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सवालों के घेरे में वायुसेना की सुरक्षा… क्यों बार-बार गिर रहे हैं फाइटर जेट?

BY: Yoganand Shrivastva

चूरू (राजस्थान): राजस्थान के चूरू जिले में बुधवार को एक बार फिर भारतीय वायुसेना के जगुआर फाइटर जेट के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर सामने आई है। हादसा चूरू के भानुदा गांव के पास हुआ, जिसमें विमान में सवार दो पायलटों की मौके पर ही मौत हो गई। यह इस साल का तीसरा बड़ा जगुआर विमान हादसा है।


क्या था पूरा घटनाक्रम?

भारतीय वायुसेना का यह लड़ाकू विमान प्रशिक्षण उड़ान पर था। उड़ान के दौरान अचानक तकनीकी गड़बड़ी या किसी अन्य कारण से विमान नियंत्रण खो बैठा और खेतों में जा गिरा। वायुसेना ने जानकारी दी कि इस दुर्घटना में कोई नागरिक नुकसान नहीं हुआ, लेकिन दोनों पायलटों को जान गंवानी पड़ी।

घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंच गए। वायुसेना ने मामले की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी गठित कर दी है।


2025 में तीसरा जगुआर हादसा

यह हादसा इस साल का तीसरा जगुआर क्रैश है:

  • 7 मार्च 2025: पंचकूला, हरियाणा
  • 3 अप्रैल 2025: जामनगर, गुजरात
  • 9 जुलाई 2025: चूरू, राजस्थान

वायुसेना के इस पुराने लड़ाकू विमान जगुआर की तकनीकी विश्वसनीयता पर अब सवाल उठने लगे हैं।


प्रत्यक्षदर्शियों की आंखों देखी

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने आसमान से एक तेज़ आवाज़ सुनी और फिर देखा कि एक विमान खेतों में गिरकर धुएं और आग की लपटों में बदल गया। कुछ खेतों में आग भी लग गई थी, जिसे ग्रामीणों ने बुझाने का प्रयास किया।


विमान क्रैश के बाद क्या-क्या होता है?

  1. आपातकालीन सेवाओं को अलर्ट किया जाता है।
  2. पुलिस घटनास्थल सील करती है, किसी भी आम व्यक्ति को पास नहीं जाने दिया जाता।
  3. मलबे की जांच की जाती है—कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (ब्लैक बॉक्स) की खोज की जाती है।
  4. जांच एजेंसियां मलबे के महत्वपूर्ण हिस्सों को लैब भेजती हैं, जहां से ये तय होता है कि कौन-से पुर्जे दोबारा उपयोग हो सकते हैं।
  5. अनावश्यक मलबा बाद में नीलामी में बेच दिया जाता है।

प्रशासन और सेना का रेस्क्यू

घटना के बाद सेना का बचाव दल और एसडीआरएफ टीम मौके पर पहुंच गई। जिला कलेक्टर अभिषेक सुराना और पुलिस बल ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और प्रारंभिक सबूत इकट्ठा किए।


भारतीय वायुसेना के पुराने विमानों को लेकर फिर सवाल उठ खड़े हुए हैं। जगुआर जैसे विमानों की सेवा अवधि, रखरखाव और तकनीकी स्थिति पर फिर से समीक्षा करने की मांग उठने लगी है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और वायुसेना की अगली कार्रवाई पर है।

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