New York: 31 मई 1947 को न्यूयॉर्क में जन्मे जेफरी कैगेल की जिंदगी की दिशा उस समय पूरी तरह बदल गई, जब उन्होंने अध्यात्म की तलाश में भारत आने का फैसला किया। साल 1970 में भारत पहुंचे जेफरी के सामने उस समय न तो किसी बड़े करियर का लक्ष्य था और न ही प्रसिद्धि हासिल करने की इच्छा। वह जीवन के वास्तविक अर्थ और अपने भीतर के सवालों के जवाब तलाशने के लिए भारत आए थे।
भारत की आध्यात्मिक परंपराओं से उनका जुड़ाव धीरे-धीरे गहरा होता गया। इसी तलाश के दौरान उनका संपर्क उत्तराखंड के प्रसिद्ध संत नीम करोली बाबा से हुआ। बाबा के साथ हुई मुलाकात जेफरी के जीवन का ऐसा मोड़ साबित हुई, जिसने उनकी आगे की पूरी यात्रा बदल दी।
New York: नीम करोली बाबा के आश्रम में बिताया लंबा समय
जेफरी कैगेल का उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम और नीम करोली बाबा के आश्रम से खास रिश्ता बन गया। बताया जाता है कि उन्होंने करीब ढाई साल आश्रम में रहते हुए आध्यात्मिक जीवन को करीब से समझा।
इस दौरान नीम करोली बाबा की शिक्षाओं और उनके सान्निध्य का जेफरी पर गहरा प्रभाव पड़ा। धीरे-धीरे उनका पुराना परिचय पीछे छूटने लगा और आध्यात्मिक दुनिया में उन्हें एक नई पहचान मिली। नीम करोली बाबा ने उन्हें ‘कृष्णदास’ नाम दिया। इसके बाद यही नाम उनकी जिंदगी और पहचान का अभिन्न हिस्सा बन गया।
New York: बाबा ने सेवा को लेकर दिया था खास संदेश
कृष्णदास ने एक इंटरव्यू में अपनी भारत यात्रा और नीम करोली बाबा के साथ बिताए समय से जुड़े कई अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि जब भारत से अमेरिका लौटने का समय आया तो उनके मन में यह सवाल था कि वह अमेरिका जाकर बाबा के लिए किस तरह कुछ कर सकते हैं।
उन्होंने बाबा से इस बारे में पूछा था। कृष्णदास के मुताबिक, बाबा ने उन्हें समझाया था कि सेवा करने के लिए किसी से अनुमति मांगने की जरूरत नहीं होती। इसी दौरान बाबा ने उनके भविष्य को लेकर भी एक बात कही थी कि अमेरिका में कृष्णदास उनकी आवाज बनेंगे।
बाद के वर्षों में कृष्णदास का जीवन जिस तरह भक्ति संगीत और कीर्तन से जुड़ा, उसे उनकी उस आध्यात्मिक यात्रा का विस्तार माना जाता है।
New York: संगीत को बनाया भक्ति और साधना का माध्यम
कृष्णदास ने भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में मौजूद कीर्तन, मंत्र और भक्ति संगीत को अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बना लिया। उन्होंने भारतीय मंत्रों और भजनों को अपनी आवाज में प्रस्तुत किया और धीरे-धीरे इस संगीत को पश्चिमी दुनिया के श्रोताओं तक पहुंचाने लगे।
उनकी प्रस्तुतियों में हारमोनियम, मंत्रोच्चार और कीर्तन का विशेष स्थान रहा है। कृष्णदास के लिए संगीत सिर्फ मंच पर प्रस्तुति देने या मनोरंजन का जरिया नहीं रहा। वह इसे आत्मिक अनुभव, साधना और लोगों को भीतर की शांति से जोड़ने का माध्यम मानते रहे हैं।
उनकी आवाज में गाए गए भक्ति गीतों ने भारत से बाहर भी बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित किया और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान मिली।
New York: ‘हनुमान अंश’ में सुनाई देगी कृष्णदास की आवाज
कृष्णदास की नीम करोली बाबा से जुड़ी आध्यात्मिक यात्रा अब फिल्म के जरिए भी दर्शकों तक पहुंच रही है। नीम करोली बाबा पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ में कृष्णदास के दो भजन शामिल किए गए हैं।
फिल्म में उनकी आवाज में ‘सीता राम’ और ‘ओम नमः शिवाय’ सुनने को मिलेंगे। खास बात यह है कि ये दोनों भक्ति रचनाएं कृष्णदास की अपनी आवाज में हैं। इस तरह जिस व्यक्ति ने दशकों तक कीर्तन और भक्ति संगीत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाया, उसकी आवाज अब फिल्म के माध्यम से भी दर्शकों तक पहुंच रही है।
‘हनुमान अंश’ 7 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। फिल्म को दर्शकों की ओर से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है और इसकी कमाई 130 करोड़ रुपये से अधिक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। खास बात यह है कि फिल्म का बजट करीब 2 करोड़ रुपये बताया गया है।
