BY: Yoganand Shrivastva
नई दिल्ली, नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से दायर आरोपपत्र का संज्ञान लेते हुए दोनों नेताओं को नोटिस जारी किया है। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि चार्जशीट पर विचार करते समय आरोपियों को अपना पक्ष रखने का पूरा हक है, और निष्पक्ष सुनवाई की प्रक्रिया में यह अधिकार बेहद अहम है। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 8 मई तय की है।
ED ने 2021 में शुरू की थी जांच
यह मामला वर्ष 2014 में भाजपा नेता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दाखिल शिकायत से शुरू हुआ था, जिसमें उन्होंने कई कांग्रेस नेताओं पर धोखाधड़ी और संपत्ति हड़पने के गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद वर्ष 2021 में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की धाराओं के तहत इस प्रकरण की जांच आरंभ की और हाल ही में एक औपचारिक आरोपपत्र अदालत में पेश किया।
क्या है पूरा मामला?
मूलतः यह विवाद एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) और ‘यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड’ (YIL) से जुड़ी संपत्तियों के अधिग्रहण से संबंधित है। AJL, जो पहले ‘नेशनल हेराल्ड’ अखबार प्रकाशित करता था, उस पर 2008 तक लगभग 90 करोड़ रुपये का कर्ज था। 2010 में YIL नामक कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी की सम्मिलित हिस्सेदारी 76% थी। आरोप है कि कांग्रेस पार्टी ने AJL का 90 करोड़ रुपये का कर्ज YIL को सिर्फ 50 लाख रुपये में ट्रांसफर कर दिया, जिससे YIL को AJL की करीब 2,000 करोड़ रुपये की संपत्ति पर नियंत्रण मिल गया।
ईडी के आरोप
ईडी का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया एक योजनाबद्ध साजिश के तहत की गई और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए YIL का इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, AJL की जिन संपत्तियों का व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा था—जैसे कि दिल्ली के हेराल्ड हाउस में सरकारी दफ्तर को किराए पर देना—वह गैरकानूनी है, क्योंकि AJL को गैर-लाभकारी संस्था के रूप में कर छूट प्राप्त थी। ईडी ने 2023 में AJL और YIL की करीब 751 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त कर ली थीं।
कांग्रेस का पक्ष
कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया है। पार्टी का कहना है कि YIL एक गैर-लाभकारी संगठन है, जिसका मकसद ‘नेशनल हेराल्ड’ अखबार को पुनर्जीवित करना और देश की आजादी की विरासत को बचाना है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि इसमें कोई मुनाफा कमाने की मंशा नहीं थी और न ही कोई वित्तीय अनियमितता की गई है।
राजनीतिक असर
यह मामला एक बार फिर से कांग्रेस नेतृत्व के लिए कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तर पर चुनौती बन गया है। जहां अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख तय कर दी है, वहीं कांग्रेस इसे सत्तारूढ़ दल की ओर से गांधी परिवार को निशाना बनाने की रणनीति मान रही है।





