Chhattisgarh SIR Voter List पर बढ़ा सियासी घमासान
छत्तीसगढ़ में SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद अब मतदाताओं के आंकड़ों को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। एक ओर चुनाव आयोग की ओर से SIR प्रक्रिया पूरी कर चुके राज्यों में छूटे हुए पात्र मतदाताओं और पहली बार पात्र बने युवा मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए Form-6 के जरिए अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ में SIR के बाद मतदाता सूची में हुई कमी को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
Chhattisgarh SIR Voter List में छूटे नामों को जोड़ने की तैयारी
SIR के बाद जिन पात्र मतदाताओं के नाम किसी वजह से अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं, उनके लिए एक बार फिर नाम जुड़वाने का रास्ता खुला है। इसके लिए Form-6 के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है। बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO ऐसे पात्र मतदाताओं की पहचान और पंजीयन प्रक्रिया में मदद करने के लिए घर-घर संपर्क करेंगे। पहली बार पात्र बने युवा मतदाताओं के नाम भी इस प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची में शामिल किए जाने हैं।
Chhattisgarh SIR Voter List के आंकड़ों पर मोहम्मद अकबर ने उठाए सवाल
इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने छत्तीसगढ़ में SIR के बाद सामने आए आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। अकबर के अनुसार, SIR के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची में 24 लाख 99 हजार 823 मतदाताओं की कमी दर्ज हुई है। उन्होंने इस आंकड़े की तुलना वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच रहे कुल मतों के अंतर से करते हुए प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
Chhattisgarh SIR Voter List में 19 लाख से ज्यादा नामों को बताया गया Shifted या Absent
मोहम्मद अकबर के मुताबिक, मतदाता संख्या में आई कुल कमी में से 19 लाख 13 हजार 540 मतदाताओं को ‘Shifted’ या ‘Absent’ श्रेणी में चिह्नित किया गया है। उनका कहना है कि कई लोग रोजगार, शिक्षा, कामकाज या अन्य कारणों से अपने पंजीकृत पते पर मौजूद नहीं हो सकते हैं। ऐसे में अकबर ने मांग की है कि इस तरह के मामलों की व्यक्तिगत स्तर पर समीक्षा हो और संबंधित मतदाताओं को नोटिस तथा अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त अवसर दिया जाए।
Chhattisgarh SIR Voter List को लेकर 2023 के चुनावी आंकड़ों का जिक्र
अकबर ने अपने तर्क में वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, उस चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कुल मतों का अंतर 6 लाख 32 हजार 382 था, जबकि SIR के बाद मतदाता सूची में कमी का आंकड़ा 24 लाख 99 हजार 823 है। अकबर ने इसी अंतर को आधार बनाकर मतदाता सूची से कम हुए नामों की प्रक्रिया और उसके प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं। यह तुलना अकबर द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों पर आधारित है।
Chhattisgarh SIR Voter List पर बीजेपी विधायक अजय चंद्राकर का पलटवार
कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर के आरोपों पर बीजेपी विधायक अजय चंद्राकर ने पलटवार किया है। चंद्राकर ने अकबर की ओर से पेश किए गए आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके आंकड़े समय और राजनीतिक परिस्थिति के अनुसार बदलते रहे हैं। उन्होंने अकबर पर तंज कसते हुए उन्हें ‘आंकड़ों का खिलाड़ी’ बताया और कहा कि उन्हें राजनीति छोड़कर सांख्यिकी विभाग में नौकरी करनी चाहिए।
Chhattisgarh SIR Voter List पर आरोप-प्रत्यारोप से बढ़ी सियासी बहस
SIR के बाद मतदाता सूची में हुई कमी अब छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक प्रमुख बहस का मुद्दा बन गई है। कांग्रेस की ओर से मतदाता सूची में कम हुए नामों और ‘Shifted’ तथा ‘Absent’ श्रेणी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि बीजेपी इन दावों और आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रही है। इस तरह बहस केवल मतदाता सूची के आंकड़ों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि SIR की प्रक्रिया को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
Chhattisgarh SIR Voter List में कितने नाम वापस जुड़ेंगे?
अब सवाल यह है कि SIR के दौरान अंतिम सूची में शामिल नहीं हो पाए पात्र मतदाताओं में से कितने लोग Form-6 के जरिए दोबारा मतदाता सूची में शामिल होंगे। साथ ही, पहली बार पात्र बने युवाओं के कितने नाम इस अभियान के माध्यम से जोड़े जाएंगे। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि Form-6 अभियान के जरिए मतदाता सूची में कितनी नई प्रविष्टियां होती हैं।
Chhattisgarh SIR Voter List के आंकड़ों पर आगे भी जारी रह सकती है बहस
छत्तीसगढ़ में SIR के बाद मतदाता संख्या में दर्ज कमी और अलग-अलग श्रेणियों में रखे गए मतदाताओं को लेकर राजनीतिक बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है। फिलहाल एक ओर पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया पर जोर है, तो दूसरी ओर राजनीतिक दल SIR के दौरान सामने आए आंकड़ों की अलग-अलग व्याख्या कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में Form-6 से जुड़ने वाले नाम और निर्वाचन प्रक्रिया से संबंधित आधिकारिक आंकड़े इस बहस के महत्वपूर्ण आधार होंगे।
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