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धर्मांतरण पर मोहन भागवत का बयान: ‘लालच या डर से न बदलें धर्म’, जानें पूरा संदेश

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने धर्मांतरण पर चिंता जताते हुए कहा कि धर्म परिवर्तन लालच या भय के कारण नहीं होना चाहिए। उन्होंने वालसाड स्थित श्री भाव भावेश्वर महादेव मंदिर के रजत जयंती समारोह में यह बात कही।

मोहन भागवत के भाषण की मुख्य बातें:

  1. धर्म का सही मार्ग: भागवत ने कहा कि सच्चा धर्म सुख और शांति देता है, लेकिन लालच या डर से किया गया धर्मांतरण अधर्म है।
  2. महाभारत से सीख: उन्होंने दुर्योधन के लालच का उदाहरण देकर समझाया कि स्वार्थ से धर्म का मार्ग भटक जाता है।
  3. एकता का संदेश: “हम लड़ाई नहीं चाहते, लेकिन अपनी आस्था और संस्कृति की रक्षा जरूरी है,” उन्होंने जोर दिया।

भागवत के बयान का महत्व

  • धर्मांतरण पर बहस: उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब देश में धर्म परिवर्तन कानून और सामाजिक सद्भाव पर चर्चा जारी है।
  • आदिवासी कल्याण: उन्होंने सद्गुरुधाम जैसे संस्थानों की सराहना की, जो आदिवासियों को उनकी जड़ों से जोड़े रखते हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ

भागवत ने याद दिलाया कि पहले संत गांव-गांव जाकर सत्संग के माध्यम से लोगों को धर्म का मार्ग दिखाते थे। आज संस्थाएं यही काम कर रही हैं।

आगे क्या?

आरएसएस प्रमुख के इस बयान से धर्म की स्वतंत्रता और जबरन धर्मांतरण पर बहस तेज हो सकती है, खासकर आदिवासी इलाकों में।

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