POK : पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में लंबे समय से जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच हालात एक बार फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। बुधवार को सड़कों को खाली कराने के लिए चलाए गए अभियान के दौरान हुई गोलीबारी में एक पाकिस्तानी पैरामिलिट्री रेंजर की मौत हो गई, जबकि एक अन्य जवान गंभीर रूप से घायल बताया जा रहा है। पाकिस्तानी पुलिस ने इस घटना के लिए आंदोलन का नेतृत्व कर रही जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (JAAC) से जुड़े हथियारबंद लोगों को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, प्रदर्शनकारी पक्ष ने इन आरोपों को खारिज किया है।
POK : पीओके में सड़कें खाली कराने के दौरान हुआ टकराव
पुलिस के अनुसार, सरसावा-थोरार-थल क्षेत्र में लंबे समय से बंद सड़कों को यातायात के लिए खोलने की कार्रवाई की जा रही थी। इसी दौरान सुरक्षा बलों पर गोलीबारी की गई। अधिकारियों का दावा है कि गोलीबारी में पैरामिलिट्री के एक जवान की जान चली गई और दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया।
स्थानीय इलाकों में लंबे समय से चल रहे प्रदर्शन के कारण कई प्रमुख मार्ग बाधित हैं। इससे लोगों की आवाजाही के साथ-साथ जरूरी सामान की आपूर्ति भी प्रभावित होने की बात सामने आई है। प्रशासन का कहना है कि सड़कों को खोलना सामान्य जनजीवन बहाल करने के लिए जरूरी था।
POK : पुलिस ने JAAC के हथियारबंद लोगों पर लगाया आरोप
पाकिस्तानी अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि सड़क खाली कराने की कार्रवाई के दौरान प्रतिबंधित अवामी एक्शन कमिटी से जुड़े हथियारबंद लोगों ने सुरक्षा बलों पर स्वचालित हथियारों से गोलीबारी की। पुलिस का कहना है कि इसी फायरिंग में रेंजर की मौत हुई।
हालांकि, आंदोलनकारी संगठन ने सुरक्षा बलों पर लगे आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार की ओर से उनके आंदोलन को हिंसक साबित करने की कोशिश की जा रही है। उनके मुताबिक, इससे सेना और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को सही ठहराने का आधार तैयार किया जा रहा है।
POK : कई महीनों से जारी है पीओके में आंदोलन
पीओके में पिछले कई महीनों से अलग-अलग मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की ओर से महंगाई, बिजली, खाद्य आपूर्ति और अन्य स्थानीय समस्याओं को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई जाती रही है।
इन प्रदर्शनों के दौरान कई जगहों पर सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की घटनाएं भी सामने आई हैं। स्थिति उस समय और संवेदनशील हो गई जब विरोध प्रदर्शनों के बीच पुलिस और सेना की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठने लगे।
POK : प्रदर्शनकारियों ने सेना पर लगाया गंभीर आरोप
आंदोलनकारी पक्ष का आरोप है कि क्षेत्र में सुरक्षा बलों की तैनाती और सड़क बंद किए जाने की वजह से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर भी आपत्ति जताई है।
JAAC से जुड़े नेताओं का कहना है कि दबाव और गोलीबारी के बावजूद उनका आंदोलन खत्म नहीं होगा। संगठन ने सरकार से स्थानीय लोगों की मांगों पर बातचीत करने और बल प्रयोग के बजाय राजनीतिक समाधान निकालने की मांग की है।
POK : सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच बढ़ा तनाव
रेंजर की मौत के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है। एक तरफ प्रशासन बंद रास्तों को खुलवाने और सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रदर्शनकारी अपनी मांगों से पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहे हैं।
ताजा घटना ने पीओके में लंबे समय से चले आ रहे सरकार और आंदोलनकारियों के बीच विवाद को और गंभीर बना दिया है। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई और JAAC की प्रतिक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।
POK : आपूर्ति और यातायात पर भी पड़ा असर
प्रदर्शन के चलते कई इलाकों में सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई है। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, रास्ते बंद रहने से परिवहन व्यवस्था के साथ-साथ खाने-पीने और दूसरी जरूरी वस्तुओं की सप्लाई पर भी असर पड़ा है।
सरकार जहां सड़कें खोलने को जरूरी बता रही है, वहीं प्रदर्शनकारी इसके लिए प्रशासन की नीतियों और कथित नाकेबंदी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के दावों में लगातार विरोधाभास सामने आ रहा है।
POK : चुनावी घटनाओं के बाद भी नहीं थमा विवाद
पीओके में तनाव का असर हाल के क्षेत्रीय चुनावों से जुड़ी घटनाओं के दौरान भी देखने को मिला था। चुनावी प्रक्रिया के दौरान हुई झड़पों और उसके बाद की कार्रवाई ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक तनाव को बढ़ाया।
अब रेंजर की मौत की घटना के बाद यह विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। प्रशासन के सामने एक ओर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी ओर प्रदर्शनकारियों की मांगों को लेकर बातचीत का रास्ता निकालने का दबाव भी है।
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