India Bangladesh: भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश की राजधानी ढाका में पहुंचकर दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ऐसे कदम उठाए जाएंगे, जिनसे भारत और बांग्लादेश की जनता को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
त्रिवेदी ने ढाका में भारतीय मिशन का कार्यभार संभालने के लिए सड़क मार्ग से यात्रा की और बेनापोल–पेट्रापोल सीमा से पैदल सीमा पार कर बांग्लादेश में प्रवेश किया। यह क्षण उनके आगमन को और भी प्रतीकात्मक बनाता है।
India Bangladesh: सीमा पार पहुंचने के दौरान दिया महत्वपूर्ण बयान
सीमा पार करने के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश केवल पड़ोसी देश नहीं, बल्कि साझा इतिहास, संस्कृति और भावनाओं से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के लोग एक ही आकाश, हवा और कई सामाजिक अनुभव साझा करते हैं। उनका संदेश स्पष्ट था कि रिश्तों को केवल कूटनीति तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे जनता के स्तर तक और मजबूत किया जाएगा।
India Bangladesh: सहयोग, व्यापार और तकनीकी क्षेत्र पर फोकस
भारतीय उच्चायुक्त ने तकनीकी नवाचार और विकास सहयोग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश मिलकर तकनीक, व्यापार और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में नई संभावनाओं को आगे बढ़ा सकते हैं।
उन्होंने यात्रा और व्यापार पर लगी बाधाओं को कम करने की आवश्यकता पर भी संकेत दिया और कहा कि भविष्य में ऐसे प्रयास किए जाएंगे जिससे सीमापार गतिविधियां आसान और लाभकारी बन सकें।
India Bangladesh: 55 साल के राजनयिक इतिहास में विशेष नियुक्ति
भारत ने अप्रैल में दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में अपना 18वां उच्चायुक्त नियुक्त किया था। यह निर्णय इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि भारत में सामान्यतः भारतीय विदेश सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों को इस पद पर भेजा जाता है।
त्रिवेदी इस परंपरा से अलग एक वरिष्ठ राजनेता हैं और वे भारतीय राजनीति में एक अनुभवी चेहरा माने जाते हैं।
India Bangladesh: पहली बार राजनेता को मिली उच्चायुक्त की जिम्मेदारी
भारत और बांग्लादेश के 55 वर्षों के राजनयिक संबंधों में यह पहली बार है जब किसी राजनेता को उच्चायुक्त बनाया गया है। इसे एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है।
बताया जाता है कि प्रधानमंत्री से उनके करीबी संबंध और बंगाली भाषा व संस्कृति की गहरी समझ को उनकी नियुक्ति में अहम कारण माना गया है। इस कदम से उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग और अधिक प्रभावी होगा।
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