12वीं टॉपर को एक दिन के लिए विधायक बनाया गया: उज्जैन में अनोखा प्रयास

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12वीं का टॉपर बना एक दिन का विधायक

क्या एक छात्र नेता बनकर बदलाव ला सकता है? मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के नागदा में यह सपना सच हुआ, जब 12वीं के टॉपर छात्र को एक दिन के लिए विधायक बनाया गया। इस अनोखे प्रयोग ने न सिर्फ शिक्षा को बढ़ावा दिया, बल्कि विकास कार्यों की मिसाल भी कायम की।


एक दिन का विधायक: साहित्य सेन ने रचा इतिहास

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के नागदा में कुछ अलग करने की कोशिश की गई। यहां कक्षा 12वीं के टॉपर छात्र साहित्य श्री सेन को एक दिन का विधायक बनाया गया। इस पहल का मकसद था—छात्रों को प्रेरित करना और उन्हें जिम्मेदारी का अहसास कराना।

कौन हैं साहित्य सेन?

  • कक्षा 12वीं में 96.20% अंक प्राप्त कर जिले में पहला स्थान हासिल किया।
  • प्रदेश स्तर पर दसवां स्थान पाया।
  • उज्जैन के नागदा क्षेत्र के होनहार छात्र।

विधायक की भूमिका में निभाई जिम्मेदारियां

विधायक जैसा प्रोटोकॉल

साहित्य को एक दिन के लिए पूरा विधायक प्रोटोकॉल दिया गया:

  • विधायक की गाड़ी और सिक्योरिटी
  • सरकारी कार्यालय में बैठकें
  • लोगों की समस्याएं सुनना

किए गए बड़े कार्य

एक दिन में साहित्य सेन ने करीब 1 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का भूमिपूजन और लोकार्पण किया।

विकास कार्यों की सूची:

  • 65 लाख रुपये की लागत से बैरछा में उप-स्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन
  • 98.53 लाख रुपये की लागत से 7 अतिरिक्त कक्षों का निर्माण (शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बैरछा)
  • 8 लाख रुपये से बनी नई सीसी रोड
  • 5 लाख रुपये विधायक निधि से बनी सड़क
  • 9.18 लाख रुपये की सीसी रोड (आदिम जाति कल्याण विभाग)

जनता दरबार में सुनी लोगों की समस्याएं

सिर्फ औपचारिकता तक सीमित नहीं रहा यह दिन। साहित्य ने जनता दरबार लगाकर आम जनता की शिकायतें सुनीं और त्वरित समाधान के निर्देश दिए।

एक छात्रा की समस्या सुलझाई

एक छात्रा ने ‘शिक्षा का अधिकार’ योजना के तहत निजी स्कूल में दाखिले में आधार नंबर त्रुटि की शिकायत की। साहित्य ने तुरंत:

  • BRC और स्कूल संचालक को बुलाया
  • मौके पर ही समाधान के निर्देश दिए

विधायक तेज बहादुर सिंह चौहान की पहल

इस पूरी योजना के पीछे थे नागदा-खाचरोद के विधायक तेज बहादुर सिंह चौहान। उनका मानना है कि:

“शिक्षा और नेतृत्व साथ चलें, तो समाज बदलेगा। यही सोचकर हमने जिले के टॉपर छात्र को एक दिन का विधायक बनाया।”

लोगों ने विधायक की इस सोच और पहल की खूब सराहना की।


क्यों है यह पहल खास?

पहलअसर
एक दिन के लिए छात्र विधायकछात्रों में आत्मविश्वास बढ़ा
करोड़ों के कार्यों का लोकार्पणयुवाओं को मिला नेतृत्व का मंच
जनता दरबार में समाधानप्रशासनिक प्रक्रिया को करीब से समझा

शिक्षा और नेतृत्व का अनोखा संगम

इस तरह की पहलें न केवल बच्चों को प्रेरणा देती हैं, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को भी कम करती हैं। नागदा का यह प्रयोग साबित करता है कि युवाओं को जिम्मेदारी देने से समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है।


निष्कर्ष: एक दिन, एक बदलाव

साहित्य सेन का “एक दिन का विधायक” बनना एक प्रतीक है—कि अगर मौका मिले तो युवा भी बदलाव ला सकते हैं। यह प्रयोग शिक्षा, नेतृत्व और सामाजिक चेतना का सुंदर उदाहरण है।

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