Ujjain Yuva Dharm Sansad: उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद के दूसरे दिन धर्म की अवधारणा और आधुनिक जीवन में उसकी भूमिका पर चर्चा हुई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने युवाओं से संवाद करते हुए धर्म और रिलिजन के बीच अंतर को समझाया। उन्होंने कहा कि धर्म को केवल पूजा-पद्धति, कर्मकांड या किसी एक धार्मिक प्रक्रिया तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। धर्म व्यक्ति के जीवन को अनुशासन, दिशा और उद्देश्य देने वाली व्यापक अवधारणा है।
Ujjain Yuva Dharm Sansad: गीता भवन में 17 से 19 सितंबर तक चल रहे इस आयोजन में देश के 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से युवा शामिल हो रहे हैं। अलग-अलग सत्रों में धर्म, संस्कृति, शिक्षा, तकनीक, मानवीय मूल्य और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर युवाओं से संवाद किया जा रहा है।
Ujjain Yuva Dharm Sansad: भागवत ने समझाया धर्म और रिलिजन में अंतर
Ujjain Yuva Dharm Sansad: डॉ. मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि धर्म को केवल रिलिजन या पूजा-पद्धति मानना उचित नहीं है। उनके अनुसार कर्मकांड धर्म के अभ्यास का एक हिस्सा हो सकता है, लेकिन कर्मकांड को ही संपूर्ण धर्म नहीं माना जा सकता।
Ujjain Yuva Dharm Sansad: उन्होंने धर्म को जीवन में अनुशासन और सही दिशा देने वाली अवधारणा के तौर पर समझाया। उनके संबोधन में इस बात पर जोर रहा कि व्यक्ति अपने जीवन में भौतिक सुखों और इच्छाओं की पूर्ति के साथ जीवन के व्यापक उद्देश्य को भी समझे।
Ujjain Yuva Dharm Sansad: कुश्ती के उदाहरण से बताया धर्म का अभ्यास
Ujjain Yuva Dharm Sansad: धर्म की अवधारणा को युवाओं के लिए सरल तरीके से समझाने के लिए डॉ. भागवत ने कुश्ती का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह कुश्ती सीखने के लिए अखाड़े में नियमित अभ्यास करना पड़ता है, उसी तरह धर्म के कर्मकांड और अनुशासन उसके अभ्यास का हिस्सा हैं।
Ujjain Yuva Dharm Sansad: उन्होंने युवाओं से धर्म को केवल सुनने या पढ़ने तक सीमित नहीं रखने, बल्कि उसके संदेश को अपने व्यवहार और जीवन में उतारने की बात कही। उनके संबोधन में धर्म को जीवन के आचरण से जोड़कर देखने पर जोर दिया गया।
Ujjain Yuva Dharm Sansad: अर्थ और काम के साथ मोक्ष की दिशा पर जोर
Ujjain Yuva Dharm Sansad: डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि मनुष्य जीवन में अर्थ और काम से जुड़े भौतिक सुखों की अपेक्षा करता है। इसके साथ ही धर्म का पालन जीवन को सुख देने के साथ मोक्ष की दिशा में भी ले जाने वाला माना गया है।
Ujjain Yuva Dharm Sansad: उन्होंने महाभारत की फलश्रुति और भारत सावित्री के भाव का उल्लेख करते हुए युवाओं को उसके संदेश को जीवन में उतारने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने धर्म को समझने, उस पर विचार करने और उसे दैनिक व्यवहार से जोड़ने का संदेश दिया।
Ujjain Yuva Dharm Sansad: दीप प्रज्वलन और वंदे मातरम् से हुई शुरुआत
Ujjain Yuva Dharm Sansad: कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. मोहन भागवत द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का गायन किया गया। कार्यक्रम में डॉ. भागवत का स्वागत और सम्मान भी किया गया।
Ujjain Yuva Dharm Sansad: आयोजन में सेवाग्य संस्थान के संरक्षक स्वामी मिथिलेश नंदिनी शरण महाराज सहित संत, विद्वान और विशेषज्ञ मौजूद रहे। युवा धर्म संसद के अलग-अलग सत्रों में युवाओं को विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श का अवसर दिया जा रहा है।
Ujjain Yuva Dharm Sansad: 24 राज्यों के युवा ले रहे हिस्सा
Ujjain Yuva Dharm Sansad: उज्जैन में हो रहे इस तीन दिवसीय आयोजन में 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से युवा पहुंचे हैं। धर्म और संस्कृति के साथ शिक्षा, तकनीक, मानवीय मूल्य और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर भी संवाद हो रहा है।
Ujjain Yuva Dharm Sansad: आयोजन के दौरान मनोज मुंतशिर, स्वामी अवधेशानंद गिरि सहित अन्य विद्वान और विशेषज्ञ भी युवाओं से संवाद कर रहे हैं। अलग-अलग सत्रों में युवाओं को समकालीन विषयों पर विचार रखने और विशेषज्ञों से चर्चा करने का अवसर दिया जा रहा है।
Ujjain Yuva Dharm Sansad: 19 सितंबर को प्रस्तावित है समापन
Ujjain Yuva Dharm Sansad: युवा धर्म संसद का आयोजन 17 से 19 सितंबर तक उज्जैन के गीता भवन में किया जा रहा है। कार्यक्रम का समापन 19 सितंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में प्रस्तावित है। समापन से पहले विभिन्न सत्रों में धर्म और उससे जुड़े सामाजिक, सांस्कृतिक एवं समकालीन विषयों पर चर्चा जारी रहेगी।


