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करप्शन-परसेप्शन का जाल, भ्रष्टाचारी हो रहे मालामाल

Corruption-the web of perception, the corrupt are becoming rich

भारत भ्रष्टाचार की रैंकिंग में 96वें पायदान पर पहुंचा

दुनिया के भ्रष्ट देशों की रैंकिंग सामने आ गई है। जिसमें भारत 96वें स्थान पर है. हम और हमारी सरकारें इस बात से खुश हो सकती हैं कि हमारे पड़ोसी देशों.. पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका से हमारी स्थिति थोड़ी ठीक है. हमारे पड़ोसियों के मुकाबले हमारे देश में कम भ्रष्टाचार है..लेकिन भारत के लोग ये अपेक्षा क्यों नहीं करेंगे कि हमारा देश भी डेनमार्क, फिनलैंड और सिंगापुर जैसा बनें. इन देशों में बेहद मामूली या जिसे कह लें कि भ्रष्टाचार है ही नहीं. सबसे कम भ्रष्टाचार वाली सीपीआई रैंकिंग में ये देश सबसे ऊपरी पायदान पर हैं. आज का एजेंडा में चर्चा भ्रष्टाचार के कारणों पर..इसकी चुनौतियों पर.. इसके दुष्प्रभावों पर, इसके समाधान पर..सिस्टम पर..समाज पर..राजनीति पर.. कुल मिलाकर हर उस पहलु पर जो भ्रष्टाचार से जुड़ा है.. हमारे साथ खास मेहमान हैं..जिनसे आपको तारुफ करा देते हैं..

विश्व में कौनसा देश कितना भ्रष्ट है, इसे लेकर ट्रांसपरेंसी इंटरनेशलन ने करप्शन परसेप्शन इंडेक्स-2024 की अपनी सूची जारी कर दी है। इस सूची में कुल 180 देशों के नाम हैं, इस सूची में भारत 96वें नंबर पर पहुंच गया है। साल 2023 में भारत की रैंक 93 थी। भारत के पड़ोसी देशों में पाकिस्तान 135 नंबर पर और श्रीलंका 121 पर हैं, जबकि बांग्लादेश की रैंकिंग और भी नीचे 149 पर चली गई है। इस लिस्ट में चीन 76वें स्थान पर बना हुआ है। पिछले दो वर्ष से चीन 76वें स्थान पर ही है। डेनमार्क सबसे कम भ्रष्ट देश होने की सूची में सबसे ऊपर है, उसके बाद फिनलैंड और सिंगापुर हैं।

कैसे तैयार होती है रैंकिंग?

भारत का स्कोर 2024 में 38 रहा है, ये 2023 में 39 था जबकि 2022 में ये स्कोर 40 पर था। यानि 2024 में सिर्फ एक नंबर के कम होने से भारत 3 पायदान खिसक गया है। इसका मतलब है कि भारत में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। वहीं विश्व स्तर पर औसत की बात करें तो ये कई सालों से 43 स्कोर पर बना हुआ है। इस इंडेक्स के लिए ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के विशेषभ हर देश के पब्लिक सेक्टर में भ्रष्टाचार का आकलन करते हैं। इसके बाद हर देश को 0 से 100 के बीच स्कोर दिया जाता है। ये तरीका आपको थोड़ा उलझाऊ लग सकता है…जितना ज्यादा भ्रष्टाचार, उसे उतना कम स्कोर दिया जाता है..0 से 100 अंक के बीच. इसको इस तरह से समझते हैं..भारत का स्कोर 2023 में 39 था, ये 2024 में 38 हो गया..यानि 1 अंक का घटना दर्शाता है कि भारत में पिछले एक साल में भ्रष्टाचार बढ़ गया है. इसी आधार पर इंडेक्स में रैंकिंग निर्धारित होती है। (GFX OUT)

भारत में करप्शन का इंडेक्स

  • -भारत का स्कोर 2024 में 38 रहा है
  • -2023 में ये स्कोर 39 था
  • -2022 में ये स्कोर 40 था
  • -भारत 3 पायदान खिसक गया
  • -भारत में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है
  • -विश्वस्तरीय औसत स्कोर 43 पर स्थिर
  • -सीपीआई पब्लिक सेक्टर में आकलन करते हैं
  • -हर देश को 0 से 100 के बीच स्कोर दिया जाता है
  • -जितना ज्यादा भ्रष्टाचार, उसे उतना कम स्कोर
  • -0 से 100 अंक के बीच मिलता है स्कोर
  • -भारत का स्कोर 2023 में 39 था
  • -2024 में ये स्कोर 38 हो गया
  • -1 अंक का घटना मतलब भ्रष्टाचार बढ़ गया
  • -स्कोर के आधार पर इंडेक्स में रैंकिंग निर्धारित होती है

भ्रष्टाचार में वर्ल्ड लीडर कहां खड़े?

