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Aaj ka Panchang: अष्टमी तिथि और आयुष्मान योग का बन रहा संयोग, जानें शुभ-अशुभ समय

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Aaj ka Panchang: हर दिन के पंचांग में तिथि, नक्षत्र, योग, करण और शुभ-अशुभ समय का विशेष महत्व माना जाता है। 19 सितंबर 2026, शनिवार को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि रहेगी। इस दिन मूल नक्षत्र और आयुष्मान योग का संयोग बन रहा है, जिसे धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

शनिवार होने के कारण इस दिन शनिदेव की आराधना, दान-पुण्य और आत्मचिंतन का भी विशेष महत्व रहेगा। पंचांग के अनुसार दिन में तिथि, योग और करण में परिवर्तन होगा। ऐसे में पूजा-पाठ या किसी महत्वपूर्ण कार्य की योजना बनाने से पहले शुभ और अशुभ समय की जानकारी लेना उपयोगी माना जाता है।

19 सितंबर 2026 का पंचांग विवरण

19 सितंबर को शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि दोपहर 3 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि का आरंभ होगा। शनिवार का दिन होने के कारण धार्मिक अनुष्ठानों और शनिदेव की पूजा के लिए भी यह दिन विशेष माना जाता है।

  • तिथि: शुक्ल पक्ष अष्टमी, दोपहर 3:28 बजे तक
  • वार: शनिवार
  • नक्षत्र: मूल, रात 1:44 बजे तक
  • योग: आयुष्मान, दोपहर 2:29 बजे तक
  • करण: बव, दोपहर 3:27 बजे तक
  • अमांत मास: भाद्रपद
  • पूर्णिमांत मास: भाद्रपद
  • विक्रम संवत: 2083, सिद्धार्थ
  • शक संवत: 1948, प्रभाउ
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चंद्र राशि: धनु
  • ऋतु: शरद
  • अयन: दक्षिणायन
  • दिशाशूल: पूर्व
  • चंद्र निवास: पूर्व

19 सितंबर को शुभ मुहूर्त और राहुकाल

19 सितंबर 2026 को शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 28 मिनट से दोपहर 12 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। इस अवधि को शुभ कार्यों के लिए उपयोगी माना जाता है। वहीं राहुकाल सुबह 8 बजकर 49 मिनट से 10 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान महत्वपूर्ण शुभ कार्यों को शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।

इसके अलावा गुलिक काल सुबह 5 बजकर 46 मिनट से 7 बजकर 18 मिनट तक और यमघण्ट काल दोपहर 1 बजकर 24 मिनट से 2 बजकर 56 मिनट तक रहेगा।

  • शुभ मुहूर्त: सुबह 11:28 बजे से दोपहर 12:16 बजे तक
  • राहुकाल: सुबह 8:49 बजे से 10:21 बजे तक
  • गुलिक काल: सुबह 5:46 बजे से 7:18 बजे तक
  • यमघण्ट काल: दोपहर 1:24 बजे से 2:56 बजे तक

19 सितंबर को सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय का समय

पंचांग के अनुसार 19 सितंबर को सूर्योदय सुबह 5 बजकर 46 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 59 मिनट पर होगा। चंद्रमा का उदय दोपहर 1 बजकर 10 मिनट पर तथा चंद्रास्त रात 11 बजकर 36 मिनट पर होगा।

  • सूर्योदय: सुबह 5:46 बजे
  • सूर्यास्त: शाम 5:59 बजे
  • चंद्रोदय: दोपहर 1:10 बजे
  • चंद्रास्त: रात 11:36 बजे

19 सितंबर का धार्मिक महत्व

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। शनिवार का दिन होने के कारण शनिदेव की पूजा, तिल के तेल का अर्पण, दान और जरूरतमंदों की सहायता जैसे धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व बताया जाता है।

इस दिन मूल नक्षत्र रहेगा, जिसे ज्योतिषीय परंपराओं में आत्ममंथन, पुराने कार्यों की समीक्षा और नए संकल्पों से जोड़कर देखा जाता है। वहीं आयुष्मान योग को सकारात्मक और मंगलकारी कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन अपने इष्ट देव की आराधना के साथ भगवान विष्णु और शनिदेव की पूजा कर सुख-शांति की कामना कर सकते हैं।

19 सितंबर को क्या करना शुभ माना जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनना और पूजा-अर्चना करना शुभ माना जाता है। घर के मंदिर में दीपक जलाकर भगवान का ध्यान करने के साथ अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र जाप किया जा सकता है।

शनिवार होने के कारण शनिदेव को तिल का तेल अर्पित करने और जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करने की परंपरा भी प्रचलित है। इसके साथ ही दिनभर सकारात्मक विचार रखने और संयमित व्यवहार करने को भी धार्मिक दृष्टि से अच्छा माना जाता है।

19 सितंबर की पूजा-विधि

सुबह स्नान के बाद स्वच्छ कपड़े पहनकर पूजा स्थल की सफाई करें। इसके बाद भगवान विष्णु, शनिदेव और अपने इष्ट देव का ध्यान करें। घर के मंदिर में दीपक जलाकर विधि-विधान से पूजा करें।

शनिदेव की पूजा करते समय तिल के तेल का दीपक या तेल अर्पित किया जा सकता है। जरूरतमंद लोगों को अन्न या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करें। अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान का नाम स्मरण और मंत्र जाप करें। पूजा के दौरान मन को शांत रखते हुए सकारात्मक संकल्प लेना भी इस दिन की धार्मिक साधना का हिस्सा माना जाता है।

निष्कर्ष

19 सितंबर 2026 का दिन भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी, मूल नक्षत्र, आयुष्मान योग और शनिवार के संयोग के कारण धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहेगा। इस दिन पूजा-पाठ, दान-पुण्य, शनिदेव की आराधना और आत्मचिंतन जैसे कार्यों को विशेष महत्व दिया जाता है।

पंचांग में दिए गए शुभ-अशुभ समय के अनुसार कार्यों की योजना बनाना और अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप पूजा-अर्चना करना इस दिन की विशेषता रहेगी। पंचांग के मुहूर्त स्थान और परंपरा के अनुसार कुछ अंतर भी हो सकता है, इसलिए महत्वपूर्ण धार्मिक या मांगलिक कार्य के लिए स्थानीय पंचांग की पुष्टि करना उचित माना जाता है।

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