New York: कृष्णदास के भजनों की दुनिया भर में लोकप्रियता
कृष्णदास ने कई वर्षों तक लगातार भक्ति संगीत और कीर्तन के क्षेत्र में काम किया है। साल 1996 से उन्होंने कई एल्बम जारी किए और अपनी अलग संगीत शैली विकसित की। उनकी प्रस्तुतियों में भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और पश्चिमी संगीत के अनुभव का अनूठा मेल देखने को मिलता है।
उनका एल्बम ‘लाइव आनंदा’ साल 2012 में ग्रैमी अवॉर्ड के लिए नामांकित हुआ था। उनकी आवाज में प्रस्तुत हनुमान चालीसा भी दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में काफी लोकप्रिय है।
न्यूयॉर्क के एक चर्च में उनके द्वारा हनुमान चालीसा की प्रस्तुति का वीडियो और उससे जुड़े अनुभव भी लोगों के बीच चर्चा में रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के दौर में कृष्णदास के भजन और कीर्तन बड़ी संख्या में लोग सुनते हैं और उनकी प्रस्तुतियों को आध्यात्मिक संगीत के रूप में पसंद किया जाता है।
New York: भक्ति संगीत के जरिए लोगों तक पहुंचाया शांति का संदेश
कृष्णदास ने अपने संगीत और कीर्तन की यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए एक फाउंडेशन की स्थापना भी की। इसके जरिए आध्यात्मिक शिक्षाओं और भक्ति संगीत से जुड़े संदेशों को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।
उनकी सोच में संगीत केवल धार्मिक अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं है। वह इसे मनुष्य के भीतर मौजूद शांति और आध्यात्मिक चेतना से जुड़ने का जरिया मानते हैं। यही वजह है कि उनके कीर्तन में अलग-अलग संस्कृतियों और पृष्ठभूमि से आने वाले लोग भी जुड़ते हैं।
उनकी प्रस्तुतियों में भारतीय भक्ति परंपरा की झलक साफ दिखाई देती है, लेकिन इसका प्रभाव किसी एक धर्म या संस्कृति की सीमा तक सीमित नहीं रहता।
New York: विराट कोहली और अनुष्का शर्मा भी कृष्णदास के प्रशंसक
कृष्णदास के संगीत की लोकप्रियता आम श्रोताओं के साथ-साथ भारतीय मनोरंजन और खेल जगत की चर्चित हस्तियों तक भी पहुंची है। भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा भी उनके संगीत और आध्यात्मिक प्रस्तुतियों से प्रभावित बताए जाते हैं।
दोनों की आध्यात्मिक संगीत और कीर्तन में रुचि कई मौकों पर सामने आती रही है। कृष्णदास के कार्यक्रमों और संगीत को लेकर भी इस चर्चित जोड़ी की दिलचस्पी की खबरें सामने आती रही हैं।
इससे यह भी पता चलता है कि कृष्णदास की संगीत यात्रा सिर्फ विदेशों तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारत में भी उनके भक्ति संगीत का अपना एक बड़ा प्रशंसक वर्ग है।
New York: भारत आकर फिर कैंची धाम पहुंचे कृष्णदास
कृष्णदास इन दिनों फिर भारत आए हुए हैं और देश के अलग-अलग शहरों में अपने संगीत कार्यक्रम कर रहे हैं। ऋषिकेश और दिल्ली में उनके कार्यक्रम हो चुके हैं, जबकि मुंबई और बेंगलुरु में भी उनके कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
भारत दौरे के दौरान उनका कैंची धाम जाना भी खास रहा। यही वह जगह है, जहां से उनकी आध्यात्मिक यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण यादें जुड़ी हुई हैं। दशकों पहले जिस स्थान पर वह एक आध्यात्मिक खोजी के रूप में पहुंचे थे, आज उसी जगह से उनका रिश्ता उनकी पूरी पहचान का हिस्सा बन चुका है।
New York: जिस भारत में तलाशने आए थे जवाब, वहीं मिली नई पहचान
जेफरी कैगेल की कहानी भारत और अमेरिका के बीच सिर्फ एक व्यक्ति की यात्रा की कहानी नहीं है। यह उस आध्यात्मिक तलाश की कहानी है, जिसने न्यूयॉर्क में जन्मे एक युवक को दुनिया के सामने कृष्णदास के रूप में पहचान दिलाई।
साल 1970 में जीवन के गहरे सवालों के जवाब खोजने भारत पहुंचे जेफरी ने यहां नीम करोली बाबा का सान्निध्य पाया। इसके बाद उनका जीवन भक्ति, कीर्तन और आध्यात्मिक संगीत के इर्द-गिर्द आगे बढ़ता गया।
आज कृष्णदास की आवाज दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सुनी जाती है। उनके लिए भारत सिर्फ वह देश नहीं है, जहां वह कभी आध्यात्मिक खोज के लिए आए थे, बल्कि उनकी अपनी आध्यात्मिक पहचान और जीवन यात्रा का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है।


