रिपोर्ट: विशाल दुबे, अभिषेक तिवारी, संतोष सराबगी एवं राम यादव
Pitru Paksha Men Pitru Tarpan : उज्जैन/विदिशा/गंजबासौदा/डबरा, पितृ पक्ष की शुरुआत के साथ मध्यप्रदेश के अलग-अलग शहरों में श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों का स्मरण कर तर्पण और श्राद्ध कर्म किया। उज्जैन में गयाकोठा तीर्थ, सिद्धवट और रामघाट पर श्रद्धालुओं ने पिंडदान और तर्पण किया, तो गंजबासौदा और विदिशा में बेतवा नदी के घाटों पर भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। डबरा में सिंध नदी घाट पर श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पितरों को तर्पण अर्पित किया।

Pitru Paksha Men Pitru Tarpan : उज्जैन में गयाकोठा, सिद्धवट और रामघाट पर तर्पण
महाकाल की नगरी उज्जैन में पितृ पक्ष के दौरान गयाकोठा तीर्थ, सिद्धवट और रामघाट पर श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और पूजन किया। सुबह से ही घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई। लोगों ने शिप्रा स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य दिया और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पितृ कर्म किया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गयाकोठा तीर्थ का पितृ कर्म से विशेष संबंध माना जाता है। पुजारी विप्लव व्यास के मुताबिक पितृ पक्ष के दौरान श्रद्धालु यहां भगवान विष्णु के चरण, गयाधर, गजाधर और जटेश्वर महादेव को जल और दूध अर्पित कर पितरों के निमित्त पूजा करते हैं।
गयाकोठा से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में भगवान श्रीकृष्ण, सांदीपनि ऋषि और गयाधर की कथाओं का उल्लेख मिलता है। इन कथाओं का आधार धार्मिक परंपराएं और मान्यताएं हैं। आस्था के स्तर पर गयाकोठा आज भी पितृ कर्म के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है।
Pitru Paksha Men Pitru Tarpan : गंजबासौदा में बेतवा नदी के रिपटा घाट पर पहुंचे श्रद्धालु
पितृ पक्ष के पहले दिन गंजबासौदा के बेतवा नदी स्थित रिपटा घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। लोगों ने विधि-विधान से अपने दिवंगत परिजनों का स्मरण करते हुए तर्पण किया।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इस वर्ष हिंदू उत्सव समिति की ओर से घाट पर नि:शुल्क तर्पण सामग्री का वितरण किया गया। ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं को तर्पण की विधि कराई गई।
समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने घाट पर व्यवस्थाओं में सहयोग किया। समिति की इस पहल से दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं को तर्पण सामग्री उपलब्ध कराने में सुविधा मिली।

Pitru Paksha Men Pitru Tarpan : विदिशा में 16 दिनों तक चलेगा तर्पण का सिलसिला
विदिशा में भी बेतवा नदी के घाट पर शनिवार सुबह से तर्पण की प्रक्रिया शुरू हुई। श्रद्धालु कुशा, तिल, दूध और अन्य पूजन सामग्री लेकर घाट पर पहुंचे और ब्राह्मणों की मौजूदगी में विधि-विधान से तर्पण किया।
पंडित राजेंद्र दुबे के अनुसार, धार्मिक मान्यताओं में पितृ पक्ष के दौरान किए जाने वाले श्राद्ध और तर्पण को पूर्वजों के स्मरण से जोड़ा जाता है। श्रद्धालुओं ने भी अपने परिवार के दिवंगत सदस्यों को याद करते हुए तर्पण किया।
Pitru Paksha Men Pitru Tarpan : डबरा में सिंध नदी घाट पर उमड़ी भीड़
डबरा में सिंध नदी घाट पर भी पितृ पक्ष के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। सुबह से ही शहर और आसपास के क्षेत्रों से लोग अपने पितरों के निमित्त तर्पण के लिए घाट पर पहुंचे।
श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जल, तिल और फूल अर्पित किए। पंडितों ने पितरों की शांति के लिए पूजा-अर्चना कराई। घाट पर मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के चलते वातावरण भक्तिमय नजर आया। पितृ पक्ष के दौरान मध्यप्रदेश के अलग-अलग शहरों के घाटों पर उमड़ रही श्रद्धा से साफ है कि पूर्वजों के स्मरण, श्राद्ध और तर्पण की परंपरा आज भी लोगों की धार्मिक आस्था का हिस्सा बनी हुई है।
पितरों का तर्पण क्यों किया जाता है और कब तक रहता है पितृ पक्ष?
हिंदू धर्म की मान्यताओं में पितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपने दिवंगत परिजनों के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि तर्पण के माध्यम से जल, तिल और अन्य सामग्री अर्पित कर पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है और उनकी आत्मिक शांति की कामना की जाती है। माना जाता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया श्राद्ध परिवार में सुख-समृद्धि और पूर्वजों के आशीर्वाद का माध्यम बनता है।
पितृ पक्ष भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन अमावस्या तक चलता है और सामान्यतः इसकी अवधि करीब 16 दिनों की होती है। इस दौरान अलग-अलग तिथियों पर परिवार अपने दिवंगत परिजनों का श्राद्ध करता है। अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या होती है, जिसे पितृ पक्ष का समापन माना जाता है।
Pitru Paksha Men Pitru Tarpan क्यों किया जाता है और कब तक रहता है पितृ पक्ष?
हिंदू धर्म की मान्यताओं में पितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपने दिवंगत परिजनों के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि तर्पण के माध्यम से जल, तिल और अन्य सामग्री अर्पित कर पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है और उनकी आत्मिक शांति की कामना की जाती है। माना जाता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया श्राद्ध परिवार में सुख-समृद्धि और पूर्वजों के आशीर्वाद का माध्यम बनता है।
पितृ पक्ष भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन अमावस्या तक चलता है और सामान्यतः इसकी अवधि करीब 16 दिनों की होती है। इस दौरान अलग-अलग तिथियों पर परिवार अपने दिवंगत परिजनों का श्राद्ध करता है। अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या होती है, जिसे पितृ पक्ष का समापन माना जाता है।
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