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हर बारिश में दिल्ली की नींव हिलती है, लेकिन फाइलों में सब ‘सुरक्षित’ है!

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दिल्ली में मॉनसून के आते ही इमारतें गिरने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। मुस्तफाबाद, बुराड़ी और वेलकम में हालिया हादसों ने ना सिर्फ कई लोगों की जान ली बल्कि नगर निगम (MCD) और संबंधित एजेंसियों की लापरवाही को भी उजागर कर दिया है।

हाल ही की बड़ी घटनाएं

  • मुस्तफाबाद (18 अप्रैल): चार मंजिला इमारत गिरने से 11 लोगों की मौत
  • बुराड़ी (28 जनवरी): इमारत गिरने से 2–5 लोगों की मौत
  • वेलकम (13 जुलाई): चार मंजिला इमारत ढही, 6 की मौत, कई घायल
  • पहाड़गंज (17 मई): निर्माणाधीन इमारत गिरने से 2 की मौत
  • आजाद मार्केट (11 जुलाई): बिल्डिंग गिरने से 1 व्यक्ति की जान गई

सवालों के घेरे में MCD का सर्वे

दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा जांच के लिए MCD हर साल मॉनसून से पहले सर्वे करता है। लेकिन इस साल, दिल्ली की कुल 28,30,825 इमारतों में से केवल 10,45,814 इमारतों का ही सर्वे हो पाया — यानी सिर्फ 42% सर्वे ही हुआ।

शाहदरा (नॉर्थ) ज़ोन की स्थिति:

  • कुल इमारतें: 2,83,221
  • सर्वे हुईं: 41,417 (केवल 19.5%)
  • रिपोर्ट: कोई भी बिल्डिंग “खतरनाक” नहीं पाई गई

लेकिन विडंबना यह है कि इसी ज़ोन में दो बड़े हादसे हो चुके हैं — मुस्तफाबाद और वेलकम।

DDA और DUSIB पर टालमटोल का आरोप

वेलकम की घटना के बाद MCD ने जिम्मेदारी DDA और डुसीब (DUSIB) पर डाल दी, यह कहते हुए कि हादसे वाली झुग्गी बस्ती उनकी कार्य सीमा में आती है। सवाल उठता है कि जब दिल्ली की जान जोखिम में है, तो विभागीय खींचतान कब तक चलेगी?


खतरे की घंटी: क्या दिल्ली तैयार है अगली बारिश के लिए?

दिल्ली के कई इलाकों में पुरानी और असुरक्षित इमारतें खड़ी हैं। बारिश की मार से ये कभी भी ढह सकती हैं। लेकिन जब तक सर्वे अधूरा रहेगा और विभाग आपस में जिम्मेदारी टालते रहेंगे, तब तक आम जनता की जान पर संकट मंडराता रहेगा।

जरूरी कदम:

  • 100% सर्वे कार्य की प्राथमिकता
  • खतरनाक इमारतों की सार्वजनिक सूची
  • झुग्गी-बस्तियों में इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधार
  • DDA, MCD और DUSIB के बीच समन्वय

निष्कर्ष

दिल्ली में इमारतों के गिरने की घटनाएं कोई नया मुद्दा नहीं, लेकिन इनकी तीव्रता अब जानलेवा होती जा रही है। सरकार और स्थानीय निकायों को अब महज़ कागजी सर्वे से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई करनी होगी। जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी और निगरानी मजबूत नहीं की जाएगी, तब तक हर बारिश का मौसम राजधानी में डर और मौत का पर्याय बनता रहेगा।

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