BY: Yoganand Shrivastva
भोपाल – पंजाब मेल में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां खुद को रेलवे का बड़ा अधिकारी यानी “डीआरएम” बताने वाला एक व्यक्ति बिना टिकट और बिना पहचान पत्र के फर्स्ट क्लास एसी कोच में यात्रा कर रहा था। लेकिन जैसे ही टिकट चेकिंग स्टाफ को शक हुआ, पूरा मामला खुलकर सामने आ गया।
डीआरएम बनकर कर रहा था यात्रा, पहचान मांगी तो घबरा गया
ट्रेन संख्या 12138 (पंजाब मेल) में ड्यूटी पर तैनात टिकट चेकर अमरजीत सिंह जब फर्स्ट क्लास एसी (H/A-1) कोच में पहुँचे, तो उन्हें कूपे नंबर बी में एक व्यक्ति संदिग्ध स्थिति में बैठा मिला। जब उन्होंने उसका टिकट और पहचान पत्र दिखाने को कहा, तो उस व्यक्ति ने खुद को रेलवे का डीआरएम बताया।
लेकिन जब अमरजीत सिंह ने उससे औपचारिक आईडी कार्ड और यात्रा की अनुमति मांगी, तो वह कुछ भी प्रस्तुत नहीं कर सका। उसकी बातों और व्यवहार पर शक गहराया।
आरपीएफ को दी सूचना, पूछताछ में खुली असलियत
अमरजीत सिंह ने तत्काल इस मामले की सूचना रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को दी। जब सुरक्षा जवानों ने उससे पूछताछ की, तो उसने अपना नाम वरुण सहगल बताया। उसके पास न कोई टिकट था और न ही ऐसा कोई दस्तावेज जिससे उसकी पहचान या पद की पुष्टि हो सके।
बीना स्टेशन पर टीटीई द्वारा तैयार मेमो रिपोर्ट में पूरी घटना दर्ज की गई और आरपीएफ तथा राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) को सूचित किया गया। हालांकि, तब तक ट्रेन बीना स्टेशन से रवाना हो चुकी थी, इसलिए उसे वहीं नहीं उतारा जा सका।
भोपाल में गिरफ्तारी, लगेगा जुर्माना
इसके बाद जब ट्रेन भोपाल पहुँची, तो रेलवे पुलिस ने वरुण सहगल को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ बिना टिकट यात्रा करने और स्वयं को सरकारी अधिकारी बताकर धोखा देने के आरोप में कार्रवाई की गई है। उस पर जुर्माना भी लगाया गया है।
सतर्कता से बची बड़ी चूक
इस घटना से यह साफ हो गया है कि रेलवे कर्मचारियों की सतर्कता के कारण एक बड़ा फर्जीवाड़ा समय रहते पकड़ में आ गया। अमरजीत सिंह जैसे जिम्मेदार टिकट चेकर की सजगता से यह सुनिश्चित हुआ कि कोई भी व्यक्ति पद और अधिकार का झूठा दावा करके नियमों का उल्लंघन न कर सके।





