BY: Yoganand Shrivastva
नई दिल्ली, देश की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक और वर्तमान गृह मंत्री अमित शाह ने अपने रिटायरमेंट प्लान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि जब वे सक्रिय राजनीति से अलग होंगे, तो उनका जीवन पूरी तरह से वेदों, उपनिषदों के अध्ययन और प्राकृतिक खेती के प्रति समर्पित रहेगा।
आध्यात्म और कृषि की ओर झुकाव
अमित शाह ने कहा, “मुझे खेती करना अच्छा लगता है। जब भी राजनीति से संन्यास लूंगा, तो मैं पूरी तरह से प्राकृतिक खेती करूंगा।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनके मन में वेदों और उपनिषदों का गहरा आकर्षण है, लेकिन राजनीतिक व्यस्तताओं के चलते वह इसे समय नहीं दे पा रहे हैं। इसलिए रिटायरमेंट के बाद वे इसी में ध्यान लगाना चाहेंगे।
राजनीति के बाद सादगीपूर्ण जीवन की तैयारी
अपने बयान में अमित शाह ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि उनका रिटायरमेंट का जीवन सादा, शांत और आत्मिक विकास की दिशा में केंद्रित होगा। राजनीति जैसी तेज़ और चुनौतीपूर्ण ज़िंदगी से अलग हटकर वे एक आध्यात्मिक और प्रकृति-निष्ठ जीवनशैली अपनाने की ओर बढ़ना चाहते हैं।
क्या है प्राकृतिक खेती?
गौरतलब है कि प्राकृतिक खेती (Natural Farming) एक ऐसी पद्धति है जिसमें रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसमें ज़मीन की उर्वरता को प्राकृतिक तरीके से बनाए रखा जाता है और जल-संरक्षण तथा मिट्टी की सेहत पर विशेष ध्यान दिया जाता है।





