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Jabalpur : ट्विशा शर्मा मौत मामला: पूर्व जज गिरिबाला सिंह को बड़ा झटका, एमपी हाईकोर्ट ने रद्द की अग्रिम जमानत

Jabalpur

Report: Somnath Mishra

Jabalpur मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (High Court) ने भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मृत्यु मामले में एक बड़ा और कड़ा कानूनी फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने इस मामले की मुख्य आरोपी और पूर्व न्यायिक अधिकारी (रिटायर्ड जज) गिरिबाला सिंह को निचली अदालत से मिली अग्रिम जमानत को पूरी तरह से निरस्त (रद्द) कर दिया है। उच्च न्यायालय ने मामले को अत्यंत गंभीर और संवेदनशील माना है।

Jabalpur जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ का फैसला: ‘जमानत में हुई जल्दबाजी’

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च न्यायालय के जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने याचिका पर विस्तृत सुनवाई की। कोर्ट ने आदेश में निम्नलिखित मुख्य टिप्पणियां कीं:

  • तथ्यों की अनदेखी: हाईकोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट (निचली अदालत) ने 15 मई 2026 को अग्रिम जमानत देते समय मामले के कई अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया।
  • साक्ष्यों का सही परीक्षण नहीं: जमानत की राहत देते वक्त पोस्टमार्टम रिपोर्ट, गवाहों के बयानों और केस से जुड़े महत्वपूर्ण व्हाट्सएप चैट्स का सही ढंग से परीक्षण (इवैल्यूएशन) नहीं किया गया था।
  • CBI बनी पक्षकार: उच्च न्यायालय ने इस पूरे मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को भी आधिकारिक रूप से पक्षकार बनाने की मंजूरी दे दी है।

Jabalpur कोर्ट में सरकार और जांच एजेंसियों के बड़े तर्क

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और सीबीआई की ओर से देश के दिग्गज विधि अधिकारी—सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह पेश हुए। उन्होंने कोर्ट के सामने जांच से जुड़े कई चौंकाने वाले बिंदु रखे:

जांच एजेंसी / अभियोजन के तर्ककोर्ट में पेश किए गए मुख्य आरोप
असहयोग का आरोपअग्रिम जमानत मिलने के बाद भी आरोपी द्वारा जांच एजेंसियों को अपेक्षित सहयोग नहीं दिया गया।
बयानों से दूरीआधिकारिक नोटिस जारी होने के बावजूद आरोपी बयान दर्ज कराने से बचती रहीं।
मीडिया का इस्तेमालजांच को प्रभावित करने के उद्देश्य से सीसीटीवी (CCTV) फुटेज के केवल चुनिंदा हिस्से निकालकर मीडिया में प्रसारित किए गए।
कस्टोडियल पूछताछमामले से जुड़े डिजिटल एविडेंस और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ियां जोड़ने के लिए हिरासत में लेकर पूछताछ (Custodial Interrogation) जरूरी है।

Jabalpur पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गर्भपात के विवाद ने बढ़ाईं मुश्किलें

एंटीमॉर्टम चोटों का खुलासा: हाईकोर्ट ने अपने लिखित आदेश में मृतका ट्विशा शर्मा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का विशेष रूप से उल्लेख किया। रिपोर्ट के अनुसार, मृतका के शरीर पर मौत से पहले की कई गंभीर चोटों (Anti-mortem injuries) के निशान पाए गए थे। मेडिकल ‘क्वेरी रिपोर्ट’ से यह भी साफ हुआ है कि ये चोटें मौत के बाद शव को फंदे से उतारने या उसे अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं लगी थीं, बल्कि यह प्रताड़ना का हिस्सा थीं।

Jabalpur मानसिक तनाव और पारिवारिक कलह: अदालत ने माना कि मृतका की गर्भावस्था और उसके बाद हुए गर्भपात (Miscarriage) को लेकर परिवार के भीतर चल रहा विवाद इस पूरी तफ्तीश का मुख्य केंद्र है। शिकायतकर्ता पक्ष द्वारा कोर्ट में पेश किए गए व्हाट्सएप चैट और गवाहों की गवाही से साफ है कि मृतका लंबे समय से भारी मानसिक तनाव और प्रताड़ना से गुजर रही थी।

Jabalpur उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के कई ऐतिहासिक फैसलों का नजीर के रूप में हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि यदि कोई भी जमानत आदेश महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी कर जल्दबाजी में पारित किया गया हो, तो उच्च न्यायालय को उसमें हस्तक्षेप करने और उसे रद्द करने का पूरा विधिक अधिकार है।

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