जस्टिस जॉयमाला बागची ने कहा कि ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने से पहले की तैयारियां यदि सही ढंग से नहीं हुईं तो यह गंभीर विषय है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों के नाम गलत तरीके से मृत सूची में डाले गए हैं, उनकी प्रविष्टियां सुधारी जाएंगी।
पिछली सुनवाई का संदर्भ
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने SIR पर रोक लगाने से इनकार किया था और चुनाव आयोग को प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति दी थी। हालांकि, कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि यदि बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए तो वह हस्तक्षेप करेगा। विवादित ड्राफ्ट लिस्ट में लगभग 65 लाख नाम हटाए जाने का मामला सामने आया है। ADR (एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स) की याचिका में दावा किया गया था कि बिना पर्याप्त कारण के लाखों मतदाता प्रभावित हो रहे हैं। इसके जवाब में चुनाव आयोग ने कहा था कि SIR का कार्य पूरी तरह कानूनी है।
विपक्ष और सत्ता पक्ष के आरोप-प्रत्यारोप
चुनाव आयोग द्वारा 27 जुलाई को जारी आंकड़ों के अनुसार, 65 लाख नामों में से 22 लाख लोग मृत, 36 लाख स्थायी रूप से स्थानांतरित और लगभग 7 लाख मतदाता डुप्लीकेट पाए गए। विपक्ष का आरोप है कि यह कार्रवाई बीजेपी के पक्ष में चुनावी लाभ देने के लिए की जा रही है, जबकि बीजेपी का कहना है कि विपक्ष हार के डर से निराधार आरोप लगा रहा है।
इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दल लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। सोमवार को राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने दिल्ली में चुनाव आयोग तक मार्च करने का प्रयास किया।