Economic survey 2025: आर्थिक सर्वेक्षण में जीडीपी वृद्धि 6.3-6.8% का अनुमान
नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2025 से पहले, आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 का मसौदा प्रस्तुत किया गया, जिसमें अगले वित्तीय वर्ष (FY26) के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.3% से 6.8% के बीच रहने का अनुमान है। यह जानकारी अधिकारियों ने दी। आर्थिक सर्वेक्षण, जिसे मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. आनंथा नागेश्वरन और उनकी टीम ने तैयार किया है, आज दोपहर संसद में पेश किया जाएगा।

वर्तमान वित्तीय वर्ष में 6.4% वृद्धि का अनुमान
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के अनुमानों के अनुसार, इस वित्तीय वर्ष में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.4% रहने की संभावना है, जो पिछले वर्ष के अनुमानित 6.5-7% से थोड़ी कम है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और पिछले वर्ष के आर्थिक सर्वेक्षण में 6.6% वृद्धि का अनुमान था।
आर्थिक सर्वेक्षण का उद्देश्य
हर साल केंद्रीय बजट से पहले आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें वर्तमान वित्तीय वर्ष की व्यापक आर्थिक स्थिति का आकलन किया जाता है और अगले वित्तीय वर्ष के लिए आर्थिक दिशा-निर्देश दिए जाते हैं। यह सर्वेक्षण देश की अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं को कवर करता है, जिसमें उत्पादन, सेवाएं, व्यापार, निवेश, और रोजगार के क्षेत्र शामिल होते हैं।
बजट 2025 की प्रमुख उम्मीदें
2025 के बजट से पहले, व्यापार, उद्योग, और आम जनता ने सरकार से कई महत्वपूर्ण घोषणाओं की उम्मीद जताई है। इनमें निम्नलिखित मुख्य बातें शामिल हैं:
- टैक्स राहत: व्यक्तिगत आयकर स्लैब में बदलाव और करदाताओं के लिए राहत की संभावना।
- कैपेक्स (कैपिटल एक्सपेंडिचर) में वृद्धि: सरकारी निवेश को बढ़ाकर अर्थव्यवस्था को गति देने की कोशिश।
- खपत को बढ़ावा देना: उपभोक्ता खर्च को बढ़ाने के लिए विभिन्न उपाय।
- वित्तीय अनुशासन: विकास और fiscal प्रूडेंस (वित्तीय विवेक) के बीच संतुलन बनाने के लिए अप्रत्यक्ष करों का उपयोग।
नौकरी और निवेशक की उम्मीदें
भारत सरकार की नीति के तहत बड़े पैमाने पर निवेश के लिए विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने की दिशा में भी कुछ अहम फैसले हो सकते हैं। निवेशकों की उम्मीद है कि इस बजट में व्यवसाय और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए कुछ घोषणाएं की जाएं, जिससे देश में रोजगार के अवसर और उत्पादन में वृद्धि हो सके।
भविष्य में आर्थिक विकास
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था अगले वित्तीय वर्ष में स्थिरता और समृद्धि की ओर बढ़ेगी। हालांकि, कुछ चिंताएँ भी हैं जैसे वैश्विक मंदी और आपूर्ति श्रृंखला की समस्याएं, जिनका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
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