Madhya Pradesh मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि मध्यप्रदेश अब विकास के एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर उज्जैन और नागदा क्षेत्र से आए किसान प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए उन्होंने प्रदेश के समग्र उत्थान के लिए ‘GYANII’ (ज्ञानी) का नया मूल मंत्र दिया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ₹5017 करोड़ की लागत वाली उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड परियोजना को धरातल पर उतारने की त्वरित स्वीकृति देते हुए इसे क्षेत्र की नई जीवनरेखा बताया।
‘GYANII’ मॉडल और बुनियादी ढांचे का विस्तार
Madhya Pradesh मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार अब ‘मिशन मोड’ में काम कर रही है। उन्होंने जीवाईएएन (GYAN – गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी) मॉडल में दो नए आयाम जोड़े हैं: I for Industrialization (औद्योगिकीकरण) और I for Infrastructure (बुनियादी ढांचा), जिससे यह अब ‘GYANII’ बन गया है।
- उज्जैन-जावरा हाईवे: ₹5017 करोड़ से अधिक की लागत वाला यह ग्रीनफील्ड मार्ग किसानों को देश की बड़ी मंडियों से सीधे जोड़ेगा।
- कनेक्टिविटी: आगामी बजट (2026-27) में गंभीर नदी के बांध को जोड़ते हुए एक नए मार्ग की मंजूरी दी गई है, जिससे उज्जैन और रतलाम के बीच संपर्क के तीन अलग-अलग विकल्प उपलब्ध होंगे।
Madhya Pradesh अन्नदाता से ‘ऊर्जादाता’ और ‘उद्यमी’ बनने का सफर
Madhya Pradesh किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:
- बोनस और भावांतर: ग्रीष्मकालीन उड़द पर किसानों को ₹600 प्रति क्विंटल बोनस दिया जाएगा। साथ ही सरसों को भी ‘भावांतर भुगतान योजना’ के दायरे में लाया जा रहा है।
- सोलर पंप योजना: अगले तीन वर्षों में 1 लाख किसानों को सोलर पंप दिए जाएंगे। इससे किसान न केवल सिंचाई करेंगे, बल्कि अतिरिक्त बिजली बेचकर ‘ऊर्जादाता’ और ‘उद्यमी’ भी बनेंगे।
- कृषि उद्योग: स्थानीय स्तर पर उपज के बेहतर दाम दिलाने के लिए फूड पार्क और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां (Food Processing Units) स्थापित की जाएंगी।
दुग्ध क्रांति और पोषण पर विशेष जोर
Madhya Pradesh मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी दुग्ध उत्पादक राज्य बनाने के लिए सरकार ने बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं।
- उत्पादन लक्ष्य: वर्तमान में देश के कुल दूध उत्पादन में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी 9% है, जिसे बढ़ाकर 20% करने का प्रयास जारी है।
- स्कूली बच्चों को पोषण: आगामी शैक्षणिक सत्र से कक्षा 8वीं तक के विद्यार्थियों को टेट्रा पैक में दूध उपलब्ध कराया जाएगा। इससे बच्चों को कुपोषण से मुक्ति मिलेगी और पशुपालक किसानों को दूध की खपत का एक बड़ा बाजार मिलेगा।





