BY: Yoganand Shrivastava
हर बच्चे की हँसी में छिपा है भविष्य का उजाला
हर साल 1 जून को अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस मनाया जाता है, लेकिन यह दिन केवल एक तारीख नहीं है, बल्कि एक ऐसा मौका है जब पूरी दुनिया एक साथ खड़ी होती है — बचपन की मासूमियत, अधिकारों और उज्ज्वल भविष्य के समर्थन में।
इस विशेष दिन का उद्देश्य सिर्फ समारोह नहीं, बल्कि सजग समाज का निर्माण करना है, जो बच्चों के अधिकार, सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा को प्राथमिकता दे।
क्यों जरूरी है बाल रक्षा दिवस?
बचपन किसी भी व्यक्ति की नींव होता है। यह वो समय होता है जब एक बच्चे का व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और सोच विकसित होती है। लेकिन दुर्भाग्यवश, दुनिया के कई हिस्सों में बाल मजदूरी, बाल शोषण, कुपोषण, अशिक्षा और हिंसा जैसी समस्याएं आज भी बच्चों के भविष्य को अंधकारमय बना रही हैं।
अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस का मुख्य उद्देश्य यही है —
बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना,
उन्हें हर प्रकार के शोषण से बचाना,
और उनका सम्पूर्ण विकास सुनिश्चित करना।
बच्चों को चाहिए शिक्षा—not exploitation
आज का बच्चा कल का नागरिक है। इसलिए उसे सही मार्गदर्शन, शिक्षा और अवसर मिलना उतना ही जरूरी है जितना भोजन और हवा। इस दिवस के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि हर बच्चे को पढ़ने-लिखने, स्वस्थ रहने और सुरक्षित माहौल में जीने का अधिकार है।
स्वास्थ्य और पोषण: हक, न कि दया
कई देशों में आज भी लाखों बच्चे कुपोषण, बीमारियों और उचित इलाज के अभाव से पीड़ित हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हर बच्चे को पोषणयुक्त आहार, स्वच्छ पानी और चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध होनी चाहिए। बाल अधिकार सिर्फ कानून की किताबों तक सीमित न रह जाए, इसका संकल्प समाज को लेना होगा।
कैसे मनाया जाता है बाल रक्षा दिवस?
इस दिन विश्वभर में अनेक कार्यक्रम आयोजित होते हैं:
- बच्चों के लिए विशेष खेलकूद प्रतियोगिताएं
- बाल अधिकारों पर चित्रकला व निबंध लेखन प्रतियोगिता
- स्कूलों में जागरूकता सेमिनार
- एनजीओ और संस्थाओं द्वारा रैलियां और नुक्कड़ नाटक
- बच्चों को सम्मानित करना जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी प्रेरक कार्य किए हों
इन सभी आयोजनों का मकसद सिर्फ एक है — बच्चों की बात सुनना, समझना और उन्हें वो दुनिया देना जिसके वे हकदार हैं।
कानून क्या कहता है?
भारत सहित कई देशों ने UNCRC (United Nations Convention on the Rights of the Child) को अपनाया है। इसमें बच्चों के चार प्रमुख अधिकार शामिल हैं:
- जीवन और विकास का अधिकार
- शिक्षा और स्वास्थ्य का अधिकार
- शोषण से सुरक्षा का अधिकार
- अपनी राय रखने और सुनी जाने का अधिकार
समाज की भूमिका: हर व्यक्ति है ज़िम्मेदार
बाल संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। माता-पिता, शिक्षक, मीडिया, कॉरपोरेट सेक्टर और आम नागरिक — सबको मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि बचपन असुरक्षा, डर और वंचनाओं से मुक्त हो।
हर बार जब हम किसी गरीब बच्चे को स्कूल जाने से रोकते हैं या मजदूरी करते हुए अनदेखा कर देते हैं, हम उनके अधिकारों का हनन करते हैं। यह दिवस हमें जागरूक करता है, झकझोरता है और प्रेरित करता है कि हम बदलाव लाएं।





