MP Milk Capital बनने की दिशा में मध्यप्रदेश का बड़ा विजन
मध्यप्रदेश में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लगातार योजनाओं और अधोसंरचना के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य गोपालन को केवल पारंपरिक गतिविधि तक सीमित न रखते हुए इसे किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने वाली आर्थिक गतिविधि के रूप में विकसित करना है। इसी दिशा में मध्यप्रदेश को देश के प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों में मजबूत पहचान दिलाने और ‘मिल्क कैपिटल’ के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
MP Milk Capital के लिए दुग्ध उत्पादन बढ़ाने पर फोकस
मध्यप्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका है। अब गोपालन को प्रोत्साहन देकर किसानों और पशुपालकों के लिए अतिरिक्त आय का मजबूत जरिया बनाने की कोशिश की जा रही है। दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए बेहतर नस्ल, पशु स्वास्थ्य, चारा प्रबंधन और आधुनिक पशुपालन तकनीकों को बढ़ावा देने पर जोर है। इसका उद्देश्य पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने के साथ पशुपालकों की आमदनी में भी वृद्धि करना है।
MP Milk Capital में डेयरी सेक्टर को विस्तार देने की तैयारी
मध्यप्रदेश में डेयरी सेक्टर के विस्तार के लिए कई योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। इनमें डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना और यशोदा मिल्क सप्लाई योजना प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन योजनाओं के जरिए एक ओर आधुनिक डेयरी इकाइयों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पशुपालकों को नियमित आय का स्रोत उपलब्ध कराने और दूध की खपत बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
MP Milk Capital में NDDB के सहयोग से डेयरी नेटवर्क मजबूत होगा
मध्यप्रदेश राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन से संबद्ध दुग्ध संघों और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड यानी NDDB के बीच सहकारी डेयरी क्षेत्र के विकास के लिए सहयोग समझौता किया गया है। इसके तहत प्रदेश में दुग्ध सहकारी समितियों के विस्तार, दूध उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि पर काम किया जाएगा।
NDDB की ओर से राज्य के डेयरी फेडरेशन और दुग्ध संघों के आधुनिकीकरण, संचालन तथा तकनीकी सुधार में सहयोग दिया जाएगा। इसके साथ ही दूध संग्रहण नेटवर्क, चिलिंग सेंटर, डेयरी प्लांट और दूध प्रसंस्करण क्षमता के विस्तार पर भी ध्यान दिया जाएगा।
MP Milk Capital में Sanchi Brand की मार्केटिंग पर जोर
डेयरी क्षेत्र के विस्तार के साथ मध्यप्रदेश के सहकारी ब्रांड ‘सांची’ को मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। दूध और दुग्ध उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग, मूल्य संवर्धन और बाजार तक पहुंच बढ़ाने पर जोर है। इसके अलावा पशुओं की नस्ल सुधार, पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं, डिजिटल तकनीक और गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़े कार्य भी संयुक्त रूप से किए जाने की योजना है।
MP Milk Capital के लिए उज्जैन में बनेगा 255 करोड़ का आधुनिक डेयरी प्लांट
उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने के लिए मध्यप्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ की ओर से 255 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक डेयरी प्लांट स्थापित किया जा रहा है। 3 अक्टूबर को केंद्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री अमित शाह भोपाल से इस परियोजना का डिजिटल भूमि-पूजन करेंगे।
परियोजना की कुल लागत में से 170 करोड़ रुपये राज्य शासन की ओर से अनुदान के रूप में दिए जाएंगे, जबकि बाकी 85 करोड़ रुपये दुग्ध संघ द्वारा ऋण के माध्यम से जुटाए जाएंगे। इस परियोजना को अगले दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
MP Milk Capital में उज्जैन प्लांट से बढ़ेगी प्रोसेसिंग क्षमता
उज्जैन में प्रस्तावित अत्याधुनिक डेयरी प्लांट से क्षेत्र में दूध के प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके जरिए विभिन्न प्रकार के डेयरी उत्पादों के उत्पादन को भी गति देने का लक्ष्य है। सरकार की मंशा अधिक से अधिक गांवों में दुग्ध सहकारी समितियां स्थापित करने, किसानों को दूध का उचित मूल्य दिलाने और डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने की है।
MP Milk Capital में डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना
डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना का उद्देश्य दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और आधुनिक डेयरी इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित करना है। इसके जरिए पशुपालकों की आय बढ़ाने और डेयरी व्यवसाय को विस्तार देने का लक्ष्य रखा गया है।
इस योजना के लिए 150 करोड़ रुपये से अधिक का बजट प्रावधान बताया गया है। पात्र हितग्राहियों को 25 दुधारू गाय या भैंस की डेयरी यूनिट स्थापित करने के लिए अनुदान दिया जाता है। अधिकतम आठ इकाइयों और 200 पशुओं तक के बड़े डेयरी प्रोजेक्ट की व्यवस्था भी इसमें बताई गई है।
