भारत की पैसेंजर व्हीकल मार्केट में कभी राज करने वाला छोटा कार सेगमेंट धीरे-धीरे कम हो रहा है। देश की प्रमुख कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने इस गिरावट को रोकने और दोपहिया से चारपहिया वाहन खरीदने वाले ग्राहकों के लिए सहूलियत बढ़ाने हेतु सरकार से प्रोत्साहन (इंसेंटिव) देने की मांग की है।
भारत में छोटे कारों का घटता हिस्सा
छोटे कार सेगमेंट ने भारत की कुल पैसेंजर व्हीकल मार्केट में एक समय लगभग आधा हिस्सा रखा था:
- FY18: 47.4% मार्केट शेयर
- FY19: 46% पर थोड़ा गिरावट
- FY20: 46.5% पर मामूली बढ़ोतरी
- FY21 से FY24: लगातार गिरावट, FY24 में केवल 27.7% रह गया
यह गिरावट उपभोक्ता की पसंद में बदलाव, कीमतों में वृद्धि और कड़े नियमों के कारण हुई है।
छोटे कार की बिक्री में गिरावट के कारण
मारुति सुजुकी के वरिष्ठ अधिकारी पार्थो बनर्जी ने गिरावट के मुख्य कारण बताए हैं:
- कीमतों में वृद्धि: बढ़ते नियामकीय मानकों के कारण निर्माण लागत बढ़ी है, जिससे छोटे कार की कीमतें बढ़ गई हैं।
- किफायती विकल्पों की कमी: दोपहिया से अपग्रेड करने वाले ग्राहक अब छोटे कार खरीदने में संकोच कर रहे हैं।
- प्रवेश स्तर की कारों की बिक्री में कमी: जिन कारों की कीमत ₹5 लाख से कम थी, उनकी बिक्री FY16 में लगभग 10 लाख यूनिट्स थी, जो FY25 में मात्र 25,402 यूनिट्स रह गई।
ताज़ा बिक्री आंकड़े
- लोकप्रिय छोटे कार मॉडल जैसे Alto और S-Presso की बिक्री मई 2025 में 6,776 यूनिट्स रही, जो पिछले साल मई में 9,902 थी।
- कॉम्पैक्ट कारें जैसे Baleno, Celerio, Dzire, Ignis, Swift, और WagonR की बिक्री भी 61,502 यूनिट्स पर गिर गई, जो मई 2024 में 68,206 थी।
सरकार से मारुति सुजुकी की उम्मीदें
मारुति सुजुकी ने सरकार से अपील की है कि वे छोटे कार सेगमेंट में प्रोत्साहन योजनाएं लागू करें ताकि ये वाहन ज्यादा से ज्यादा लोगों के लिए सुलभ हो सकें। पार्थो बनर्जी ने कहा:
“सरकार को यह समझना होगा कि समस्या कहाँ है और छोटे कार की बिक्री बढ़ाने के लिए कदम उठाने होंगे। ऐसे इंसेंटिव जरूरी हैं जिससे जो ग्राहक कार खरीदने में असमर्थ हैं, वे आसानी से दोपहिया से चारपहिया वाहन की तरफ आ सकें।”
यह कदम ऑटो उद्योग को भी मजबूती देगा और ग्राहकों के लिए बेहतर विकल्प उपलब्ध कराएगा।
वैश्विक चुनौतियां और निर्यात के लक्ष्य
हालांकि घरेलू बाजार में चुनौतियां हैं, मारुति सुजुकी निर्यात के क्षेत्र में उत्साहित है:
- चीन की दुर्लभ पृथ्वी चुम्बक (Rare Earth Magnets) पर पाबंदी: चीन विश्व की 90% क्षमता नियंत्रित करता है, लेकिन मारुति ने कहा है कि अभी उत्पादन प्रभावित नहीं हुआ है।
- एंड-यूजर सर्टिफिकेट: चीन द्वारा मांगे गए सरकारी अनुमोदन पर बातचीत जारी है।
FY26 के लिए निर्यात लक्ष्य
- मारुति सुजुकी FY26 में 4 लाख यूनिट्स निर्यात करना चाहती है, जो FY25 से 20% ज्यादा है।
- लगभग 100 देशों में मौजूदगी, खासकर अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, और दक्षिण पूर्व एशिया।
- हाल ही में जापान में प्रवेश, जहाँ Fronx और Jimny मॉडल की लोकप्रियता बढ़ी है।
- आगामी इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की लॉन्च से निर्यात और भी बढ़ने की उम्मीद है।
FY25 में मारुति सुजुकी का निर्यात प्रदर्शन
- रिकॉर्ड 3,32,585 यूनिट्स निर्यात, जो FY24 से 17.5% ज्यादा है।
- देश के कुल वाहन निर्यात में लगभग 43% हिस्सा।
- प्रमुख निर्यात मॉडल: Fronx, Jimny, Baleno, Swift, Dzire।
- मुख्य निर्यात देश: दक्षिण अफ्रीका, सऊदी अरब, चिली, जापान, और मेक्सिको।
छोटे कार बाजार का भविष्य
छोटे कारों की गिरती बिक्री इस बात का संकेत है कि भारतीय उपभोक्ता अब महंगे या बड़े वाहन की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन सरकार के इंसेंटिव से:
- दोपहिया वाहन से चारपहिया वाहन की ओर ग्राहकों का माइग्रेशन बढ़ेगा।
- ऑटो उद्योग को आर्थिक मजबूती मिलेगी।
- मारुति जैसे निर्माता किफायती और नए मॉडलों का विकास जारी रख सकेंगे।
साथ ही, निर्यात में मजबूत पकड़ से कंपनी के लिए वैश्विक बाजारों में अवसर बढ़ेंगे।
निष्कर्ष
मारुति सुजुकी द्वारा सरकार से समर्थन की मांग भारत के छोटे कार सेगमेंट के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। कीमतों में वृद्धि और किफायती विकल्पों की कमी से निपटने के लिए त्वरित कदम जरूरी हैं। वहीं, निर्यात और इलेक्ट्रिक वाहनों में कंपनी की योजनाएं भविष्य की संभावनाओं को उज्जवल करती हैं।





