Cow National Heritage : कोई षडयंत्र या धार्मिक भावनाओं का सम्मान ?गाय पर सियासी और सामाजिक बहस तेज
Cow National Heritage : बकरीद के मौके पर देशभर में कुर्बानी को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच देश के कुछ शहर काजियों के बयान ने नई बहस छेड़ दी है। कई शहर काजियों ने गाय को भारतीय संस्कृति, आस्था और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बताते हुए उसे राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा देने की मांग उठाई है। काजियों का कहना है कि भारत विविधताओं और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने वाला देश है। ऐसे में सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने के लिए गाय की सुरक्षा और सम्मान जरूरी है। उन्होंने मुस्लिम समाज से भी अपील की कि बकरीद पर कुर्बानी करते समय कानून और सामाजिक संवेदनशीलता का पूरा ध्यान रखा जाए। मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने कहा कि इस्लाम शांति, भाईचारे और इंसानियत का संदेश देता है। किसी भी ऐसी गतिविधि से बचना चाहिए जिससे दूसरे समुदाय की भावनाएं आहत हों। वहीं, गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग को लेकर सियासी और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। ऐसे में अब देखना होगा कि यह मुद्दा केवल धार्मिक अपील तक सीमित रहता है या फिर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बड़ी बहस का रूप लेता है। इसी मुद्दे पर हम चर्चा करेंगे लेकिन पहले ये रिपोर्ट देख लेते हैं।।
Cow National Heritage : सनातन धर्म और हिंदू शास्त्रों में गौ को पूजनीय और माता माना गया है। गौ हत्या को सबसे बड़ा महापाप माना गया है। लेकिन गाय पर क्या मौलानाओं का ‘ह्रदय परिवर्तन’ हो गया है। ये सवाल इसलिये हैं क्योंकि बकरीद (ईद-उल-अजहा) के मौके पर देश के कई प्रमुख शहर काजियों और मुस्लिम संगठनों ने गाय को राष्ट्रीय धरोहर या राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की है। उनका मानना है कि इससे गोकशी पर स्थायी रोक लगेगी और गाय के नाम पर होने वाली राजनीति और मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा। मुस्लिम पक्षकारों और उलेमाओं का तर्क है कि गाय को राष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित करने से साम्प्रदायिक तनाव घटेगा और हमेशा के लिए विवाद खत्म हो जाएगा। मुस्लिम धर्मगुरुओं का कहना है कि भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा में गाय का विशेष महत्व है। ऐसे में सामाजिक सौहार्द और भाईचारे को बनाए रखने के लिए संवेदनशीलता जरूरी है। कई शहरों में मुस्लिम समाज की बैठकों में अपील की गई कि बकरीद पर कानून और प्रशासनिक निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाए।
Cow National Heritage : एक स्वर में देशभर में बकरीद से पहले मुस्लिम धर्म गुरूओं ने गाय की देखभाल और सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने के साथ ही गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग उठाई है। मांग करने वालों का तर्क है कि जब गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा मिल जाएगा, तो इसकी सुरक्षा के लिए सरकारी मशीनरी जिम्मेदार होगी। इससे पहले भी कई हिंदू धर्म गुरू भी गाय को राष्ट्रीय पशु, राष्ट्रीय धरोहर और राष्ट्रीय माता का दर्जा देने की मांग कर चुके हैं। तो वहीं गाय को लेकर मुस्लिम धर्मगुरुओं के बयानों पर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने देश की सोच में आया एक बड़ा बदलाव बताया। और गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने की मांग को एक जन आंदोलन बनाने के लिए 27 जुलाई को देशभर में हस्ताक्षर अभियान की घोषणा की।
Cow National Heritage : अब बकरीद के साथ ही गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग को लेकर भी बहस तेज हो गई है। समर्थकों का तर्क है कि गाय भारतीय संस्कृति, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अहम आधार रही है, इसलिए उसे विशेष संरक्षण मिलना चाहिए। विपक्षी दल और कुछ सामाजिक संगठन इसे राजनीतिक और धार्मिक मुद्दा बताकर सवाल उठा रहे हैं। लेकिन बकरीद से पहले आए इन बयानों ने सियासी और सामाजिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा केवल धार्मिक अपील तक सीमित रहता है या फिर राजनीतिक विमर्श का बड़ा विषय बनता है।
Cow National Heritage : कई लोगों को लगता है कि गाय भारत की राष्ट्रीय पशु है लेकिन ऐसा नहीं है। भारत में यह दर्जा बाघ को प्राप्त है जबकि नेपाल में गाय को आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय पशु माना जाता है। वर्तमान में भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ है। केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि संविधान के अनुसार पशु संरक्षण राज्य का विषय है, इसलिए फिलहाल गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
Cow National Heritage : भारत में गाय काटने (गौहत्या) पर सजा का प्रावधान राज्य के कानूनों पर निर्भर करता है। अधिकतर राज्यों में इसके लिए कड़े कानून हैं, जिनमें दोषी पाए जाने पर 3 साल से लेकर 10 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 48 के तहत गौहत्या को रोकने के लिए अलग-अलग राज्यों में अपने-अपने कानून हैं। मध्य प्रदेश सहित ज्यादातर राज्यों में गौवध और तस्करी पर पूर्ण प्रतिबंध है, और पकड़े जाने पर 3 से 10 साल तक की जेल और 50 हजार से 10 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है।
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