2002 गुजरात दंगों की मुख्य याचिकाकर्ता ज़ाकिया जाफ़री का निधन

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ज़ाकिया जाफ़री का निधन: 2002 गुजरात दंगों की मुख्य याचिकाकर्ता ने अहमदाबाद में अंतिम सांस ली अहमदाबाद: 2002 गुजरात दंगों के गुलबर्ग सोसाइटी मामले की मुख्य याचिकाकर्ता और कांग्रेस सांसद एहसान जाफ़री की पत्नी ज़ाकिया जाफ़री का शनिवार को अहमदाबाद में निधन हो गया। वह लंबे समय से न्याय की लड़ाई लड़ रही थीं और उन्होंने 2002 के दंगों में एक "बड़े षड्यंत्र" की जांच की मांग की थी। गुलबर्ग सोसाइटी मामले की मुख्य याचिकाकर्ता ज़ाकिया जाफ़री गुलबर्ग सोसाइटी मामले की सह-याचिकाकर्ता थीं, जिसका प्रतिनिधित्व राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने किया था। उन्होंने विशेष जांच दल (SIT) द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तब गुजरात के मुख्यमंत्री) और अन्य लोगों को दी गई बरीयत को चुनौती दी थी। उनका आरोप था कि 2002 के दंगों के पीछे एक बड़ा षड्यंत्र था। 28 फरवरी 2002 को अहमदाबाद के गुलबर्ग सोसाइटी में हुई हिंसा में 69 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें ज़ाकिया जाफ़री के पति एहसान जाफ़री भी शामिल थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। न्याय की लड़ाई और सुप्रीम कोर्ट का फैसला ज़ाकिया जाफ़री ने लंबे समय तक न्याय की लड़ाई लड़ी, लेकिन 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य लोगों को दी गई बरीयत को बरकरार रखा। इस फैसले के बाद कांग्रेस पार्टी ने इसे "गहरा निराशाजनक" बताया था और कहा था कि "कुछ मौलिक सवाल अनुत्तरित रह गए हैं।" कांग्रेस और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने जताया शोक ज़ाकिया जाफ़री के निधन पर कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने शोक व्यक्त करते हुए कहा, "ज़ाकिया जाफ़री आज चल बसीं। उन्होंने न्याय की उम्मीद को अपनी आंखों के सामने मरते देखा। भविष्य की पीढ़ियां 'नए भारत' का इतिहास ज़ाकिया जाफ़री के आंसुओं, कराहों, न्याय की लड़ाई और फिर उनकी हार में सुनेंगी।" मानवाधिकार कार्यकर्ता और गुलबर्ग सोसाइटी मामले की एक अन्य याचिकाकर्ता तीस्ता सेतलवाद ने भी ज़ाकिया जाफ़री के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, "ज़ाकिया अप्पा, मानवाधिकार समुदाय की एक दयालु नेता, अभी 30 मिनट पहले चल बसीं! उनकी दूरदर्शी उपस्थिति को देश, परिवार, दोस्तों और दुनिया द्वारा याद किया जाएगा।" कपिल सिब्बल ने की थी सुप्रीम कोर्ट की आलोचना कपिल सिब्बल ने 2022 के फैसले की आलोचना करते हुए कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में अब कोई उम्मीद नहीं बची है। उन्होंने कहा था, "अगर आप सोचते हैं कि आपको सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलेगी, तो आप बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं। और मैं यह सुप्रीम कोर्ट में 50 साल तक प्रैक्टिस करने के बाद कह रहा हूं।" ज़ाकिया जाफ़री का निधन न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि न्याय की लड़ाई लड़ने वाले पूरे समुदाय के लिए एक बड़ी क्षति है। उनकी लड़ाई और संघर्ष को हमेशा याद रखा जाएगा।

ज़ाकिया जाफ़री का निधन: 2002 गुजरात दंगों की मुख्य याचिकाकर्ता ने अहमदाबाद में अंतिम सांस ली

अहमदाबाद: 2002 गुजरात दंगों के गुलबर्ग सोसाइटी मामले की मुख्य याचिकाकर्ता और कांग्रेस सांसद एहसान जाफ़री की पत्नी ज़ाकिया जाफ़री का शनिवार को अहमदाबाद में निधन हो गया। वह लंबे समय से न्याय की लड़ाई लड़ रही थीं और उन्होंने 2002 के दंगों में एक “बड़े षड्यंत्र” की जांच की मांग की थी।

गुलबर्ग सोसाइटी मामले की मुख्य याचिकाकर्ता
ज़ाकिया जाफ़री गुलबर्ग सोसाइटी मामले की सह-याचिकाकर्ता थीं, जिसका प्रतिनिधित्व राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने किया था। उन्होंने विशेष जांच दल (SIT) द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तब गुजरात के मुख्यमंत्री) और अन्य लोगों को दी गई बरीयत को चुनौती दी थी। उनका आरोप था कि 2002 के दंगों के पीछे एक बड़ा षड्यंत्र था।

28 फरवरी 2002 को अहमदाबाद के गुलबर्ग सोसाइटी में हुई हिंसा में 69 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें ज़ाकिया जाफ़री के पति एहसान जाफ़री भी शामिल थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

न्याय की लड़ाई और सुप्रीम कोर्ट का फैसला
ज़ाकिया जाफ़री ने लंबे समय तक न्याय की लड़ाई लड़ी, लेकिन 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य लोगों को दी गई बरीयत को बरकरार रखा। इस फैसले के बाद कांग्रेस पार्टी ने इसे “गहरा निराशाजनक” बताया था और कहा था कि “कुछ मौलिक सवाल अनुत्तरित रह गए हैं।”

कांग्रेस और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने जताया शोक
ज़ाकिया जाफ़री के निधन पर कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने शोक व्यक्त करते हुए कहा, “ज़ाकिया जाफ़री आज चल बसीं। उन्होंने न्याय की उम्मीद को अपनी आंखों के सामने मरते देखा। भविष्य की पीढ़ियां ‘नए भारत’ का इतिहास ज़ाकिया जाफ़री के आंसुओं, कराहों, न्याय की लड़ाई और फिर उनकी हार में सुनेंगी।”

मानवाधिकार कार्यकर्ता और गुलबर्ग सोसाइटी मामले की एक अन्य याचिकाकर्ता तीस्ता सेतलवाद ने भी ज़ाकिया जाफ़री के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, “ज़ाकिया अप्पा, मानवाधिकार समुदाय की एक दयालु नेता, अभी 30 मिनट पहले चल बसीं! उनकी दूरदर्शी उपस्थिति को देश, परिवार, दोस्तों और दुनिया द्वारा याद किया जाएगा।”

कपिल सिब्बल ने की थी सुप्रीम कोर्ट की आलोचना
कपिल सिब्बल ने 2022 के फैसले की आलोचना करते हुए कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में अब कोई उम्मीद नहीं बची है। उन्होंने कहा था, “अगर आप सोचते हैं कि आपको सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलेगी, तो आप बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं। और मैं यह सुप्रीम कोर्ट में 50 साल तक प्रैक्टिस करने के बाद कह रहा हूं।”

ज़ाकिया जाफ़री का निधन न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि न्याय की लड़ाई लड़ने वाले पूरे समुदाय के लिए एक बड़ी क्षति है। उनकी लड़ाई और संघर्ष को हमेशा याद रखा जाएगा।

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