यमन में भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की मौत की सजा रद्द, ग्रैंड मुफ्ती के हस्तक्षेप से मिली राहत

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यमन में भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की मौत की सजा रद्द, ग्रैंड मुफ्ती के हस्तक्षेप से मिली राहत

यमन की राजधानी सना की जेल में बंद भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को बड़ी राहत मिली है। मौत की सजा, जिसे 16 जुलाई को अमल में लाया जाना था, अब पूरी तरह से रद्द कर दी गई है। यह फैसला भारत के ग्रैंड मुफ्ती कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार के हस्तक्षेप और यमनी विद्वानों के साथ हुई उच्च-स्तरीय बातचीत के बाद लिया गया।


कैसे हुआ फैसला?

ग्रैंड मुफ्ती के कार्यालय के अनुसार, सना में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया।

  • बैठक में उत्तरी यमन के शासक अधिकारी,
  • अंतरराष्ट्रीय राजनयिक
  • और यमनी इस्लामी विद्वान शामिल हुए।

जवाद मुस्तफावी ने दावा किया कि इस पूरी प्रक्रिया में भारतीय ग्रैंड मुफ्ती की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने यमन के सूफी विद्वान शेख उमर हफीज थंगल से एक प्रतिनिधिमंडल भेजने की अपील की थी, जिसके बाद सजा को पलटने पर सहमति बनी।


निमिषा प्रिया का मामला क्या है?

  • मूल निवासी: पलक्कड़, केरल
  • यमन आगमन: वर्ष 2008 में नर्स के रूप में
  • परिवार: पति टॉमी थॉमस और एक बेटी (फिलहाल केरल में रहती है)
  • मेडिकल क्लीनिक: 2015 में यमन के नागरिक तलाल अब्दो महदी के साथ शुरू किया

हत्या का आरोप

2017 में तलाल अब्दो महदी का शव एक पानी की टंकी से मिला।
आरोप था कि निमिषा ने:

  • नींद की दवा की अधिक खुराक देकर महदी की हत्या की
  • शव को छिपाने की कोशिश की

गिरफ्तारी और सजा

  • 2017: यमन-सऊदी सीमा से गिरफ्तार
  • 2020: सना की अदालत ने मौत की सजा सुनाई
  • 2023: यमन के सुप्रीम कोर्ट ने फैसले को बरकरार रखा
  • 2025 (16 जुलाई): सजा पर अमल होने वाला था, लेकिन भारत सरकार और केरल के मुस्लिम संगठनों की पहल पर रोका गया

क्यों मिली थी मौत की सजा पर राहत?

निमिषा के वकील का कहना है कि महदी ने उनका शारीरिक उत्पीड़न किया और पासपोर्ट जब्त कर लिया था। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार और मुस्लिम संगठनों ने उनके पक्ष में मध्यस्थता की।


आगे की राह

अब जबकि मौत की सजा रद्द कर दी गई है, आगे की कार्यवाही मृतक तलाल अब्दो महदी के परिवार के साथ बातचीत पर निर्भर करेगी। सूत्रों के अनुसार, यदि समझौता सफल रहा तो निमिषा को जेल से बाहर आने का रास्ता भी मिल सकता है।


निमिषा प्रिया का मामला भारत और यमन के बीच राजनयिक व धार्मिक संवाद का बड़ा उदाहरण बन गया है। मौत की सजा रद्द होने से न केवल उनके परिवार को राहत मिली है, बल्कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार बहस में भी अहम माना जा रहा है।

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