by: vijay nandan
भैया, होली हमारे देश का ऐसा महान त्योहार है, जिसमें आदमी अपनी असली पहचान भूलकर कई तरह के रूप धारण कर लेता है। कहने को यह रंगों का त्योहार है, लेकिन असल में यह बहुरूपिया दिवस है। सुबह जो व्यक्ति घर से साफ-सुथरे कपड़ों में निकलता है, शाम तक उसकी हालत देखकर खुद आधार कार्ड भी उसे पहचानने से मना कर दे।
holi spl hasya hathauda : होली का सबसे बड़ा सिद्धांत है, “बुरा न मानो, होली है” यह एक ऐसा लाइसेंस है, जिसके बाद लोग हर काम को सांस्कृतिक परंपरा बता देते हैं। कोई चेहरे पर रंग लगाए, कोई बालों में पेंट, तो कोई सीधे कान के पीछे तक ऐसा रंग भर देता है कि लगता है जैसे पुताई का ठेका लेकर आया हो।
holi spl hasya hathauda : पहले होली में गुलाल के हल्के रंग होते थे। अब तो रंग ऐसे आते हैं कि एक बार लग जाएं तो अगली होली तक साथ निभाने का वादा कर लेते हैं। लोग होली खेलकर घर लौटते नहीं, बल्कि ऐसे निकलते हैं जैसे किसी रंगाई की फैक्ट्री से टेस्टिंग करके आए हों। नहाते-नहाते साबुन खत्म हो जाए, फिर भी कान के पीछे से नीला रंग मुस्कुराता रहता है।
होली सामाजिक एकता का भी सबसे बड़ा उदाहरण है। जो पड़ोसी पूरे साल नमस्ते का जवाब तक नहीं देते, वही इस दिन दरवाजा खटखटाकर कहते हैं – “भाईसाब, बाहर आइए… सिर्फ थोड़ा सा गुलाल लगाना है।” और जब आप बाहर आते हैं, तो पता चलता है कि उनके “थोड़ा सा” का मतलब एक पूरी बाल्टी होता है।
holi spl hasya hathauda : होली का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष है, गुझिया। यह एकमात्र दिन है जब लोग कैलोरी, डायट और शुगर लेवल को राष्ट्रीय मुद्दा नहीं मानते। गुझिया ऐसे खाई जाती है जैसे सरकार ने घोषणा कर दी हो कि आज जितनी खाओगे, उतनी माफ।
होली का असली डर रंग से नहीं, दोस्तों से होता है। दोस्ती की गहराई इस बात से तय होती है कि कौन आपको सबसे गहरा और पक्का रंग लगाता है। और फिर मुस्कुराकर सलाह देता है, “घबराना मत, दो-तीन दिन में उतर जाएगा। मेरा अनुभव बताता है कि उसका दो-तीन दिन वैज्ञानिक रूप से 15 दिन के बराबर होते हैं।
holi spl hasya hathauda : सबसे सुरक्षित जगह होली के दिन बाथरूम मानी जाती है। लेकिन अब तो वहां भी लोग दरवाजा खटखटाकर कहते हैं, अरे यार, छिप क्यों रहे हो? बाहर आओ, दोस्ती का रंग लगाना है।
holi spl hasya hathauda : फिर भी, इन सबके बीच होली की खूबसूरती यही है कि लोग हंसते हैं, मिलते हैं और कुछ देर के लिए मन के रंग भी साफ कर लेते हैं। बस एक छोटी सी गुजारिश है, रंग हल्के रखें, केमिकल कम रखें और रिश्तों के रंग गहरे रखें।
क्योंकि होली का असली मज़ा चेहरे पर नहीं, दिल पर चढ़े रंग में होता है।





