Indore : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर देवी अहिल्याबाई होल्कर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा करते हुए एक बड़ी उपलब्धि साझा की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस साल मध्य प्रदेश ने गेहूं उपार्जन (खरीदी) के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। सरकार की किसान-अनुकूल नीतियों के चलते प्रदेश में अब तक रिकॉर्ड मात्रा में गेहूं की बंपर खरीदी की जा चुकी है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बड़ा संबल मिला है।
Indore गेहूं खरीदी के रिकॉर्ड आंकड़े: छोटे किसानों को मिली प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने मीडिया के सामने फसल खरीदी से जुड़े बेहद महत्वपूर्ण और आधिकारिक आंकड़े पेश किए:
- किसानों को लाभ: प्रदेश में चालू सीजन के दौरान अब तक 13 लाख 46 हजार से ज्यादा किसानों से उनके उपार्जन का सीधा लाभ दिया गया है।
- बंपर उपार्जन: इन किसानों से अब तक कुल एक करोड़ तीन लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की सरकारी खरीदी पूरी की जा चुकी है।
- सीमांत कृषकों पर फोकस: सीएम ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि इस बार नीतिगत बदलाव करते हुए छोटे और सीमांत (गरीब) किसानों को प्राथमिकता दी गई। इसी का नतीजा है कि इस वर्ग से करीब 34 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी सुनिश्चित की गई है।
Indore बिजली-पानी को मजबूत करने और जल स्रोतों के पुनरुद्धार का संकल्प
बुनियादी ढांचे का विकास: मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केवल फसल खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में बिजली, पानी और सिंचाई के बुनियादी ढांचे को मजबूत व उन्नत करने की दिशा में भी मिशन मोड पर लगातार काम कर रही है।
“जल गंगा संरक्षण अभियान” का शंखनाद:
Indore अमूर्त जल स्रोतों को सहेजने के लिए मुख्यमंत्री ने सरकार के संकल्प को दोहराया:
- सरोवरों का कायाकल्प: पूरे मध्य प्रदेश में ‘जल गंगा संरक्षण अभियान’ के अंतर्गत पारंपरिक कुओं, प्राचीन बावड़ियों, तालाबों, नहरों और नए ‘अमृत सरोवरों’ के जीर्णोद्धार और संरक्षण का काम बड़े पैमाने पर हाथ में लिया गया है।
- सामूहिक प्रयास की अपील: सीएम ने कहा कि लगातार गिरते भूजल स्तर (Ground Water Level) को सुधारना केवल सरकार के बूते संभव नहीं है; इसके लिए समाज, सामाजिक संस्थाओं और सरकार दोनों को मिलकर भागीदार बनना होगा।
Indore इंदौर में बावड़ी संरक्षण कार्यक्रम के बाद उज्जैन रवाना
मुख्यमंत्री इंदौर में जल संरक्षण की मुहिम को गति देने के लिए आयोजित एक विशेष ‘बावड़ी संरक्षण कार्यक्रम’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। यहाँ उन्होंने जल स्रोतों की सफाई और उनके संरक्षण की महत्ता पर बात की। इसके तत्काल बाद, वे प्रदेशव्यापी जल चेतना जागृत करने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘जल संरक्षण यात्रा’ के अगले पड़ाव के तहत उज्जैन के लिए रवाना हो गए।





