रिपोर्ट- अंकुर कपूर
Panchkula : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की राजनीतिक राहें और विचारधाराएं भले ही अलग-अलग हों, लेकिन हरियाणा की प्रगति और प्रदेश की जनता की खुशहाली सभी की साझा मंजिल है। सभी जनप्रतिनिधियों की पहचान हरियाणा की जनता के प्रतिनिधि के रूप में है और उनका दायित्व जनता की आकांक्षाओं एवं जरूरतों को समझकर प्रदेश के विकास में योगदान देना है।
मुख्यमंत्री सोमवार को पंचकूला के इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में हरियाणा विधानसभा की ओर से संविधान पखवाड़े के तहत आयोजित जनप्रतिनिधि सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी मौजूद रहे।

Panchkula : 60 वर्षों की विकास यात्रा पर गर्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा ने अपनी स्थापना के 60 वर्ष पूरे कर लिए हैं और प्रदेश हीरक जयंती मना रहा है। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेकर भविष्य की दिशा तय करने का अवसर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की उपस्थिति से सम्मेलन की गरिमा बढ़ी है। संसदीय प्रक्रियाओं, सदन की मर्यादा और जनप्रतिनिधियों के दायित्वों पर उनका मार्गदर्शन सभी के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि हीरक जयंती समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आगमन हरियाणा की जनता के लिए गौरव का विषय रहा।
Panchkula : 54 से 90 तक पहुंची विधानसभा की सीटें
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हरियाणा विधानसभा के इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि 1 नवंबर 1966 को हरियाणा अस्तित्व में आया था। उस समय विधानसभा में 54 सदस्य थे। वर्ष 1967 में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़कर 81 हुई और 1977 में यह संख्या 90 हो गई।
उन्होंने कहा कि विधानसभा की सीटों में अब और बढ़ोतरी की आवश्यकता है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को प्रतिनिधित्व मिल सके और आम जनता तक सुविधाओं की पहुंच बढ़े। आज हरियाणा 15वीं विधानसभा के दौर में अपनी लोकतांत्रिक यात्रा आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने बताया कि विधानसभा की पहली बैठक 6 दिसंबर 1966 को हुई थी।
Panchkula : विधानसभा लोकतंत्र और जवाबदेही का महत्वपूर्ण मंच
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा केवल कानून बनाने का मंच नहीं है, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग को स्वीकृति देने और सरकार को जवाबदेह बनाने की महत्वपूर्ण संस्था भी है। सदन में उठाया गया एक सार्थक सवाल किसी गांव की समस्या का समाधान करा सकता है, जबकि किसी विधेयक पर दिया गया उपयोगी सुझाव लाखों लोगों के जीवन को बेहतर बना सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण, बजट चर्चा और समितियों की कार्यवाही संसदीय व्यवस्था को मजबूत बनाती है। इन प्रक्रियाओं का प्रभावी उपयोग करने के लिए जनप्रतिनिधियों को अध्ययन, तैयारी और जनता से निरंतर संपर्क बनाए रखना चाहिए।
सैनी ने कहा कि विपक्ष द्वारा उठाए गए जनहित के मुद्दों को गंभीरता से सुनना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है। सदन में तीखी बहस हो सकती है, लेकिन भाषा की गरिमा बनी रहनी चाहिए। जनप्रतिनिधियों को व्यक्तिगत आक्षेपों से बचते हुए तर्क और तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए।
Panchkula :संविधान के मूल्यों को आचरण में उतारने की अपील
मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता के आदर्श निहित हैं। इन मूल्यों को केवल भाषणों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि शासन और जनप्रतिनिधियों के व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब पात्र नागरिक को बिना भेदभाव उसका अधिकार मिलता है, कमजोर व्यक्ति की सुनवाई होती है और समाज में परस्पर सम्मान बढ़ता है, तभी संवैधानिक मूल्यों को मजबूती मिलती है।
मुख्यमंत्री ने वर्तमान और पूर्व विधायकों से अपने क्षेत्रों में युवाओं के साथ संविधान संवाद आयोजित करने का आग्रह किया। विद्यालयों और महाविद्यालयों में युवा संसद, संविधान की प्रस्तावना का वाचन और स्थानीय समस्याओं पर चर्चा जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।
Panchkula : 2047 के विकसित भारत में हरियाणा की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में हरियाणा की भूमिका अभी से तैयार करनी होगी। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, आधुनिक कृषि और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने जल संरक्षण, स्वच्छ पर्यावरण और संतुलित शहरी विकास को भी महत्वपूर्ण बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई तकनीक का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचना चाहिए और विकास का फायदा गांवों तथा शहरों दोनों को मिलना चाहिए।
Panchkula : जनभागीदारी से बनेगा विकसित हरियाणा
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित हरियाणा के निर्माण में जनभागीदारी बेहद जरूरी है। किसी क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकताओं को वहां रहने वाले लोग बेहतर तरीके से समझते हैं। इसलिए विकास की प्राथमिकताएं तय करते समय महिलाओं, किसानों, श्रमिकों, युवाओं, उद्यमियों और वंचित वर्गों की आवाज सुनी जानी चाहिए।
उन्होंने जनप्रतिनिधियों से सरकार और समाज के बीच संवाद का सशक्त माध्यम बनने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाली पीढ़ियां हमसे पूछेंगी कि निर्णय लेने का अवसर मिलने पर हमने उनके भविष्य के लिए क्या किया। इसका जवाब हमारे काम में दिखाई देना चाहिए। अंत में उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से सदन की गरिमा बनाए रखने, जनसंवाद मजबूत करने और संवैधानिक मूल्यों को अपने आचरण में उतारने का संकल्प लेने की अपील की।
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