BY: Yoganand Shrivastva
कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में भारी बारिश ने कहर बरपा दिया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और उल्लाल क्षेत्र में हुए लैंडस्लाइड (भूस्खलन) में एक मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत हो गई है। हादसे के बाद मलबे में तीन अन्य लोग भी फंसे हुए हैं। राहत और बचाव कार्य जारी है।
भारी बारिश से जनजीवन बेहाल
कर्नाटक के तटीय जिलों में बीते कुछ दिनों से भारी बारिश हो रही है।
दक्षिण कन्नड़ जिला, खासकर उल्लाल इलाका, सबसे अधिक प्रभावित हुआ है।
बारिश के चलते:
- सड़कें जलमग्न हो गई हैं
- बिजली आपूर्ति बाधित है
- यातायात ठप पड़ा है
- कई घरों में पानी भर गया है
लगभग 50 से अधिक घरों में जलभराव की स्थिति है। लोग अपने घरों में फंसे हुए हैं और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
उल्लाल में भूस्खलन: बच्ची की मौत, परिवार मलबे में दबा
बारिश के कारण उल्लाल क्षेत्र में अचानक भूस्खलन हुआ।
इस दर्दनाक हादसे में:
- एक 7 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई
- तीन अन्य सदस्य मलबे में दब गए, जिनमें बच्ची के माता-पिता और भाई शामिल हैं
- घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और आपदा राहत टीम मौके पर पहुंची और बचाव कार्य शुरू किया गया
लोगों का कहना है कि भारी बारिश के चलते पहाड़ी इलाके की मिट्टी कमजोर हो गई थी, जिसकी वजह से यह हादसा हुआ।
प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया
जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने हालात को देखते हुए:
- NDRF और फायर ब्रिगेड टीमों को अलर्ट पर रखा है
- वॉर्निंग जारी की गई है ताकि लोग सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट हो सकें
- राहत शिविरों की व्यवस्था शुरू कर दी गई है
- स्कूल और सरकारी संस्थानों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है
प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि जरूरतमंद परिवारों को राहत सामग्री और अस्थायी आवास मुहैया कराए जाएंगे।
जलवायु परिवर्तन और बढ़ते खतरे
इस घटना ने एक बार फिर जलवायु परिवर्तन और अनियंत्रित शहरीकरण पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हर साल मानसून के दौरान तटीय और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और जलभराव की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे आम लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि:
- जल निकासी की व्यवस्था सुधारनी होगी
- निर्माण कार्यों में भौगोलिक स्थिति का ध्यान रखना जरूरी है
- आपदा से पहले की तैयारी (preparedness) ही जान-माल की रक्षा कर सकती है




