भिंड, मध्य प्रदेश – गोरमी क्षेत्र में एक दलित युवती के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के बाद पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की बजाय पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता ने स्थिति को और भयावह बना दिया। आरोपियों के परिजनों द्वारा लगातार धमकियां दिए जाने और राजीनामा करने के दबाव के बाद अब पीड़िता के घर में आग लगा दी गई।
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क्या हुआ था?
- 13 जनवरी 2025 को गोरमी में तीन आरोपियों – दशरत सिंह गुर्जर, सोनू गुर्जर और धर्मेंद्र गुर्जर – ने दलित युवती का सामूहिक शोषण किया।
- पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा, लेकिन उनके समर्थकों ने पीड़िता के परिवार को प्रताड़ित करना जारी रखा।
- 18 मार्च को परिवार ने एसपी को शिकायत दर्ज कराई कि आरोपी उन्हें मामला वापस लेने के लिए धमका रहे हैं।
राजीनामा नहीं करने पर घर में लगाई आग
- 4 अप्रैल को कुछ लोगों ने पीड़िता के घर पर हमला करके आग लगा दी।
- परिवार के दो सदस्य गंभीर रूप से घायल हुए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
- 5 अप्रैल को एक बार फिर पीड़ित परिवार के सदस्यों की गोहद चौराहे पर पिटाई की गई।
पुलिस की सुस्त रवैया
पुलिस ने मामले में धारा 307 (हत्या का प्रयास), 436 (आगजनी) और एससी/एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया, लेकिन आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया। जनता के दबाव के बाद ही पुलिस ने फ्लैग मार्च निकालकर दिखावटी कार्रवाई की।
एसडीओपी का बयान
मेहगांव के एसडीओपी संजय कोच्छा ने कहा – “पीड़ितों के बयान के आधार पर कार्रवाई जारी है।”
क्यों चर्चा में है ये मामला?
- दबंगों का आतंक: पुलिस की मौजूदगी के बावजूद आरोपियों ने पीड़ित परिवार को नहीं छोड़ा।
- दलित उत्पीड़न: मामले में जातिगत हिंसा और प्रशासन की उदासीनता सामने आई।
- पुलिस की निष्क्रियता: शिकायत के बाद भी सुरक्षा नहीं मिली, जिससे हमलावरों को हौसला मिला।
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