सरकार ने खाना पकाने के तेल पर कस्टम ड्यूटी आधी की – महंगाई कम होगी

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सरकार ने कच्चे पाम ऑयल, कच्चे सोयाबीन तेल, और कच्चे सूरजमुखी तेल पर लगने वाली बेसिक कस्टम ड्यूटी को 20% से घटाकर 10% कर दिया है। यह नया नियम 31 मई 2025 से लागू हो चुका है और एक साल तक प्रभावी रहेगा।

  • पहले की ड्यूटी: 20%
  • अब की ड्यूटी: 10%
  • लागू होने की तिथि: 31 मई 2025
  • समय सीमा: 1 वर्ष

वित्त मंत्रालय का नोटिफिकेशन और पिछला परिवेश

केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय के अधीन आने वाले सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (CBIC) ने इस बारे में आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है।

पिछले साल सितंबर में, सरकार ने तेल बीज (Oilseed) किसानों की मदद के लिए खाना पकाने के तेलों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी बढ़ा दी थी, जिससे कीमतें और अधिक बढ़ गई थीं। अब इस कटौती के बाद तेल की कीमतों में कमी आ सकती है।


बाजार में होगा असर: तेल की कीमतें होंगी कम

आजकल बाजार में पाम ऑयल, सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल की कीमतें काफी बढ़ी हुई हैं, जिसके कारण घरेलू सरसों तेल का दाम भी ऊंचा हो गया है। इस ड्यूटी कटौती से:

  • आयातित तेल की मात्रा बढ़ेगी
  • खाद्य तेल की कीमतों में गिरावट आएगी
  • महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलेगी

सरकार का यह फैसला सीधे तौर पर घरेलू मांग को पूरा करने और आम लोगों के बजट पर पड़ने वाले तेल के बोझ को कम करने के लिए है।


उद्योग जगत का स्वागत

इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IVPA) के अध्यक्ष सुधाकर देसाई ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने बताया कि:

  • कच्चे खाद्य तेल पर बेसिक इंपोर्ट ड्यूटी को 20% से घटाकर 10% करने का कदम सही दिशा में है।
  • रिफाइंड तेल पर ड्यूटी अभी भी 35.25% बनी हुई है, जिससे घरेलू उत्पादकों को संरक्षण मिलेगा।
  • यह फैसला “मेक इन इंडिया” को प्रोत्साहित करने और भारतीय वेजिटेबल ऑयल सेक्टर को विदेशी रिफाइंड तेल की बाढ़ से बचाने के लिए साहसिक कदम है।

तिलहनी फसलों का उत्पादन और आयात में बदलाव

डायरेक्टरेट ऑफ ऑयलसीड्स डेवलपमेंट के आंकड़ों के अनुसार:

  • FY24 में तेल बीज उत्पादन 39.7 मिलियन टन था, जो FY23 के 41.4 मिलियन टन से कम है।
  • पिछले वर्षों में तेल बीज उत्पादन में थोड़ी कमी देखी गई है, जिससे आयात पर निर्भरता बढ़ रही है।

IVPA के आंकड़े दिखाते हैं कि:

  • जून-सितंबर 2024 में रिफाइंड पाम ऑयल का आयात 4.58 लाख टन था।
  • अक्टूबर 2024 से फरवरी 2025 के दौरान यह बढ़कर 8.24 लाख टन हो गया।
  • SAFTA देशों के कारण रिफाइंड तेल पर जीरो ड्यूटी ने भारतीय बाजार में रिफाइंड तेल की बाढ़ ला दी है।

निष्कर्ष: महंगाई पर लगाम के लिए प्रभावी कदम

सरकार द्वारा कच्चे खाद्य तेलों पर कस्टम ड्यूटी को घटाना, महंगाई को नियंत्रित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे न सिर्फ तेल की कीमतों में गिरावट आएगी, बल्कि घरेलू तेल उत्पादन और आयात के संतुलन को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी।

यह निर्णय किसानों, उद्योगों और आम उपभोक्ताओं तीनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

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