BY: Yoganand Shrivastva
Ashutosh Ranka असम में कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका और संगठन से जुड़े कई कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का मामला सामने आया है। सीजेपी की ओर से दावा किया गया है कि यह कार्रवाई गुवाहाटी में प्रस्तावित स्वयंसेवक बैठक शुरू होने से पहले की गई। पार्टी के अनुसार, रांका और अन्य सदस्यों को पुलिस एक स्थान पर ले गई।
Ashutosh Ranka आ सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस कार्रवाई का विरोध किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर दावा किया कि हिरासत में लिए गए लोगों को किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया जा रहा था। पार्टी की ओर से यह भी कहा गया कि वकील उस स्थान के बाहर मौजूद थे, लेकिन उन्हें हिरासत में लिए गए सदस्यों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई।
बैठक से पहले कई कार्यकर्ताओं को रोके जाने का दावा
Ashutosh Ranka आशुतोष रांका शनिवार को गुवाहाटी पहुंचे थे और रविवार को सीजेपी की क्षेत्रीय स्वयंसेवक बैठक में शामिल होने वाले थे। संगठन की ओर से बताया गया था कि बैठक में स्थानीय स्वयंसेवकों के साथ बातचीत की जानी थी। रिपोर्टों के मुताबिक, बैठक शुरू होने से पहले ही रांका और कई अन्य सदस्यों को हिरासत में लिया गया।
सीजेपी का दावा है कि बैठक स्थल की ओर जाने वाले रास्तों पर भी पुलिस की मौजूदगी रही और कार्यक्रम में शामिल होने पहुंच रहे कुछ लोगों को रोका गया। पार्टी के अनुसार, बैठक में करीब 200 से 300 स्वयंसेवकों के शामिल होने की योजना थी।
आशुतोष रांका ने असम सरकार पर लगाए आरोप
Ashutosh Ranka हिरासत में लिए जाने से पहले आशुतोष रांका ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा पर आरोप लगाए। रांका का कहना था कि सीजेपी राज्य के सरकारी स्कूलों की स्थिति और काजीरंगा क्षेत्र में लोगों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को सामने लाना चाहती है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जमीन, जंगल और पानी से जुड़े अधिकारों को लेकर स्थानीय लोगों के हित प्रभावित हो रहे हैं। ये आरोप रांका और सीजेपी की ओर से लगाए गए हैं।
सीजेपी ने असम में स्कूलों, जमीन और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को उठाने की बात कही थी। संगठन ने राज्य में अपनी पहली क्षेत्रीय स्वयंसेवक बैठक के जरिए स्थानीय कार्यकर्ताओं से संवाद करने की योजना बनाई थी।
फिलहाल हिरासत में लिए गए सभी लोगों की स्थिति और पुलिस की ओर से कार्रवाई के आधार के संबंध में उपलब्ध रिपोर्टों में सीमित जानकारी है। मामले में पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद घटनाक्रम की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।


