Kerala Blasters: 14 साल बाद घर वापसी की दास्तान, फुटबॉल ने दिलाया परिवार से मिलन

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Kerala Blasters: A story of returning home after 14 years, reuniting with family through football

Kerala Blasters: करीब 14 साल पहले परिवार से बिछड़ा एक बालक अब युवावस्था में अपने घर लौटने की दहलीज पर खड़ा है। केरल के फुटबॉल मैदानों से अपनी पहचान बनाने वाले राजा की कहानी आज झारखंड के चाईबासा में भावनाओं का सैलाब लेकर आई है। खेल, तकनीक और सामाजिक प्रयासों के संगम ने इस असंभव लगने वाले पुनर्मिलन को संभव बना दिया।

Kerala Blasters: केरल से शुरू हुई पहचान, फुटबॉल बना सहारा

वर्ष 2013 में राजा एर्नाकुलम की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के माध्यम से पल्लुरुथी स्थित स्नेह भवन पहुंचा था। बाद में 26 नवंबर 2016 को उसे त्रिशूर के चिल्ड्रेन होम में स्थानांतरित किया गया, जहां उसकी पढ़ाई पूरी हुई। परिवार से दूर रहने के बावजूद उसने हिम्मत नहीं हारी और फुटबॉल को अपनी ताकत बना लिया।

मैदान पर उसके प्रदर्शन ने उसे इंडियन सुपर लीग क्लब की जूनियर टीम Kerala Blasters तक पहुंचा दिया। यहीं से उसकी पहचान बनने लगी और वह केरल में एक उभरते खिलाड़ी के रूप में जाना जाने लगा। खेल ने न केवल उसे पहचान दी, बल्कि आत्मविश्वास और नई उम्मीद भी दी।

Kerala Blasters: सोशल मीडिया और सामूहिक प्रयास से मिला परिवार का सुराग

3 फरवरी 2026 को राजा को कन्नूर जिले के एक आफ्टर-केयर होम में रखा गया, जहां से उसके परिवार की खोज शुरू हुई। उसने चाइल्ड वेलफेयर कमेटी से जुड़े अशरफ ओकेएम को अपने परिवार और चाईबासा से जुड़ी धुंधली जानकारी दी। इसके बाद “मिसिंग पर्सन्स केरल” व्हाट्सऐप समूह और “मिसिंग एंड फाउंड नेटवर्क” के माध्यम से सूचना साझा की गई।

अफसर अहमद खान और फर्दीन खान के प्रयासों से यह खबर झारखंड, खासकर चाईबासा तक पहुंची। रेलवे चिल्ड्रन इंडिया के चेयरमैन हरभजन सिंह के मार्गदर्शन से खोज अभियान को नई गति मिली। कुछ ही दिनों में राजा के परिवार का सफलतापूर्वक पता लगा लिया गया।

राजा को अपने गांव का पूरा पता याद नहीं था, केवल जिला मुख्यालय और कुछ रिश्तेदारों की धुंधली स्मृतियां थीं। बावजूद इसके, तकनीक, सोशल मीडिया और मानवीय संवेदनशीलता ने वर्षों पुरानी दूरी को मिटा दिया।

अब प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। अधिकारियों के अनुसार अगले 7 से 10 दिनों के भीतर राजा को उसके परिवार के पास चाईबासा लाया जाएगा। इस खबर से परिजनों के साथ-साथ पूरे इलाके में खुशी और भावुकता का माहौल है।

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यह कहानी सिर्फ एक युवक की घर वापसी नहीं, बल्कि उम्मीद, संघर्ष और मानवीय सहयोग की मिसाल है।

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