पाकिस्तान में क्रिप्टो के जरिए आतंकवाद की फंडिंग: भारत की सुरक्षा पर मंडराता खतरा

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पाकिस्तान की क्रिप्टो फंडिंग से भारत की सुरक्षा पर सियासी संकट

पाकिस्तान में क्रिप्टोकरेंसी का बढ़ता उपयोग न केवल आर्थिक नवाचार का संकेत है, बल्कि यह आतंकवादी गतिविधियों के लिए एक नया उपकरण भी बनता जा रहा है। इस लेख में, हम पाकिस्तान में क्रिप्टोकरेंसी के आतंकवाद से जुड़े पहलुओं की गहन जांच करेंगे, साथ ही इसके नियामक प्रयासों और वैश्विक प्रभावों पर भी प्रकाश डालेंगे।


क्रिप्टोकरेंसी: आतंकवाद का नया वित्तीय हथियार

गुमनामी और सीमा-रहित लेनदेन

क्रिप्टोकरेंसी की विकेंद्रीकृत प्रकृति और गुमनाम लेनदेन की सुविधा आतंकवादी संगठनों के लिए फंडिंग का एक नया माध्यम बन गई है। पारंपरिक बैंकिंग प्रणालियों की तुलना में, क्रिप्टो लेनदेन को ट्रैक करना अधिक कठिन होता है, जिससे आतंकवादी समूहों को धन जुटाने और स्थानांतरित करने में आसानी होती है।

FIU रिपोर्ट: आतंकवादी फंडिंग में क्रिप्टो का उपयोग

भारत की वित्तीय खुफिया इकाई (FIU) की रिपोर्ट के अनुसार, आतंकवादी समूह क्रिप्टोकरेंसी, हवाला चैनलों और ऑनलाइन गेम्स का उपयोग करके अवैध फंडिंग कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई प्रतिबंधित क्रिप्टो एक्सचेंजों और अनियमित वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (VASPs) के माध्यम से यह गतिविधियां संचालित हो रही हैं।


पहलगाम हमला: क्रिप्टो और साइबर आतंकवाद का संगम

हमले की पृष्ठभूमि

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 28 लोग मारे गए, जिनमें दो विदेशी नागरिक भी शामिल थे। इस हमले के बाद भारत पर पाकिस्तान समर्थित साइबर हमलों में अचानक वृद्धि दर्ज की गई।

साइबर हमलों में क्रिप्टो का उपयोग

हमले के बाद भारत की महत्वपूर्ण अवसंरचना पर एक सप्ताह में 650 से अधिक साइबर हमले किए गए। इनमें क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग रैंसमवेयर और फंड ट्रांसफर के लिए किया गया। पाकिस्तानी हैकर्स द्वारा “डांस ऑफ द हिलेरी” नामक मैलवेयर अभियान चलाया गया, जिसमें भारतीय रक्षा मंत्रालय की वेबसाइटों को निशाना बनाया गया।


डार्क वेब: आतंकवादियों के लिए सुरक्षित आश्रय

डार्क वेब पर हथियार और फंडिंग

डार्क वेब आतंकवादी संगठनों के लिए हथियारों, ड्रग्स और हैकिंग टूल्स की खरीद का एक प्रमुख माध्यम बन गया है। बिटकॉइन और मोनेरो जैसी गोपनीयता-केंद्रित क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग इन लेनदेन के लिए किया जा रहा है।


पाकिस्तान में क्रिप्टोकरेंसी का नियमन: एक दोधारी तलवार

नियामक प्रयास

पाकिस्तान ने 2025 में “वर्चुअल एसेट्स बिल” पेश किया, जिसका उद्देश्य क्रिप्टोकरेंसी के उपयोग को नियंत्रित करना और आतंकवादी फंडिंग को रोकना है। इस बिल में एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML) और काउंटर टेररिज्म फाइनेंसिंग (CTF) नियमों का पालन अनिवार्य किया गया है।

शरिया अनुपालन

पाकिस्तान में क्रिप्टोकरेंसी के शरिया अनुपालन को लेकर बहस चल रही है। कुछ विद्वानों का मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी “हराम” हो सकती है, जबकि अन्य इसे “हलाल” बनाने के प्रयास कर रहे हैं। पाकिस्तान और मलेशिया ने मिलकर डिजिटल एसेट्स के लिए शरिया-संगत ढांचा तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।


वैश्विक प्रभाव और भारत की प्रतिक्रिया

FATF ग्रे लिस्ट में पाकिस्तान

भारत ने पाकिस्तान को फिर से FATF की ग्रे लिस्ट में डालने की मांग की है। भारत का आरोप है कि पाकिस्तान आतंकवादी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ पर्याप्त कदम नहीं उठा रहा है।

भारत की साइबर सुरक्षा

भारत ने अपनी साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें ‘फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर’ (FFRI) जैसे टूल्स शामिल हैं, जो संदिग्ध क्रिप्टो लेनदेन को ट्रैक करने में सक्षम हैं।


निष्कर्ष: एक सतर्क भविष्य की आवश्यकता

क्रिप्टोकरेंसी एक दोधारी तलवार है—यह वित्तीय नवाचार का माध्यम हो सकती है, लेकिन आतंकवादी फंडिंग और साइबर अपराध का उपकरण भी बन सकती है। पाकिस्तान में क्रिप्टोकरेंसी का बढ़ता उपयोग और आतंकवादी गतिविधियों में इसकी भूमिका वैश्विक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है। इसलिए, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर क्रिप्टोकरेंसी के दुरुपयोग को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।


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