पटना: 27 राज्यों में मन रहा बिहार उत्सव, इसके पीछे क्या है राजनीतिक चाल ?

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BY: Vijay Nandan

बिहार दिवस हर साल 22 मार्च को मनाया जाता है, जो बिहार राज्य के गठन की तारीख है, जब 1912 में बिहार राज्य का गठन हुआ था। यह दिन बिहार की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक धरोहर को सम्मानित करने और राज्य के विकास को प्रोत्साहित करने का अवसर होता है। इस उत्सव की परंपरा बिहार के विभिन्न हिस्सों में एकता और गौरव को बढ़ावा देती है, खासकर प्रवासी बिहारी समुदाय के बीच।

बिहार दिवस के उत्सव का महत्व और परंपरा: यह उत्सव बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कला, संगीत, साहित्य, और खाद्य संस्कृति को प्रदर्शित करने का एक अवसर है। इसके माध्यम से राज्य के लोग अपनी उपलब्धियों, विकास कार्यों और राज्य की पारंपरिक और आधुनिक धरोहरों पर गर्व महसूस करते हैं। इसके अलावा, यह एक मंच प्रदान करता है जहां लोग अपने राज्य के बारे में जागरूकता बढ़ाते हैं और राज्य के अंदर और बाहर बसे प्रवासी बिहारी एकजुट होते हैं।

27 राज्यों में बिहार उत्सव का आयोजन: बिहार सरकार ने इस बार बिहार दिवस के मौके पर देश के 27 राज्यों में 70 स्थानों पर बिहार उत्सव आयोजित करने का फैसला लिया है। इसका उद्देश्य बिहार के विभिन्न हिस्सों में बसे प्रवासी बिहारी समुदाय से संपर्क बढ़ाना, उनके साथ जुड़ाव को और मजबूत करना, और बिहार राज्य की पहचान और विकास को राष्ट्रीय स्तर पर और प्रोत्साहित करना है।

राजनीतिक दृष्टिकोण: बिहार सरकार की यह पहल खासतौर पर राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हो सकती है। आने वाले विधानसभा चुनावों में एनडीए (नीतीश कुमार की जेडीयू और अन्य सहयोगी दल) और महागठबंधन के बीच प्रतिस्पर्धा होगी। एनडीए के लिए बिहार दिवस के उत्सव के जरिए यह कोशिश हो सकती है कि राज्य के बाहर बसे प्रवासी बिहारीयों के बीच बिहार सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों को उजागर किया जा सके। इसके माध्यम से उनका समर्थन जुटाने की कोशिश हो सकती है।

इसका उद्देश्य उन बिहारी प्रवासियों को याद दिलाना हो सकता है जो दूसरे राज्यों में रहकर रोजगार या अन्य कारणों से बसे हुए हैं। इस प्रकार के उत्सव उनके बीच राज्य सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं को पेश करने का एक तरीका हो सकता है। इस प्रकार के आयोजन से लोगों में एक सामूहिक भावना उत्पन्न होती है और यह राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में भी एक सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

जेडीयू और एनडीए के लिए क्या लाभ हो सकता है:

  1. प्रवासी बिहारी समुदाय का समर्थन: बिहार सरकार का यह कदम प्रवासी बिहारी समुदाय के बीच राज्य सरकार और एनडीए के प्रति समर्थन को बढ़ा सकता है। प्रवासी लोग अक्सर अपनी मातृभूमि से जुड़े रहते हैं और इस तरह के उत्सवों के माध्यम से उनका भावनात्मक जुड़ाव और मजबूत होता है।
  2. राजनीतिक प्रचार: इस उत्सव के जरिए राज्य सरकार की योजनाओं, विकास कार्यों, और बुनियादी ढांचे में किए गए सुधारों का प्रचार हो सकता है, जो आगामी चुनाव में एनडीए के पक्ष में काम कर सकता है।
  3. सांस्कृतिक पहचान: इस प्रकार के आयोजन बिहार की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का एक प्रयास हो सकता है, जो लोगों के मन में राज्य के प्रति गर्व और आस्था बढ़ाता है। यह चुनावी रणनीति के रूप में काम आ सकती है।

गतिविधियों का मेला: कुछ न कुछ हर किसी के लिए

बिहार उत्सव 2025 में ऐसा कुछ नहीं जो आपको बोर कर दे। यहाँ हर उम्र और हर शौक के लिए ढेर सारी चीजें हैं। चलिए, कुछ खास आकर्षण देखते हैं:

  • हाथ की कारीगरी सीखें: मधुबनी पेंटिंग बनाना हो या सिक्की शिल्प, यहाँ आप खुद कारीगर बन सकते हैं।
  • सांस्कृतिक धमाल: हर शाम बिहार के लोक कलाकार अपनी कला से आपको मंत्रमुग्ध करेंगे। भोजपुरी की मिठास और नृत्य की थाप आपके दिल को छू लेगी।
  • प्रदर्शनियों का आनंद: मधुबनी और मंजूषा कला की नायाब कृतियाँ देखें, और बिहार के इतिहास को फोटो प्रदर्शनियों में जिएँ।
  • साहित्य का संगम: कविता पाठ और कहानी सत्र में भोजपुरी, मैथिली और मगही की मिठास का मजा लें।
  • बच्चों की मौज: छोटे-छोटे बच्चों के लिए पेंटिंग वर्कशॉप, लोककथाएँ और कबड्डी जैसे खेल तैयार हैं।
  • फैशन का तड़का: बिहार सिल्क और खादी के कपड़ों का प्रदर्शन, जहाँ परंपरा और मॉडर्न स्टाइल का मेल देखने को मिलेगा।
  • फोटो का मज़ा: बिहारी परिधानों में फोटो खिंचवाइए और यादें संजोइए।
  • क्विज़ और खेल: बिहार की संस्कृति पर सवाल-जवाब में हिस्सा लीजिए और इनाम जीतिए।
  • लाइव कला: मधुबनी कलाकारों को लाइव पेंटिंग करते देखना अपने आप में एक तमाशा होगा।

बिहारी खाने का स्वाद: जीभ और दिल दोनों खुश

उत्सव का मज़ा खाने के बिना अधूरा है, और यहाँ बिहार का हर स्वाद आपको लुभाएगा। कुछ खास चीजें जो आप मिस नहीं करना चाहेंगे:

  • लिट्टी-चोखा: बिहार का सिग्नेचर डिश, जिसका स्वाद मुंह में घुल जाता है।
  • सत्तू: गर्मी भगाने वाला ये देसी ड्रिंक ताजगी से भर देगा।
  • चनाजोर: मसालेदार और चटपटा, चाय के साथ मज़ा दोगुना।
  • खाजा: मिठास का ऐसा जादू जो हर मीठे प्रेमी को पसंद आएगा।
  • ठेकुआ: त्योहारों की खास मिठाई, जो घर की याद दिलाएगी।

और मजेदार बात? यहाँ लाइव कुकिंग शो भी होंगे, जहाँ आप इन लाजवाब डिशेज़ की

बिहार दिवस का आयोजन और 27 राज्यों में बिहार उत्सव के आयोजन के पीछे राज्य सरकार की योजना सिर्फ सांस्कृतिक जुड़ाव और प्रवासी बिहारी समुदाय से संपर्क बढ़ाने की नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी है। इस आयोजन के माध्यम से बिहार सरकार और एनडीए अपनी योजनाओं और विकास कार्यों को प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे आगामी चुनावों में वोटरों के बीच सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

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