UP Four State Division : जातीय जनगणना से UP बंटवारे तक, 2027 की रणभूमि,यूपी बंटवारे की नई चर्चा फिर शूर, सवाल और सियासी बवाल
UP Four State Division : उत्तर प्रदेश के बंटवारे की चर्चा एक बार फिर सियासी बहस का हिस्सा है। अगर यूपी को चार राज्यों में बांटने का प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो पूर्वांचल की राजनीति, क्षेत्रीय नेतृत्व और जातिगत समीकरणों पर इसका असर पड़ सकता है। इसी बीच ओम प्रकाश राजभर की राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल उठता है, कि क्या पूर्वांचल की सियासत में राजभर का प्रभाव नए सिरे से केंद्र में आ सकता है ? दरअसल उत्तर प्रदेश… देश का सबसे बड़ा सियासी मैदान। जहां साल 2027 में होने वाले चुनाव की शंखनाद हो चुका है। लेकिन अब इसी प्रदेश के चार हिस्सों में बंटवारे की चर्चा ने सियासत को गरमा दिया है। पूर्वांचल, मध्यांचल, बुंदेलखंड और हरित प्रदेश… ये है वो चार संभावित राज्य, जिनका जिक्र यूपी सरकार के मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने किया है। राजभर का दावा है कि जातीय जनगणना के बाद यूपी का बंटवारा हो सकता है। इतना ही नहीं, पूर्वांचल राज्य बनने पर पहला मुख्यमंत्री राजभर समाज से होने की बात भी उन्होंने कही है। अब पूर्वांचल का बंटवारा सिर्फ नक्शे की लकीर नहीं, बल्कि क्षेत्रीय पहचान, सामाजिक प्रतिनिधित्व और सत्ता में हिस्सेदारी की नई बहस भी बन सकता है।तो सवाल है कि क्या यूपी के बंटवारे की मांग विकास से आगे बढ़कर सामाजिक प्रतिनिधित्व की सियासत बन रही है ? पूर्वांचल में राजभर, यादव, दलित, सवर्ण और दूसरी पिछड़ी जातियों के समीकरण कैसे बदलेंगे ? और क्या छोटे राज्य की मांग के पीछे 2027 का सियासी गणित भी है ???? इसी मुद्दे पर हम चर्चा करेंगे लेकिन पहले देखिये ये रिपोर्ट।।।।
UP Four State Division : साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले उत्तरप्रदेश की राजनीति में ओपी राजभर ने एक बड़ा दांव चला है। उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और सुभासपा के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया है कि भविष्य में उत्तर प्रदेश का चार अलग-अलग राज्यों में विभाजन होना तय है और यदि पूर्वांचल अलग राज्य बनता है, तो वहां राजभर समाज का बेटा ही पहला मुख्यमंत्री बनेगा। सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने 20 सितंबर को देवरिया जिले के सोनूघाट स्थित जनता इंटर कॉलेज में आयोजित ‘सामाजिक समरसता महारैली’ में यह बयान दिया।राजभर ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में किसी भी दल के साथ होने वाले चुनावी गठबंधन के लिए यह उनकी पार्टी की एक अनिवार्य और गैर-समझौता योग्य शर्त होगी कि पूर्वांचल का मुख्यमंत्री राजभर समुदाय से ही हो। इसी मंच से उन्होंने जातिगत जनगणना और 27% ओबीसी आरक्षण के भीतर हिस्सेदारी/उप-वर्गीकरण का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि जातिगत जनगणना के बाद राज्य के बंटवारे पर विचार किया जा सकता है।उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी के बीच राज्य के बंटवारे की चर्चा का राजनीतिक महत्व बढ़ गया है। क्षेत्रीय पहचान, विकास की मांग और सामाजिक प्रतिनिधित्व.. ये तीनों मुद्दे चुनावी बहस में उठ सकते हैं।
UP Four State Division : राजभर की पार्टी बीजेपी के साथ गठबंधन में है। ऐसे में उनके बयान का असर गठबंधन की राजनीति, पूर्वांचल में सहयोगी दलों की भूमिका और अलग राज्य की मांग पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के रूप में देखा जा सकता है।उत्तर प्रदेश को अलग-अलग राज्यों में बांटने की मांग नई नहीं है। इस बार राजभर ने अपने भाषण में यूपी के चार हिस्सों में बंटने का दावा किया है। जिसमें उन्होंने पूर्वांचल, मध्यांचल, बुंदेलखंड और हरित प्रदेश की बात कही है।अब राजभाग के बयान के बाद एक बार फिर यूपी के विभाजन का मुद्दा राजनीति के गलियारों में हैं, जिस पर सियासी बयानबाजी शुरू हो गई है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के विभाजन की मांग पहले भी उठती रही है। वर्ष 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती की सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश विधानसभा में राज्य को चार हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव पास हुआ था, जिसे केंद्र सरकार की मंजूरी नहीं मिली थी। अब अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले यूपी के बंटवारे के मुद्दा फिर सुर्खियों में है। और इस चर्चा के साथ पूर्वांचल की राजनीति में नेतृत्व, जातीय प्रतिनिधित्व और विकास का सवाल फिर सामने है। ओम प्रकाश राजभर ने अपनी मांग और राजनीतिक दावेदारी स्पष्ट कर दी है। अब देखना होगा कि यह मुद्दा केवल बयानबाजी तक सीमित रहता है या आगे चलकर राज्य पुनर्गठन और सामाजिक प्रतिनिधित्व की व्यापक बहस का हिस्सा बनता है।।