अब 5 वर्ल्ड लीडर्स की भ्रष्टाचार रैंकिंग पर नजर डाल लेते हैं। दुनिया का सबसे पावरफुल देश अमेरिका भ्रष्टाचार के मामले में 28वें पायदान पर है, उसी तरह ब्रिटेन 20वीं रैंक पर है, फ्रांस को 25वीं, जर्मनी 15वीं रैंक पर, रूस 154वीं रैंक पर है। वहीं भारत 96वीं रैंक पर है। (GFX OUT)

  • करप्शन परसेप्शन इंडेक्स-2024
  • देश रैंकिंग
  • अमेरिका 28
  • ब्रिटेन 20
  • फ्रांस 25
  • जर्मनी 15
  • रूस 154
  • इंडिया 96

सिर्फ भारत में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है ऐसा नहीं है…भ्रष्टाचार के हमाम में सभी देश डूबे हुए हैं. आइए आपको बताते हैं कि आखिर भ्रष्टाचार का दीमक कैसे सिस्टम को खा रहा है। जब किसी देश की सरकारी संस्थाएँ कमजोर होती हैं, तो भ्रष्टाचार बढ़ने की संभावना होती है। यदि सरकार के पास प्रभावी निगरानी और नियंत्रण नहीं है, तो अधिकारी अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हैं। राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध, भी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है। गरीबी और सामाजिक असमानता भी भ्रष्टाचार के प्रमुख कारण हैं। अगर समाज में नैतिक और धार्मिक मूल्य कमजोर होते हैं, तो भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति बढ़ती है। कानून का उचित पालन न होने या कमजोर न्यायपालिका के कारण भ्रष्टाचार पनपता है। जब लोगों को सरकारी सेवाओं के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है या उन सेवाओं तक पहुंच मुश्किल होती है, तो भ्रष्टाचार अपना रास्ता बनाता है। जब देश और समाज भ्रष्टाचार को एक सामान्य व्यवहार मान ले तो भ्रष्टाचार बढ़ता है। यदि समाज में भ्रष्टाचार को लेकर कोई आलोचना या निंदा नहीं होती है, तो भ्रष्टाचार अपने पैर फैलाता है.

क्यों फलता फूलता है भ्रष्टाचार

  • -जब किसी देश की सरकारी संस्थाएँ कमजोर होती हैं
  • -सरकार के पास प्रभावी निगरानी और नियंत्रण नहीं होना
  • -राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध भी भ्रष्टाचार बढ़ने का कारण
  • -गरीबी और सामाजिक असमानता भी भ्रष्टाचार के कारण
  • -समाज में नैतिक और धार्मिक मूल्य कमजोर होना
  • -कानून का उचित पालन न होना भी कारण
  • -कमजोर न्यायपालिका के कारण भी भ्रष्टाचार पनपता है
  • -लोगों को सरकारी सेवाओं के लिए लंबा इंतजार करना भी कारण
  • -समाज भ्रष्टाचार को एक सामान्य व्यवहार मान ले
  • -भ्रष्टाचार की आलोचना या निंदा नहीं होना

अब सवाल ये क्या भ्रष्टाचार रोका नहीं जा सकता। जबाव है ये संभव है..भ्रष्टाचार के कई जटिल कारण हैं, जो एक दूसरे से जुड़े होते हैं। इससे निपटने के लिए एक सशक्त प्रशासन, ठोस कानून, पारदर्शिता, और नागरिकों में जागरूकता की आवश्यकता है। यदि इन बिंदुओं पर गौर किया जाए तो समाज और सरकारी तंत्र मिलकर इस चुनौती का समाधान निकाल सकते हैं।

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