प्रति इकाई लाभार्थी के पास कम से कम 3.50 एकड़ कृषि भूमि होना जरूरी है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को 33 प्रतिशत तक अनुदान तथा सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के हितग्राहियों को 25 प्रतिशत तक अनुदान दिए जाने का प्रावधान बताया गया है।
MP Milk Capital में मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना से पशुपालकों को मदद
मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना के तहत पात्र पशुपालकों को अनुदान पर उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली दो मुर्रा नस्ल की भैंसें उपलब्ध कराई जाती हैं। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करना है।
पशुपालकों के लिए डेयरी को नियमित आय के स्रोत के रूप में विकसित करने की दिशा में भी यह योजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्र में पशुपालन आधारित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का लक्ष्य है।
MP Milk Capital में यशोदा मिल्क सप्लाई योजना
यशोदा मिल्क सप्लाई योजना का उद्देश्य स्कूली बच्चों में कुपोषण कम करना, उनके स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सुधार लाना तथा दूध के उपभोग को प्रोत्साहित करना है। इसके तहत सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को निर्धारित दिनों में दूध उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
इस तरह डेयरी सेक्टर को बढ़ावा देने के साथ दूध की खपत और पोषण से जुड़े लक्ष्यों को भी एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
MP Milk Capital में 7,331 से 26 हजार गांवों तक सहकारी समितियां
मध्यप्रदेश में वर्तमान में 7,331 गांवों में दुग्ध सहकारी समितियां संचालित होने की जानकारी दी गई है। इनकी संख्या बढ़ाकर 26,000 गांवों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे ज्यादा से ज्यादा ग्रामीण परिवारों को संगठित डेयरी नेटवर्क से जोड़ने और किसानों को दूध के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी।
MP Milk Capital में चार गुना से ज्यादा बढ़ेगा पैकेट दूध का विक्रय
डेयरी सेक्टर के विस्तार की योजना में पैकेट दूध की बिक्री बढ़ाने का भी लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में पैकेट दूध का विक्रय करीब 7 लाख लीटर प्रतिदिन बताया गया है, जिसे बढ़ाकर 35 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके साथ ही दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता को 17.8 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर 32.5 लाख लीटर प्रतिदिन करने की योजना है। कृत्रिम गर्भाधान कवरेज को भी 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे पशुओं की नस्ल सुधार और दुग्ध उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल सके।
MP Milk Capital के लिए 2,973 करोड़ की डेयरी विकास योजना
जनवरी 2025 की कैबिनेट बैठक में डेयरी विकास के लिए 2,973 करोड़ रुपये की योजना मंजूर किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके बाद 13 अप्रैल 2025 को एमपीसीडीएफ, संबद्ध दुग्ध संघों और एनडीडीबी के बीच सहकार्यता अनुबंध किया गया।
इसी अनुबंध के तहत मिल्क प्रोसेसिंग और डेयरी संयंत्रों के विकास पर 1,547 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रावधान बताया गया है। इसमें 500 करोड़ रुपये राज्य सरकार की ओर से और 555 करोड़ रुपये एमपीसीडीएफ तथा दुग्ध संघों द्वारा ऋण के माध्यम से जुटाए जाने की योजना है।
इसके अलावा 489 करोड़ रुपये का प्रबंध एमएसएमई विभाग के माध्यम से निजी डेयरी संयंत्रों की भागीदारी से किए जाने की जानकारी दी गई है।
MP Milk Capital में डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर का मालिकाना हक सरकार के पास रहेगा
सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली राशि से तैयार होने वाले संयंत्रों और डेयरी अधोसंरचनाओं का मालिकाना हक पशुपालन एवं डेयरी विभाग के पास ही रहने की व्यवस्था बताई गई है। इनका संचालन दुग्ध संघों को सौंपा जाएगा।
इस पूरी रणनीति में दूध संग्रहण से लेकर चिलिंग, प्रोसेसिंग, मूल्यवर्धन और मार्केटिंग तक डेयरी सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि गांवों में दुग्ध सहकारी समितियों का नेटवर्क बढ़े, किसानों को दूध का उचित मूल्य मिले और पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए आय का मजबूत माध्यम बने।
MP Milk Capital से किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा
मध्यप्रदेश में पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, आधुनिक डेयरी प्लांट, सहकारी समितियों और प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को एक साथ विस्तार देने की योजना बनाई जा रही है। उज्जैन के 255 करोड़ रुपये के आधुनिक डेयरी प्लांट से लेकर गांवों में सहकारी समितियों के विस्तार तक कई स्तरों पर काम किया जा रहा है।
इन पहलों के जरिए सरकार का घोषित लक्ष्य दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ पशुपालकों की आय के अवसर बढ़ाना और मध्यप्रदेश को एक बड़े डेयरी हब के रूप में विकसित करना है। इसी व्यापक विजन के तहत प्रदेश को ‘मिल्क कैपिटल’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में कदम आगे बढ़ाए जा रहे हैं।
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