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Anuppur: पानी के लिए अडानी से आर-पार की जंग! केवई नदी की धार रोकने पर भड़के ग्रामीण; झुकना पड़ा प्रबंधन, पोकलेन से खोलना पड़ा बैराज

Anuppur

Report: Punit sen

Anuppur मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में अडानी पावर प्लांट और स्थानीय ग्रामीणों के बीच ‘पानी’ को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। क्षेत्र की जीवनदायिनी मानी जाने वाली केवई नदी की बहती धार को कंपनी द्वारा बैराज बनाकर रोके जाने के बाद, जनता का गुस्सा फूट पड़ा। कांग्रेस के नेतृत्व में हुए उग्र विरोध प्रदर्शन के आगे आखिरकार कंपनी प्रबंधन को झुकना पड़ा और पोकलेन मशीन बुलाकर नदी के रुके हुए पानी को छोड़ना पड़ा।

Anuppur 5 लाख की आबादी के जलसंकट का सवाल

मामला अनूपपुर के छतई स्थित अडानी पावर प्लांट से जुड़ा है। कंपनी ने अपने प्लांट की जरूरतों को पूरा करने के लिए केवई नदी पर बैराज का निर्माण किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस बैराज के कारण नदी की प्राकृतिक धार पूरी तरह रुक गई थी, जिससे नीचे के क्षेत्रों में नदी सूखने की कगार पर पहुँच गई। उल्लेखनीय है कि इस नदी के जलस्रोत पर लगभग 5 लाख की आबादी अपनी दैनिक जरूरतों और खेती के लिए निर्भर है।

Anuppur अडानी के बैराज पर धरना, सरकार के खिलाफ नारेबाजी

आने वाले दिनों में पानी की भारी किल्लत की आशंका को देखते हुए कांग्रेस जिलाध्यक्ष गुड्डू चौहान एवं जिला पंचायत सदस्य रिंकू रामजी मिश्रा के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीण बैराज स्थल पर ही धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने अडानी प्रबंधन के साथ-साथ प्रदेश की भाजपा सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्थानीय कैबिनेट मंत्री दिलीप जायसवाल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मौके पर तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी भी तैनात रहे।

Anuppur वादे से मुकरने का आरोप: ‘सोन’ के बदले ‘केवई’ पर कब्जा

ग्रामीणों ने कंपनी पर धोखेबाजी का गंभीर आरोप लगाया है।

  • क्या था वादा: बैराज निर्माण के समय कंपनी ने आश्वासन दिया था कि वे केवई नदी की धार को प्रभावित नहीं करेंगे। पानी सोन नदी से पाइपलाइन के जरिए लाया जाएगा और यहाँ केवल स्टॉक किया जाएगा।
  • हकीकत: आरोप है कि कंपनी ने गुपचुप तरीके से केवई नदी की मुख्य धार को ही रोककर बैराज भरना शुरू कर दिया, जिससे नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया।

Anuppur बढ़ते दबाव के बाद झुका प्रबंधन

जनता के बढ़ते आक्रोश और धरने के दबाव में आकर अंततः अडानी कंपनी के अधिकारियों को पीछे हटना पड़ा। प्रशासन की मौजूदगी में पोकलेन मशीन मंगवाई गई और बैराज के पास रोकी गई पानी की धार को दोबारा खोला गया। नदी में फिर से पानी बहता देख ग्रामीणों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया है।

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